टेलीविजन न्यूज चैनलों के विज्ञापन कारोबार पर दबाव बना हुआ है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच न्यूज जॉनर में टीवी विज्ञापनों के वॉल्यूम में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह गिरावट जनवरी-जुलाई 2025 में दर्ज 15 प्रतिशत की गिरावट से कम है। यानी विज्ञापन बाजार में गिरावट की रफ्तार जरूर धीमी हुई है, लेकिन न्यूज चैनलों के लिए विज्ञापन जुटाने की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
विज्ञापन बाजार से जुड़े आंकड़ों पर आधारित 8 अक्टूबर 2026 की TAM AdEx की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूज टेलीविजन के विज्ञापन बाजार में हिंदी न्यूज चैनलों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज जॉनर के कुल विज्ञापन वॉल्यूम में हिंदी न्यूज की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू विज्ञापनदाताओं का संकेंद्रण भी है। न्यूज जॉनर में विज्ञापन देने वाली शीर्ष 10 कंपनियों की हिस्सेदारी कुल विज्ञापन वॉल्यूम का लगभग 20 प्रतिशत रही। इसका अर्थ है कि हजारों विज्ञापनदाताओं की मौजूदगी के बावजूद न्यूज चैनलों के विज्ञापन कारोबार में कुछ बड़ी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
पिछले साल के मुकाबले गिरावट कम, लेकिन बाजार अब भी दबाव में
TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2025 में न्यूज टेलीविजन के विज्ञापन वॉल्यूम में एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 15 प्रतिशत की गिरावट आई थी। जनवरी-जुलाई 2026 में यह गिरावट घटकर 7 प्रतिशत रह गई।
पहली नजर में यह सुधार का संकेत दिखाई देता है। लेकिन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरावट की दर कम होने का मतलब विज्ञापन वॉल्यूम का बढ़ना नहीं है। विज्ञापन वॉल्यूम अब भी पिछले साल की समान अवधि से नीचे रहा।
दूसरे शब्दों में, न्यूज चैनलों के विज्ञापन कारोबार में गिरावट की गति धीमी हुई है, लेकिन बाजार अभी वृद्धि के दौर में लौटने का स्पष्ट संकेत नहीं देता। लगातार कमजोर विज्ञापन वॉल्यूम का असर प्रसारकों की व्यावसायिक योजनाओं, विज्ञापन दरों और राजस्व बढ़ाने की रणनीतियों पर पड़ सकता है। हालांकि, TAM AdEx के ये आंकड़े विज्ञापन वॉल्यूम से संबंधित हैं; इन्हें सीधे तौर पर सभी न्यूज चैनलों के राजस्व में 7 प्रतिशत की गिरावट नहीं माना जाना चाहिए।
हिंदी न्यूज सबसे आगे, क्षेत्रीय भाषाओं की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी
भाषा के आधार पर हिंदी न्यूज चैनल विज्ञापनदाताओं के लिए सबसे बड़ा समूह बने रहे। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज जॉनर के कुल विज्ञापन वॉल्यूम में हिंदी न्यूज की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी।
इसके बाद बंगाली न्यूज की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही। हिंदी रीजनल न्यूज और तमिल न्यूज की हिस्सेदारी 10-10 प्रतिशत, जबकि तेलुगु न्यूज की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत दर्ज की गई। कन्नड़ और मराठी न्यूज की हिस्सेदारी 6-6 प्रतिशत रही। मलयालम, असमिया और गुजराती न्यूज की हिस्सेदारी 5-5 प्रतिशत थी।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि विज्ञापन बाजार में हिंदी न्यूज की प्रमुख स्थिति बनी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल भी विज्ञापनदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माध्यम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष पांच न्यूज सब-जॉनर ने मिलकर कुल विज्ञापन वॉल्यूम का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।
यह स्थिति राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विज्ञापन बाजार के बीच संबंध को भी रेखांकित करती है। विज्ञापनदाता व्यापक हिंदी दर्शक वर्ग तक पहुंचने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाई बाजारों में अपनी पहुंच बनाने के लिए क्षेत्रीय न्यूज चैनलों का सहारा भी लेते हैं।
कौन सी कंपनियां न्यूज चैनलों पर सबसे ज्यादा विज्ञापन दे रही हैं?
TAM AdEx की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टेलीविजन पर विज्ञापन देने वाली शीर्ष कंपनियों में रेकिट बेंकाइजर इंडिया पहले स्थान पर रही। पतंजलि आयुर्वेद दूसरे स्थान पर रही। एसबीएस बायोटेक और जीसीएमएमएफ यानी अमूल भी प्रमुख विज्ञापनदाताओं में शामिल रहे।
शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की सूची में एलआईसी, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, पॉलिसीबाजार इंश्योरेंस ब्रोकर्स, टीवीएस मोटर कंपनी, महाशियां दी हट्टी यानी एमडीएच और ललिताआ ज्वेलरी मार्ट भी शामिल रहे।
टीवीएस मोटर कंपनी की रैंकिंग में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। वह जनवरी-जुलाई 2025 की 29वीं रैंक से आगे बढ़कर जनवरी-जुलाई 2026 में आठवें स्थान पर पहुंच गई। एमडीएच भी 24वें स्थान से नौवें स्थान पर पहुंची।
ये बदलाव बताते हैं कि न्यूज चैनलों पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों की प्राथमिकताओं में समय के साथ बदलाव हो रहा है। कुछ कंपनियां अपना विज्ञापन निवेश बढ़ा रही हैं, जबकि कुछ अन्य कंपनियों की रैंकिंग नीचे जा रही है। हालांकि, केवल रैंकिंग में बदलाव से किसी कंपनी के वास्तविक विज्ञापन खर्च में हुई वृद्धि या कमी का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
शीर्ष 10 विज्ञापनदाता देते हैं करीब 20 प्रतिशत विज्ञापन
इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक संकेत विज्ञापनदाताओं के संकेंद्रण से जुड़ा है। न्यूज जॉनर में शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी कुल विज्ञापन वॉल्यूम की लगभग 20 प्रतिशत रही।
TAM AdEx के अनुसार, इस अवधि में न्यूज टेलीविजन पर 3,400 से अधिक विज्ञापनदाता सक्रिय थे। इसके बावजूद शीर्ष 10 कंपनियों का लगभग पांचवां हिस्सा हासिल करना बताता है कि बड़े विज्ञापनदाताओं का बाजार पर पर्याप्त प्रभाव है।
न्यूज चैनलों के लिए इसका सीधा व्यावसायिक महत्व है। बड़ी कंपनियों के विज्ञापन बजट में बदलाव, किसी खास अवधि में विज्ञापन अभियान रोकने या विज्ञापन खर्च दूसरे माध्यमों की ओर स्थानांतरित करने से चैनलों के विज्ञापन कारोबार पर असर पड़ सकता है। छोटे विज्ञापनदाताओं की बड़ी संख्या होने के बावजूद सभी विज्ञापनदाताओं का आर्थिक योगदान समान नहीं होता।
हालांकि, शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी का यह मतलब नहीं है कि शेष 80 प्रतिशत कारोबार बहुत छोटे विज्ञापनदाताओं से ही आता है। बाकी हिस्से में मध्यम और बड़े आकार की अनेक अन्य कंपनियां भी शामिल हैं। आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि न्यूज चैनलों का विज्ञापन बाजार कई कंपनियों में बंटा हुआ है, लेकिन शीर्ष विज्ञापनदाताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एफएमसीजी, शिक्षा और सेवाओं का विज्ञापन बाजार में दबदबा
न्यूज चैनलों पर विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों में खाद्य एवं पेय पदार्थ सबसे बड़े सेक्टर के रूप में उभरे। जनवरी-जुलाई 2026 में इस सेक्टर की हिस्सेदारी कुल न्यूज विज्ञापन वॉल्यूम में 14 प्रतिशत रही। सेवाओं का हिस्सा 13 प्रतिशत और शिक्षा क्षेत्र का 10 प्रतिशत था।
व्यक्तिगत उत्पादों और सेवाओं के बजाय व्यापक उपभोक्ता बाजार को लक्ष्य बनाने वाली कंपनियां न्यूज टेलीविजन पर विज्ञापन की महत्वपूर्ण हिस्सेदार बनी हुई हैं। रिपोर्ट में रिटेल आउटलेट्स और ज्वेलर्स को व्यक्तिगत विज्ञापन श्रेणियों में सबसे आगे बताया गया है, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत रही। विभिन्न पाठ्यक्रमों के विज्ञापन करीब 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
कुछ श्रेणियों में विज्ञापन वॉल्यूम बढ़ने के संकेत भी मिले। मसालों के विज्ञापन में 30 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों के विज्ञापन में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जीवन बीमा के विज्ञापन वॉल्यूम में भी 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसका अर्थ है कि कुल बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ उत्पाद श्रेणियां न्यूज टेलीविजन पर अपनी विज्ञापन मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
क्या न्यूज चैनलों के लिए विज्ञापन जुटाना बड़ी चुनौती बन रहा है?
इन आंकड़ों को न्यूज चैनलों के कारोबारी मॉडल के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। टीवी न्यूज का विज्ञापन बाजार केवल दर्शकों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। विज्ञापनदाता यह भी देखते हैं कि उनका उत्पाद किन दर्शकों तक पहुंच रहा है, विज्ञापन अभियान का कितना प्रभाव पड़ रहा है और उपलब्ध बजट को किन माध्यमों पर खर्च करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती मौजूदगी ने विज्ञापनदाताओं को दर्शकों तक पहुंचने के अतिरिक्त विकल्प दिए हैं। ऐसे में टेलीविजन न्यूज चैनलों को विज्ञापन बजट हासिल करने के लिए दूसरे टीवी जॉनर और डिजिटल माध्यमों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। हालांकि, जनवरी-जुलाई 2026 के इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि न्यूज चैनलों के विज्ञापन में आई पूरी गिरावट केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से हुई है।
एक्सचेंज4मीडिया ने अगस्त में प्रकाशित अपनी एक अन्य रिपोर्ट में जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टीवी के विज्ञापन वॉल्यूम में कमजोरी का उल्लेख किया था। उस रिपोर्ट में विज्ञापनदाताओं की सतर्कता, मौसमी प्रभाव और विज्ञापन बजट के दूसरे माध्यमों की ओर जाने जैसे संभावित कारणों पर चर्चा की गई थी। उद्योग से जुड़े कुछ लोगों ने राजनीतिक खबरों के माहौल और विज्ञापन के आसपास की संपादकीय सामग्री को लेकर ब्रांडों की चिंताओं का भी जिक्र किया था। ये उद्योग के जानकारों के आकलन हैं, किसी एक कारण की निर्णायक पुष्टि नहीं।
आंकड़े क्या बताते हैं?
TAM AdEx के जनवरी-जुलाई 2026 के आंकड़ों से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली, न्यूज टेलीविजन के विज्ञापन वॉल्यूम में गिरावट पिछले साल के मुकाबले कम हुई है, लेकिन विज्ञापन बाजार में अभी स्पष्ट वृद्धि दर्ज नहीं हुई है। दूसरी, हिंदी न्यूज सबसे बड़ी भाषाई श्रेणी बनी हुई है, जबकि बंगाली, तमिल, तेलुगु और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के न्यूज चैनलों की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। तीसरी, शीर्ष 10 विज्ञापनदाता कुल विज्ञापन वॉल्यूम का लगभग 20 प्रतिशत उपलब्ध कराते हैं, जिससे बड़ी कंपनियों की कारोबारी भूमिका स्पष्ट होती है।
यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि TAM AdEx के ये आंकड़े टीवी पर प्रसारित व्यावसायिक विज्ञापनों के वॉल्यूम पर आधारित हैं। इनमें कार्यक्रमों के प्रमोशन और सामाजिक विज्ञापनों को शामिल नहीं किया गया है। विज्ञापन वॉल्यूम और वास्तविक विज्ञापन राजस्व अलग-अलग माप हैं। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर सभी न्यूज चैनलों की आय में समान अनुपात में गिरावट का दावा करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल न्यूज चैनलों के लिए राहत की बात यह है कि विज्ञापन वॉल्यूम में गिरावट की दर पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। लेकिन बाजार में स्थायी सुधार का आकलन करने के लिए आने वाले महीनों के आंकड़ों, विज्ञापनदाताओं के खर्च और चैनलों के वास्तविक राजस्व पर नजर रखनी होगी।

