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90 साल से इंसान जिस गणितीय सवाल से जूझ रहा था, उसे AI ने 88 घंटे में हल कर दिया… लेकिन गणितज्ञों ने एआई पर लगाया चोरी का गंभीर आरोप!

90 साल पुरानी गणितीय पहेली पर AI का दावा, 10 हजार एजेंटों ने 88 घंटे में खोजा समाधान, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी

OpenAI के दावे ने विज्ञान की दुनिया में मचाया तहलका, साथ ही उठे डेटा चोरी और क्रेडिट के सवाल, रिसर्च के इस्तेमाल को लेकर विवाद

यशवंत सिंह-

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से एक ऐसा दावा सामने आया है, जो अगर स्वतंत्र गणितीय जांच में सही साबित होता है तो वैज्ञानिक खोज के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जाएगा। OpenAI ने दावा किया है कि उसके एक नए आंतरिक AI सिस्टम ने गणित की लगभग 90 साल पुरानी और दुनिया की सबसे कठिन समस्याओं में शामिल Navier–Stokes existence and smoothness problem का समाधान खोज लिया है।

इस काम के लिए OpenAI ने करीब 10 हजार AI agents को एक साथ लगाया। कंपनी के अनुसार इन agents ने Navier–Stokes समस्या पर काम करते हुए करीब 27 लाख संदेशों का आदान-प्रदान किया और लगभग 130 अरब output tokens पैदा किए। समाधान तक पहुंचने में लगभग 88 घंटे लगे। इसके बाद Lean नामक formal proof system के जरिए verification में 17 घंटे और लगे।

लेकिन फिलहाल इसे “मानव गणित ने आधिकारिक रूप से समस्या हल कर दी” कहना जल्दबाजी होगी। यह OpenAI का दावा है। इसका स्वतंत्र peer review अभी बाकी है और Clay Mathematics Institute ने इसे Millennium Prize Problem के आधिकारिक समाधान के रूप में स्वीकार नहीं किया है।

क्या है Navier–Stokes समस्या?

Navier–Stokes equations का इस्तेमाल fluids यानी तरल और गैस जैसी चीजों की गति को समझने के लिए किया जाता है। पानी कैसे बहता है, हवा कैसे घूमती है, विमान के आसपास airflow कैसा होता है, मौसम की प्रणालियां कैसे व्यवहार करती हैं और रक्त प्रवाह को कैसे समझा जाए… ऐसे अनेक वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग सवालों में इन समीकरणों की अहम भूमिका है।

समीकरण 19वीं सदी में Claude-Louis Navier और George Gabriel Stokes के काम से विकसित हुए। 1934 में गणितज्ञ Jean Leray ने इनके solutions के generalized existence से जुड़ा महत्वपूर्ण काम किया, लेकिन तीन dimensions में smooth solution हमेशा बना रहता है या finite time में singularity पैदा हो सकती है, यह सवाल अनसुलझा रहा।

साल 2000 में Clay Mathematics Institute ने इसे सात Millennium Prize Problems में शामिल किया। प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए 10 लाख डॉलर का पुरस्कार रखा गया है।

असली सवाल क्या है?

सरल भाषा में सवाल यह है कि यदि किसी fluid की शुरुआत बिल्कुल smooth स्थिति से होती है, तो क्या Navier–Stokes equations के अनुसार उसका व्यवहार हमेशा smooth बना रहेगा? या फिर किसी सीमित समय के भीतर fluid की velocity इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि mathematical singularity पैदा हो जाए।

OpenAI का दावा इसी दूसरे रास्ते को साबित करने का है। कंपनी के अनुसार उसके AI system ने एक ऐसा analytical proof तैयार किया है जिसमें initially smooth fluid finite time में singularity तक पहुंच सकता है। इस scenario में fluid का एक vortex यानी घूमता हुआ हिस्सा अंदर की ओर spiral करता है, लगातार लंबा और पतला होता जाता है और उसकी गति बढ़ती जाती है। इसके बावजूद system के अनुसार energy finite बनी रहती है।

10 हजार AI agents ने कैसे किया काम?

यह काम किसी एक chatbot को सवाल पूछकर उत्तर हासिल करने जैसा नहीं था। OpenAI ने एक multi-agent system बनाया। अलग-अलग AI agents को अलग-अलग groups में बांटा गया। इन groups को समस्या के विभिन्न formulations और संभावित रास्तों पर काम करने दिया गया।

OpenAI के अनुसार agents को internet के cached version को पढ़ने और code चलाने जैसे tools भी उपलब्ध थे। अलग-अलग groups अपने भीतर communicate कर सकते थे और बाद में Codex की मदद से अलग-अलग groups से मिले उपयोगी mathematical insights को एक-दूसरे के साथ “cross-pollinate” किया गया।

Navier–Stokes पर काम करने वाले group में लगभग 10 हजार concurrent agents थे। कंपनी के अनुसार agents ने 5 सितंबर को, पहली बार system लॉन्च किए जाने के करीब 88 घंटे बाद, समाधान तक पहुंच बनाई। इसके बाद GPT-6 Astra के जरिए Lean formalization और verification में 17 घंटे लगे।

पहले आसान सवाल पर AI ने रास्ता खोजा

OpenAI ने सीधे Navier–Stokes पर हमला नहीं किया था। कंपनी ने उससे जुड़ी एक comparatively easier समस्या Euler equations की regularity problem पर भी agents लगाए।

OpenAI के अनुसार करीब 100 agents ने लगभग 50 घंटे काम करके unforced Euler regularity problem को resolve किया। इस सफलता के बाद कंपनी ने Navier–Stokes पर ज्यादा computational resources लगाने का फैसला किया।

यहीं से AI system को एक संभावित रास्ता मिला और फिर बड़ी संख्या में agents को Navier–Stokes पर केंद्रित कर दिया गया।

130 अरब टोकन और 27 लाख संदेश

यह अभियान जिस computational scale पर चला, वह भी अपने आप में असाधारण है। OpenAI के अनुसार केवल Navier–Stokes प्रयास के दौरान agents ने लगभग 27 लाख messages भेजे और करीब 130 अरब output tokens इस्तेमाल किए।

सभी attempted problems को मिलाकर agents ने 49 लाख messages भेजे और लगभग 300 अरब output tokens इस्तेमाल किए।

यहां यह सावधानी जरूरी है कि OpenAI ने इस प्रयास की आधिकारिक लागत कोई निश्चित डॉलर राशि के रूप में नहीं बताई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों ने computational cost का अनुमान कई मिलियन डॉलर लगाया है। इसलिए इसे “10 मिलियन डॉलर का खर्च” जैसे निश्चित तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।

क्या AI ने सचमुच Millennium Prize जीत लिया?

नहीं। कम से कम अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। OpenAI ने अपना proof और उसका Lean formalization सार्वजनिक किया है। कंपनी का कहना है कि उसका proof official Millennium Prize formulation के statements C और D को establish करता है।

लेकिन mathematical community को इस proof की स्वतंत्र जांच करनी होगी। Peer review और विशेषज्ञों की scrutiny के बाद ही यह तय होगा कि proof वास्तव में Millennium Prize की शर्तों को पूरा करता है या नहीं।

Clay Mathematics Institute की औपचारिक स्वीकृति अभी नहीं हुई है। खास बात यह भी है कि OpenAI ने साफ कहा है कि वह इस परिणाम के लिए 10 लाख डॉलर के Millennium Prize का दावा करने का इरादा नहीं रखता।

फिलहाल कहा जा सकता है, OpenAI का दावा है कि उसके AI system ने Navier–Stokes समस्या का समाधान खोज लिया है।

फिर आया सबसे बड़ा विवाद- क्या AI ने दूसरे गणितज्ञों के काम से फायदा उठाया?

OpenAI के ऐलान के साथ ही एक दूसरा विवाद भी सामने आ गया। NYU के गणितज्ञ Tristan Buckmaster और Anthropic के researcher Levent Alpöge ने Navier–Stokes से संबंधित क्षेत्र में AI की मदद से महत्वपूर्ण mathematical work किया था।

दोनों ने अपने काम में Claude और Codex सहित कई AI models का इस्तेमाल किया। उनके documents सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल उठा कि क्या OpenAI के पास उनके research process या AI sessions की कोई जानकारी पहले से थी।

Buckmaster ने इस बात पर सवाल उठाए कि OpenAI का breakthrough ठीक उसी समय क्यों सामने आया जब उनका काम भी सार्वजनिक होने की स्थिति में था।

WIRED की रिपोर्ट के मुताबिक विवाद सिर्फ mathematical priority तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस बात तक पहुंच गया कि AI कंपनियां अपने products का इस्तेमाल करने वाले researchers के काम और data से किस हद तक लाभ उठा सकती हैं।

OpenAI ने आरोपों को खारिज किया

OpenAI ने कहा है कि उसके researchers और AI agents ने Buckmaster और Alpöge का काम सार्वजनिक होने से पहले नहीं देखा था। कंपनी के अनुसार Navier–Stokes का उसका proof और दोनों गणितज्ञों का काम महत्वपूर्ण रूप से अलग है।

OpenAI ने यह भी स्पष्ट किया कि जब उसका पूरा project और Lean verification पूरा हो चुका था, तब उसने Buckmaster और Alpöge से संपर्क किया। कंपनी के मुताबिक उस समय उसे पता चला कि दोनों ने forced Euler problem पर काम किया था।

OpenAI ने दोनों के काम की priority को स्वीकार किया और उनके mathematical achievement को महत्वपूर्ण बताया।

हालांकि OpenAI ने एक महत्वपूर्ण संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया। कंपनी ने कहा कि यह संभव है, हालांकि उसके अनुसार unlikely, कि उसके products के इस्तेमाल से प्राप्त de-identified data ने उसके models को बेहतर बनाने में अप्रत्यक्ष योगदान दिया हो।

यही बात इस विवाद को और गंभीर बना देती है।

असली सवाल सिर्फ गणित का नहीं, AI की ‘रिसर्च नैतिकता’ का भी है

मान लीजिए कोई वैज्ञानिक महीनों तक AI की मदद से किसी नई mathematical theory पर काम करता है। वह AI को अपने hypotheses बताता है। वह अपने शुरुआती ideas, गलत रास्ते, calculations और संभावित solutions AI के सामने रखता है। अब अगर वही AI कंपनी कुछ समय बाद उसी क्षेत्र में कोई breakthrough कर देती है, तो सवाल उठेगा कि उस खोज का श्रेय किसे मिलेगा?

वैज्ञानिक को?

AI company को?

AI model को?

या उन सभी को?

Navier–Stokes विवाद इस भविष्य की समस्या की पहली बड़ी झलक हो सकता है। AI के दौर में scientific intellectual property सिर्फ published paper तक सीमित नहीं रहेगी। Research prompts, intermediate ideas, conversations और AI-generated experiments भी भविष्य में intellectual contribution का हिस्सा बन सकते हैं।

AI अब सिर्फ जवाब देने वाली मशीन नहीं?

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा महत्व शायद Navier–Stokes से भी आगे है। अब तक AI का इस्तेमाल मुख्यतः मौजूदा ज्ञान को खोजने, व्यवस्थित करने, समझाने और उससे नए निष्कर्ष निकालने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन multi-agent systems एक अलग संभावना खोल रहे हैं।

हजारों AI agents एक ही समस्या पर अलग-अलग hypotheses आजमा सकते हैं। वे code लिख सकते हैं। गणनाएं चला सकते हैं। गलत रास्तों को छोड़ सकते हैं। एक-दूसरे के mathematical insights को combine कर सकते हैं।

और अंततः किसी एक promising direction पर हजारों computational resources केंद्रित कर सकते हैं। यह मानव वैज्ञानिक के काम करने के तरीके से fundamentally अलग है। एक इंसान के पास एक समय में सीमित ध्यान और समय है। हजारों AI agents एक साथ हजारों संभावनाएं तलाश सकते हैं।

अगर proof सही निकला तो क्या बदलेगा?

अगर स्वतंत्र गणितज्ञ OpenAI के proof को पूरी तरह सही मान लेते हैं, तो इसका महत्व सिर्फ एक Millennium Prize Problem के हल होने तक सीमित नहीं रहेगा। यह पहली बार दिखाएगा कि AI ने मानव गणित की सबसे कठिन unresolved समस्याओं में से एक पर नया mathematical result पैदा किया है।

इसके बाद AI का इस्तेमाल physics, chemistry, biology, engineering, materials science और drug discovery जैसे क्षेत्रों में fundamental research के लिए और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

यह वैज्ञानिक खोज की गति को बदल सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर मशीन ऐसे proofs बनाने लगे जिन्हें computer तो verify कर सके लेकिन मनुष्य सहज रूप से समझ न सके, तो विज्ञान के सामने एक नई चुनौती खड़ी होगी।

सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि proof सही है या गलत।

सवाल यह भी होगा कि क्या हम उस proof को समझते हैं?

अभी फैसला गणितज्ञों के हाथ में है

OpenAI ने एक असाधारण दावा किया है। लगभग 90 साल से अनसुलझे Navier–Stokes problem पर उसके internal AI system ने एक analytical proof तैयार करने का दावा किया है। करीब 10 हजार concurrent AI agents ने इस प्रयास में हिस्सा लिया।

Navier–Stokes प्रयास में लगभग 27 लाख messages और 130 अरब output tokens का इस्तेमाल हुआ।

AI agents ने लगभग 88 घंटे में अपना result तैयार किया और Lean formalization/verification में 17 घंटे और लगे।

लेकिन अभी इसे अंतिम सत्य मानना जल्दबाजी होगी। Proof की स्वतंत्र mathematical scrutiny बाकी है। Clay Mathematics Institute ने इसे अभी आधिकारिक Millennium Prize solution के रूप में स्वीकार नहीं किया है।

साथ ही, इस उपलब्धि की timing और AI-assisted research के data तथा intellectual credit को लेकर गणितज्ञों और OpenAI के बीच विवाद भी खड़ा हो चुका है।

इसलिए फिलहाल इस कहानी की सबसे सटीक तस्वीर यही है कि एआई ने दावा किया है कि उसने 90 साल पुरानी गणितीय पहेली का जवाब खोज लिया है। अब बारी इंसानों की है कि वे AI के इस जवाब को परखें।

अगर proof सही साबित होता है तो यह केवल एक mathematical problem का solution नहीं होगा। यह इस बात का ऐलान होगा कि वैज्ञानिक खोज के मैदान में AI अब सिर्फ इंसान का सहायक नहीं रहा, वह खुद नए ज्ञान की खोज में उतर चुका है।

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