Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

‘द गार्जियन’ अखबार ने मोदी के बड़बोलेपन की खिल्ली उड़ाई

Balendu Swami : दुनिया के प्रतिष्ठित अखबारों में से एक “द गार्जियन” ने खिल्ली उड़ाने वाले अंदाज में लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री ने दावे किये है कि हजारों साल पहले भी भारत में कृत्रिम गर्भाधान और कॉस्मेटिक सर्जरी इत्यादि उपलब्ध थी! सबूत के रूप में उन्होंने महाभारत के मिथक कर्ण की उत्पत्ति और गणेश को हाथी का सिर लगाए जाने की घटना का उदाहरण दिया! उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि चिकित्सा विज्ञान में हम कितनी तरक्की कर चुके थे! नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत ही वहीँ से हुई जब एक मनुष्य के धड़ पर हाथी का सिर लगाया गया!

Balendu Swami : दुनिया के प्रतिष्ठित अखबारों में से एक “द गार्जियन” ने खिल्ली उड़ाने वाले अंदाज में लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री ने दावे किये है कि हजारों साल पहले भी भारत में कृत्रिम गर्भाधान और कॉस्मेटिक सर्जरी इत्यादि उपलब्ध थी! सबूत के रूप में उन्होंने महाभारत के मिथक कर्ण की उत्पत्ति और गणेश को हाथी का सिर लगाए जाने की घटना का उदाहरण दिया! उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि चिकित्सा विज्ञान में हम कितनी तरक्की कर चुके थे! नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत ही वहीँ से हुई जब एक मनुष्य के धड़ पर हाथी का सिर लगाया गया!

 

ये सब बातें मोदी ने अम्बानी के अस्पताल का उद्घाटन करते हुए डाक्टरों के सामने कही! अखबार आगे लिखता है कि अभी तक कोई भारतीय वैज्ञानिक सामने नहीं आया जोकि प्रधानमंत्री की इन बातों को चुनौती दे सके! अरे अखबार वालों तुम्हें पता नहीं है, हमारे देश के वैज्ञानिक पहले हवन करके तब मिसाइल छोड़ते हैं! अच्छा नहीं लगता जबकि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह से अपने देश की भद्द पिटती है!

प्रगतिशील और आधुनिक विचारों के स्वामी बालेंदु के फेसबुक वॉल से.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
2 Comments

2 Comments

  1. Insaan

    December 8, 2014 at 12:06 pm

    “द गार्डियन” को “द गार्जियन” लिखने वाले मूर्ख को ही किसी की खिल्ली उड़ाने के पैसे मिलते हैं! फिरंगी द्वारा भारतीय भूभाग पर दो से अधिक शतक के अधिपत्य और तत्पश्चात कांग्रेसी राज में भारतीय संस्कृति के साथ सामान्य भारतीय की सोचने की क्षमता ही खो गई है। विदेशी सदियों से संस्कृत भाषा के ज्ञान द्वारा भारतीय ऋषियों के शोध रचनाओं का अनुसरण करते आए हैं। आज भी होशिआरपुर स्थित स्वामी विश्वेश्वरानंद वैदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट में रखी संस्कृत पांडुलिपियों का अध्यन हो रहा है। “द गार्जियन” पढ़ खिल्ली तो अपनी हम सब मिल कर उड़ा रहे हैं!

  2. Saurabh Bajpai

    January 8, 2015 at 11:26 am

    sharm hai sa likhane wale balendu aur bina tathyo ki janch kiye bina publish karne wale editor par

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन