Kainchi Dham: गांधी जयंती, शनिवार और रविवार की लगातार तीन दिन की छुट्टी क्या मिली, दिल्ली-NCR के लोगों ने पहाड़ों का रुख कर लिया. नैनीताल, कैंची धाम, भवाली, भीमताल और मसूरी में पर्यटकों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि पहाड़ों की सड़कें वाहनों के दबाव में हांफती नजर आईं.
पहाड़ों के इस हालात की तस्वीर वहां पहुंचे पर्यटकों से ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकारों ने दिखाई है. वरिष्ठ पत्रकार अंबरिश कुमार, हर्ष कुमार और पत्रकार विवेक बाजपेई ने अपने-अपने पोस्ट के जरिए लंबे वीकेंड में पहाड़ों पर उमड़ी भीड़ और उससे पैदा हुई मुश्किलों को सामने रखा.
वरिष्ठ पत्रकार अंबरिश कुमार ने कैंची धाम और नैनीताल की तरफ बढ़ते ट्रैफिक को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई है. उनके मुताबिक, एक दिन में काठगोदाम से 35 हजार गाड़ियां पहाड़ की तरफ गईं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कैंची धाम में बढ़ती भीड़ को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर पर्यटन उद्योग के साथ-साथ पहाड़ के स्थानीय लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है.
अंबरिश कुमार ने लिखा कि खासकर नैनीताल, रानीखेत, अल्मोड़ा और कौसानी पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है. उन्होंने अपनी निजी परेशानी का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि रामगढ़ में उनका घर है, लेकिन भीड़ के चलते भवाली तक पहुंचना मुश्किल हो गया है.
सवाल उन्होंने ये भी उठाया कि जब भवाली तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है तो अल्मोड़ा, रानीखेत और कौसानी जाने वाले लोग आखिर किस तरह पहुंचेंगे.
अंबरिश कुमार ने सुझाव दिया कि काठगोदाम से कैंची धाम जाने वाले ट्रैफिक को अलग करने के लिए अलग रास्ता या कोई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए. उन्होंने कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र करते हुए लिखा कि करीब तीन दशक पहले इस इलाके में उतने लोग नहीं आते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं. फिल्मी सितारों और क्रिकेट खिलाड़ियों से जुड़े किस्सों ने भी कैंची धाम की लोकप्रियता और मार्केटिंग को बढ़ाया है.
अंबरिश कुमार ने पहाड़ों पर बढ़ते इस पर्यटन दबाव को लेकर साफ शब्दों में कहा कि तीन दिन की छुट्टी मिलते ही सब पहाड़ की तरफ दौड़ पड़ते हैं और इसे नियंत्रित करना जरूरी है.
पत्रकार हर्ष कुमार ने मसूरी के हालात का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि लंबे वीकेंड के कारण मसूरी में जाम ही जाम रहा. हर्ष कुमार के मुताबिक उनका एक मित्र परिवार के साथ मसूरी गया था, लेकिन वहां की भीड़ और जाम देखकर वह परेशान हो गया. उन्होंने लिखा कि उन्होंने खुद मसूरी में नहीं जाने की कसम खा रखी है. इसके बजाय पिछले साल वह टिहरी के ग्रामीण इलाकों में गए थे, जहां एक गांव में बने खूबसूरत होमस्टे में रुके.
उनके मुताबिक वहां होमस्टे के मालिक और उनकी बहू ने खुद खाना बनाकर खिलाया और घर जैसा माहौल मिला. वापसी में भी उन्होंने धनौल्टी के रास्ते से लौटते हुए मसूरी के भीतर जाने से परहेज किया.
हर्ष कुमार ने इस पूरे अनुभव के आधार पर सरकारों की पर्यटन नीति पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि सरकारें पर्यटकों को पहाड़ों पर बुलाती तो हैं, लेकिन उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है.
उन्होंने दिल्ली-NCR के लोगों की छुट्टी में पहाड़ों की तरफ भागने की प्रवृत्ति का भी जिक्र किया और लोगों को सुझाव दिया कि जहां जाएं, वहां के गांवों को भी देखें. उनके मुताबिक पहाड़ों का असली आनंद सिर्फ भीड़भाड़ वाले लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में नहीं, बल्कि गांवों में भी मिलता है.
वहीं पत्रकार विवेक बाजपेई ने पहाड़ों पर उमड़ी भीड़ और इसके बाद नैनीताल पुलिस की कार्रवाई की जानकारी साझा की. उनके मुताबिक नैनीताल, भवाली, भीमताल और कैंची धाम की तरफ एक दिन में 35 हजार से ज्यादा वाहनों की आवाजाही के बाद नैनीताल पुलिस ने ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया.
ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को देखते हुए शाम 4 बजे के बाद पहाड़ की तरफ वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात सामने आई है, ताकि ऊपर की तरफ जमा हो रहे ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके.


