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छत्तीसगढ़

आईबीसी24 में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले मेरी ये पोस्ट जरूर पढ़ें : अश्विनी शर्मा

Ashwini Sharma

अगर आप खुद को ईमानदार समझते हैं.. आपकी नीयत भी साफ है लेकिन फिर भी आप पर कोई सवाल खड़ा कर रहा है तो मुंहतोड़ जवाब देना ही चाहिए.. आज मैं भी एमपी-छत्तीसगढ़़ के स्वघोषित नंबर वन न्यूज़ चैनल आईबीसी24 के प्रबंधन के रवैये पर निराशा वक्त करता हूं.. आईबीसी24 ने बड़े ही शातिराना तरीके से मेरी भावना, ईमानदारी से किए कार्य का कटु प्रतिसाद दिया..

मैं चाहता हूं कि जो मीडिया कर्मी आईबीसी24 में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं वो मेरे इस पोस्ट को एक बार अवश्य पढ़ें… पिछले साल मार्च महीने में बनारस में पिता के असमय निधन से मैं विचलित था.. मैं पिता का अंतिम क्रिया कर्म कर लखनऊ भारत समाचार में नौकरी पर लौटा ही था कि आईबीसी 24 के रायपुर दफ्तर से तत्कालीन संपादक रवि कांत मित्तल सर का मुझे फोन आया.. रवि सर से अपनी पहचान करीब सत्रह साल पुरानी मुंबई के दिनों की है.. इसलिए बिना लाग लपेट के रवि सर ने मुझसे कहा नए वैंचर मोबाइल चैनल के लिए वो मुझे एचओडी बनाना चाहते हैं.. मेरा परिवार विशाद के दौर से गुजर रहा था सो रवि सर का प्रस्ताव मैं बेहिचक स्वीकार कर रायपुर के लिए रवाना हो गया..

आईबीसी 24 के इस प्रोजेक्ट के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के स्मार्ट फोन योजना से जुड़े थे.. प्रोजेक्ट अति महत्वाकांक्षी था.. मेरी टीम में चैनल के कई नए पुराने कर्मचारी जुड़े थे.. छत्तीसगढ़ में मैं नया था सो चुन्नौती भी बहुत ज्यादा थी लेकिन अपना मिशन साफ था रवि सर के भरोसे पर खरा उतरना.. चैनल के सौ मीटर की दूरी पर ही एक घर में ठिकाना बना सुबह से देर रात तक चैनल के दफ्तर में टास्क के लिए जूझने लगा.. न मुझे रायपुर की राजनीति से कोई मतलब था न किसी से ज्यादा पहचान सो दुरुह सा कार्य भी सहजता से होने लगा.. मैं चैनल की ओर से घोषित एचओडी अवश्य था लेकिन पत्रकारिता में अठारह साल के करियर में मजदूरी को ही हथियार बना काम करता रहा.. हजारों अलग अलग विधा के वीडियो मोबाइल एप में अपलोड का काम चल रहा था.. जिसमें स्क्रिप्ट लेखन, ग्राफिक्स, स्टोरी एडिटिंग का काम शामिल था.. काम बहुत रोचक था..

पूरी टीम को इजराइल से ट्रेनिंग तक दिलाई गई.. इधर बनारस में पिता के निधन के बाद मां भी मौत के करीब थी.. वो हर महीने डायलेसिस की प्रक्रिया से गुजर रही थी.. ये सिलसिला करीब ढाई सालों से चल रहा था.. रायपुर में दिए टास्क के साथ बनारस में मां की चिंता खाए जा रही थी लेकिन ईश्वर मेरा साथ दे रहे थे.. बिना साप्ताहिक अवकाश लिए मैंने तय समय से पहले सत्तर फीसदी वीडियो मोबाइल एप में अपलोड करा दिया लेकिन मेरी टीम में छत्तीसगढ़ को पूर्ण रुप से समझने वाला कोई नहीं था जो मेरे लिए नासूर बन गया.. अधिकतम काम करने के बावजूद मुझे दो महीने होते होते प्रोजेक्ट से हटा दिया गया.. मैंने वजह पूछी तो कंपनी ने टाल दिया.. मैं गहरे सदमे में तब पहुंचा जब बस्तर में राष्ट्रपति ने स्मार्ट फोन योजना की शुरुआत की और चैनल प्रबंधन ने बड़े ताव से प्रोजेक्ट की क्रेडिट टीम के कई लोगों को तो दी लेकिन मेरी ईमानदार कोशिश को भूला दिया..

मेरे सामने जश्न मन रहा था और खुद के पानी दिए पौधे के वयस्क हो चुके पेड़ का फल मुझे नसीब नहीं हुआ.. इधर बनारस में मां अंतिम समय में मुझे याद कर रही थी उधर मैं रायपुर में जैसे कालेपानी की सजा भुगत रहा था.. मुझे चैनल में एमपी-छत्तीसगढ़ में हो रहे चुनाव का काम दे दिया गया था.. चैनल के कई साथी मेरे साथ हुए घटनाक्रम पर दबी जुबान सहानुभूति भी जता रहे थे.. कुछ तो यहां तक कह रहे थे कि चैनल का इतिहास ही ऐसा है.. काम कराने के लिए दूसरे राज्यों से झूठे वादे कर कर्मचारी तो बुला लेते हैं लेकिन काम पूरा होने से पहले अपने चहेतों को क्रेडिट दे देते हैं.. खैर मेरे लिए रायपुर में कुछ महीने और रहना मजबूरी थी.. बीमार मां समेत परिवार का खर्च उठाना मुश्किल टास्क था.. इस बीच मां की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई.. भागा भागा मैं बनारस आ गया.. कुछ दिन मां के साथ रहा लेकिन ईश्वर ने पिता के बाद मां को भी अपने पास बुला लिया..

मां की तेरहवीं के बाद भारीमन से दुबारा रायपुर पहुंचा.. चुनाव का कार्य भी संपन्न कराया और पुनः माता पिता का सामूहिक श्राद्ध कराने बनारस आ गया.. चैनल के कई कर्मचारियों की मेरे साथ गहरी संवेदना रही लेकिन चैनल प्रबंधन का असली बेरहम चेहरा रमन सिंह की सरकार जाने के बाद देखने को मिला.. सोचिए जिस चैनल के टीवी स्क्रीन में वर्तमान सीएम भूपेश बघेल जी की कभी धुंधली तस्वीर तक नहीं दिखाई जाती थी.. बघेल और उनके बुजुर्ग पिता की प्राइम टाइम में ऐसी तैसी की जाती थी तो वहीं रमन सिंह को जमकर महिमामंडित किया जाता था लेकिन सरकार बदलते ही वही आईबीसी चैनल अब रमन सिंह से दूरी बनाते हुए नव नियुक्त मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर डोरे डालने में जुट गया था..

तभी बड़ा खेल हुआ चैनल के तत्कालीन संपादक रवि सर ने बेहतर भविष्य के लिए चैनल को अलविदा कह दिया और ठीक उसी दिन रवि सर के सामने मेरा भी बोरिया बिस्तर चैनल वालों ने समेट दिया.. सोचिए किस तरह से आईबीसी ने मेरे भरोसे का खून किया.. वैसे मुझसे हमदर्दी रखने वाले चैनल के कई वरिष्ठ कर्मचारियों का कहना कि चैनल में छत्तीसगढ़ से बाहर से आए पत्रकारों को लेकर प्रबंधन का रवैया हमेशा से निराशाजनक रहा है.. खैर मैं इन दिनों बनारस में परिजनों के बीच यादगार पल गुजार रहा हूं..

लेखक अश्विनी शर्मा मुंबई, लखनऊ, रायपुर और नोएडा में विभिन्न न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं. उन्होंने अपनी यह पीड़ा फेसबुक पर बयान की है.

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