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दिल्ली

छात्र प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने क्या क्या गुल खिलाया, इन दो पत्रकारों की रिपोर्ट में पढ़िए!

दिल्ली पुलिस कैसे-कैसे कारनामे करती है, पर इन दो पत्रकारों की रिपोर्टों पर गौर फरमाइये। और दिल्ली ही क्या पूरे देश की पुलिस इसी तरह के हथकंडे यूज करती है। बहरहाल, नीचे पहली रिपोर्ट द हिंदू की विजेता सिंह की है। दूसरी रिपोर्ट अवधेश कुमार की है, जो न्यूजलॉन्ड्री में कार्यरत हैं। दोनों शानदार पत्रकार हैं। पहली रिपोर्ट विजेता की है और दूसरी अवधेश की… पढ़िए
(ट्वीट के लिंक पर क्लिक कर पूरी रिपोर्ट भी पढ़ ही आइएगा)


संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी (GD) में दर्ज एंट्री का समय गौर करने लायक है। यह 22 जुलाई को रात 1:24 बजे दर्ज की गई, यानी 20 जुलाई की घटना के दो दिन बाद और द हिंदू द्वारा यह रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने के कुछ घंटों बाद कि प्रदर्शनकारियों पर RAF ने पेलेट गन का इस्तेमाल किया था। RAF ने यह भी रिकॉर्ड में दर्ज कराया कि यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के निर्देश पर की गई थी।
इसके अलावा, 20 जुलाई की घटना के बाद RAF ने जंतर-मंतर पर तैनात अपने जवानों से शॉक बैटन, इलेक्ट्रिक शील्ड, पंप-एक्शन गन और पेलेट दागने वाली एंटी-रायट गन वापस ले लीं। RAF के महानिरीक्षक (I-G General) की समीक्षा में भी मार्च के दौरान RAF के व्यवहार में “गंभीर कमियां” पाई गईं, जो उसके “संवेदनशील पुलिसिंग” (Sensitive Policing) के सिद्धांत का उल्लंघन थीं।
-विजेता सिंह, पत्रकार


मैंने ज़मीनी स्तर पर जाकर पता लगाया कि CJP प्रदर्शन के पास पत्थरों से भरा ट्रक आखिर कैसे पहुंचा।
यह रही Newslaundry के लिए मेरी ताज़ा रिपोर्ट: CJP प्रदर्शन के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक पहुंचा। हमने पता लगाया कि वह वहां कैसे आया।
-अवधेश कुमार, पत्रकार


सचिन गुप्ता-

20 जुलाई की सुबह कॉकरोच जनता पार्टी ने एक Video जारी करके सवाल उठाये कि पत्थर से भरा ट्रक जंतर मंतर के पास क्या कर रहा है? आशंका जताई कि पुलिस खुद पथराव करके छात्रों को फंसा सकती है।

ट्रक कहां से आया? न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर अवधेश कुमार ने इसकी पड़ताल की। पता चला कि 16 जुलाई को ट्रक और मारुति ईको वैन में टक्कर हुई थी। जिसके बाद दोनों वाहन संसद मार्ग थाने के पास खड़े कर दिए गए थे।
(यह घटना पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है)

शुरुआत में पुलिस ने न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर को बताया कि यह वैन प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी है। जब रिपोर्टर ने प्रूफ सहित एक्सीडेंट वाली बात बताई तो पुलिस चुप हो गई।

इसके बाद पुलिस ने ट्रक की लोकेशन बदल दी। एक दिन यही ट्रक यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर खड़ा मिला। सवाल यह है कि पुलिस बार बार पत्थर भरे ट्रक की लोकेशन क्यों बदल रही थी? और क्यों ट्रक के बारे में क्लियर नहीं बता रही थी? हालांकि न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन कर दिया है।

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