हिन्दुस्तान टाइम्स ने सरकारी पक्ष को प्रमुखता से छापा है। इसका शीर्षक है, विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्रालय ने कहा, यूपीआई शुल्क में कोई विदेशी भूमिका नहीं। हाईलाइट किया हुआ अंश है, एमडीआर फ्रेमवर्क को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है।
संजय कुमार सिंह
आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, ‘कोई पुनर्विचार नहीं’ : वापस लेने की मांग के बीच सरकार यूपीआई फीस पर दृढ़। सरकार की यह दृढ़ता आज मेरे 10 अखबारों में सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड के रूप में दिखती है। दूसरी ओर, ‘यूपीआई टैक्स’ की आलोचना दि एशियन एज में भी है। प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर विशेष खबर अपेक्षाकृत कम है। दि एशियन एज के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज सेमीकॉन इंडिया का उद्घाटन करेंगे। यह खबर भी पहले की तरह प्रचार के रूप में नहीं छपी है। यहां भी सिंगल कॉलम में है। दूसरी ओर, टाटा संस पर आज भी एक खबर है। कल मैंने चर्चा नहीं की थी पर कल भी रिजर्व बैंक के कैविएट की खबर थी। इन खबरों से और कुछ हो या नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दावे और भारत में टाटा संस की स्थिति या टाटा संस को मिल रही सहूलियतों का पता तो चल ही रहा है। ऊपर से डिजिटल इंडिया, कैशलेश इकनोमी से संबंधित दावों और प्रचार के बाद अब शुल्क लगाने की खबर, इसका विरोध, संबंधित आरोप और पुनर्विचार नहीं करने की दृढ़ता जैसी खबरों से सरकार की विशेष छवि बन रही है। ठीक है कि सब अलग-अलग अखबारों में हैं लेकिन सरकारी प्रचार भी अब पहले की तरह नहीं है।
द टेलीग्राफ की लीड है, भारतीय युद्धपोत में पाकिस्तानी नौ सेना के पोत की टक्कर के लिए पाकिस्तान को चेतावनी। मुझे लगता है कि पाकिस्तानी पोत ने भारतीय नौसेना के पोत में टक्कर मारी यह ज्यादा बड़ी खबर है। केंद्र सरकार पर विपक्ष जब अमेरिका के दबाव में फैसले करने का आरोप लगा रहा है, हाल में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन हुआ तब पाकिस्तानी पोत का भारतीय नौसेना की पोत को टक्कर मारना मायने रखता है। निश्चित रूप से पाकिस्तान को चेतावनी देने की भारतीय ‘दृढ़ता’ भी खबर है। इसलिए द हिन्दू और हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड भी यही खबर है। हालांकि, शीर्षक दृढ़ता का प्रदर्शन नहीं लगता है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, भारत- पाकिस्तान की नौ सेना पोतों में टक्कर के बाद दिल्ली ने विरोध दर्ज कराया। यहां खबर यह नहीं है कि टक्कर मारी। पर टक्कर होने की है। लेकिन नवोदय टाइम्स में टॉप पर छपी खबर का शीर्षक है, भारतीय युद्धपोत में पाक नौसेना के पोत ने टक्कर मारी।
खबर के अनुसार, (यह) आचरण अस्वीकार्य है और इस सिलसिले में पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी को तलब किया गया। यही खबर लगभग इसी शीर्षक से दि इंडियन एक्सप्रेस में है। लीड के नीचे चार कॉलम की खबर का शीर्षक है, “विपक्ष ने यूपीआई शुल्क वापस लेने की मांग की, अमेरिकी दबाव का दावा किया; गलत, कोई विदेशी प्रभाव नहीं है : सरकार। ऐसा नहीं है कि यह खबर सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में इतनी प्रमुखता से है। सच्चाई यह है कि अमर उजाला की सेकेंड लीड का शीर्षक है, यूपीआई शुल्क पर घमासान केंद्र ने कहा, वापस नहीं लेंगे। उपशीर्षक है, एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी भरना होगा कारोबारियों को। आप जानते हैं कि अभी तक सरकार जीएसटी वसूली को अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति के संकेत के रूप में प्रस्तुत करती रही है। सच्चाई यह है कि इस सरकार ने तमाम सेवाओं पर जबरन जीएसटी लगाया है और वह भी बहुत ज्यादा। इसलिए, जरूरत पड़ने पर जीएसटी कम करके उसका प्रचार भी कर चुकी है। अब जीएसटी वसूली बढ़ेगी तो कहा जाएगा कि जीडीपी बेहतर है।
सच्चाई यह होगी कि एमडीआर पर 18 फीसदी जीएसटी भी कारण होगा। आप जानते हैं कि यूपीआई पर शुल्क से 22000 करोड़ रुपए की वसूली होने का अनुमान है। इसपर 18 प्रतिशत जीएसटी कम नहीं होगा और यह यूं ही बढ़ गया। इसलिए सरकार कम करे या नहीं उसकी मजबूरी है कि दृढ़ता दिखाए। द हिन्दू की लीड का शीर्षक भी पनडुब्बियों की टक्कर पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया है। इसके अलावा, आज के कुछ अखबारों की दूसरी लीड अब 25,000 के मूल वेतन पर पीएफ कटेगा, एक करोड़ से अधिक को लाभ। अमर उजाला में उपशीर्षक है, 12 साल बाद वेतन सीमा में बदलाव…. केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, नए नियम आज से लागू। कहने की जरूरत नहीं है कि यह कोई क्रांतिकारी निर्णय नहीं है और इससे कुछ बदलने वाला नहीं है। रुपए के अवमूल्यन के साथ अब न्यूनतम वेतन पाने वाले का भविष्यनिधि खाता नहीं होगा और ऐसा काफी समय से चल रहा है। अवमूल्यन के कारण ही न्यूनतम वेतन बढ़ता है। नियम है कि जिन संस्थानों में काम करने वाले लोगों की संख्या 20 या उससे ज्यादा हो वहां निश्चित वेतन पाने वालों का पीएफ कटेगा।
इस लिहाज से जिन संस्थाओं में अकुशल मजदूरों की संख्या ज्यादा है, न्यूनतम वेतन मिलना ही है वहाँ अगर सबका पीएफ कटे तो नियोक्ता और सरकार दोनों का खर्च बढ़ता है। परेशानी ऊपर से। इसलिए इस वृद्धि से सबसे ज्यादा लाभ नियोक्ताओं को है और यह इतनी बड़ी खबर नहीं है। इसीलिए कहीं लीड नहीं है। जो भी हो दैनिक भास्कर की लीड मणिपुर की खबर है। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 4 दिन में 6 कुकी की हत्या के बाद से 7 जिलो में तनाव है। खौफ बढ़ गया है, स्कूल कालेज बंद हैं, लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं और चीनी 450 रुपए किलो तक पहुंच गई है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक, झीरम नरसंहार के दोषियों को मौत की सजा है। यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार व विपक्ष में ठनी यहां भी है।
इन सारी खबरों के बीच भाजपा और नरेन्द्र मोदी के प्रचार की खबर की चर्चा ही नहीं है। आप जानते हैं कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म दिन है और हर साल की तरह इस बार भी कुछ न कुछ कार्यक्रम होगा। इस बार खासियत यह है कि संबंधित खबर को बहुत महत्व नहीं मिला है। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक है, सेवा संकल्प अभियान की बड़ी तैयारियां। यह दो कॉलम में छपा है। अमर उजाला में पहले पन्ने पर यह खबर नहीं दिखी। दैनिक भास्कर में सिंगल कॉलम में टॉप पर है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


