लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में वर्ष 2023 में हुई 1276 पदों की नर्सिंग ऑफिसर भर्ती अब जांच के घेरे में है। भर्ती में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए STF ने संबंधित पत्रावलियों को खंगालना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
STF चयनित नर्सिंग ऑफिसरों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगी। खासतौर पर दूसरे राज्यों से चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का भी सत्यापन कराया जाएगा। भर्ती में उत्तर प्रदेश के युवाओं की अनदेखी किए जाने के आरोपों की भी जांच होगी।
इस भर्ती को लेकर विधायक, एमएलसी समेत कई जनप्रतिनिधि पहले ही सवाल उठा चुके हैं। आरोप हैं कि विज्ञापन जारी होने के बाद भर्ती की चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया। OMR आधारित मैनुअल परीक्षा कराने के फैसले पर भी सवाल उठे थे।
STF परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी में है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे अधिकारियों का पूरा विवरण भी जुटाया जाएगा। इसके साथ ही विज्ञापन से लेकर परीक्षा और अंतिम चयन तक अपनाई गई पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, STF की टीम जल्द ही KGMU पहुंच सकती है। भर्ती से जुड़ी पत्रावलियों की जांच के बाद परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों की भी जांच तेज होने की संभावना है। भर्ती में वास्तव में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है या नहीं, यह STF की जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।




कुछ समय पहले मैंने KGMU से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों और सवालों को सार्वजनिक किया था। इसके जवाब में मुझे लीगल नोटिस भेजकर पोस्ट हटाने, माफी मांगने और भविष्य में ऐसी बातें न लिखने के लिए कहा गया।
शायद प्रयास यह था कि तथ्यों और सवालों को कानूनी नोटिस के दबाव में दबा दिया जाए। मैंने ना पोस्ट हटाई, ना माफ़ी माँगी और ना ही उस लीगल नोटिस का जवाब देना उचित समझा।
लेकिन अब सामने आई खबरें कई सवालों को और गंभीर बना रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष की गई शिकायतों के बाद KGMU में 2023 की 1,276 नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर UP STF ने जांच शुरू कर दी है।
STF की टीम KGMU पहुंची और कुलपति एवं कुलसचिव कार्यालय से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज अपने साथ ले गई। जांच में परीक्षा प्रणाली में बदलाव, चयन प्रक्रिया और बड़ी संख्या में राजस्थान के अभ्यर्थियों के चयन सहित कई पहलुओं को देखा जा रहा है।
लेकिन जब इन्हीं सवालों को उठाने पर मुझे माफी मांगने का लीगल नोटिस दिया गया था, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—अगर सवाल गलत थे, तो उनकी जांच क्यों हो रही है?
मैंने किसी को दोषी घोषित नहीं किया था। मैंने सिर्फ सवाल उठाए थे। और अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है।
देखना यह है कि जांच का दायरा कहाँ तक जाता है और इसकी जद में कौन-कौन आता है।
आखिर में सच दस्तावेजों से सामने आएगा—और तब यह भी तय होगा कि माफी मांगने की जरूरत किसे पड़ेगी।
सवालों को लीगल नोटिस से नहीं दबाया जा सकता।
-राजीव शुक्ला





