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Gyanesh Kumar: क्या पुलिस वाले महिला पत्रकारों की छाती पर हाथ मार रहे हैं? राहुल गांधी और नेहा वोरा फायर हैं!

Women Journalists

Gyanesh Kumar: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ तो मामला सिर्फ नारेबाजी और पुलिस हिरासत तक नहीं रुका। प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे पत्रकारों और पुलिस के बीच भी तनातनी की खबरें सामने आई हैं। कई पत्रकारों ने पुलिस पर बदसलूकी और धक्का-मुक्की के आरोप लगाए। ये मामला तब और गंभीर हो गया, जब महिला पत्रकारों ने पुलिस पर उनके साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा दिया।

ये मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के विरोध से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पत्रकारों का आरोप है कि प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ भी पुलिस ने ठीक व्यवहार नहीं किया।

एक महिला पत्रकार का आरोप है कि जंतर-मंतर पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने उसकी छाती पर हाथ मारा और वहां से चला गया। इस घटना के बाद वहां मौजूद पत्रकारों में नाराजगी फैल गई। सैकड़ों पत्रकार FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा सोशल मीडिया पर अपने शरीर पर लगे चोटों को दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को संबोधित करते हुए कहती हैं कि वो ज्ञानेश कुमार को बचा नहीं सकते हैं। क्या सोचा था हमें पीटकर वो ना महिलाओं की आजादी छीन सकते हैं, ना ही प्रदर्शन करने का अधिकार छीन सकते हैं।

पत्रकारों का कहना था कि अगर किसी महिला पत्रकार ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत की है तो कम से कम उसकी शिकायत दर्ज की जानी चाहिए। लेकिन आरोप है कि पुलिस इस मामले में FIR दर्ज करने को तैयार नहीं थी।

यही सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में है कि यदि पुलिस के सामने ही एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी हुई और उसने शिकायत की, तो उसकी शिकायत पर FIR दर्ज करने में दिक्कत क्या है?

इससे पहले भी प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों ने पुलिस पर उन्हें रोकने, धक्का देने और हिरासत में लेने के आरोप लगाए। कुछ पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए दावा किया कि पहचान पत्र और प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पुलिस ने उनके साथ सख्ती की।

वहीं, पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक और आरोप सामने आया। एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि महिला पत्रकारों को रात में हिरासत में लेकर पुलिस कहीं ले जा रही थी और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बस रोक दी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच महिला पत्रकारों की सुरक्षा और प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “From Streets to Protests, Women Are NOT SAFE!” पोस्ट में दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाते हुए 4 अक्टूबर को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च का आह्वान किया गया है.

इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप का जिक्र करते हुए FIR दर्ज करने की मांग की. राहुल गांधी ने पुलिस हिरासत, पत्रकारों के साथ बदसलूकी और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किए।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब एक महिला पत्रकार शिकायत लेकर सामने आई है तो उसकी FIR दर्ज करने में पुलिस को क्या परेशानी है। उन्होंने दिल्ली पुलिस के गृह मंत्रालय के अधीन होने का हवाला देते हुए गृह मंत्री से जवाब मांगा।

उधर, पुलिस का पक्ष यह है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और इलाके में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने घटनाक्रम को लेकर FIR भी दर्ज की है।

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