ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते-लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…

Ashwini Sharma :  ”ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…, अपनों ने झाड़ा पल्ला जो बनते थे ख़ुदा वो भी किनारे हो गए..” साल 2005 में मुंबई इन टाइम न्यूज़ चैनल के बंद होने के बाद मैंने ये पंक्तियां लिखी थीं..तब मेरे साथ इन टाइम के बहुत से पत्रकार बेरोज़गार हुए थे..कुछ को तो नौकरी मिल गई लेकिन कुछ बदहाली के दौर में पहुंच गए..वैसे ये कोई नई बात नहीं है कई चैनल अखबार बड़े बड़े दावों के साथ बाज़ार में उतरते हैं..बातें बड़ी बड़ी होती हैं लेकिन अचानक गाड़ी पटरी से उतर जाती है..जो लोग साथ चल रहे होते हैं वो अचानक मुंह मोड़ लेते हैं..जो नेता अफसर कैमरा और माइक देखकर आपकी तरफ लपकते थे वो भी दूरी बना लेते हैं..

कई बार तो अपनों को भी मुंह मोड़ते देखा है..आज मैं ये सब इसलिए लिख रहा हूं..क्योंकि कुछ दिन पहले ही देश के नामचीन अखबार हिंदूस्तान टाइम्स अखबार की ऑफिस के सामने ही एक पत्रकार ने तड़पते तड़पते दम तोड़ दिया..तेरह साल पहले चार सौ लोगों को नैतिकता की बात करने वाले अखबार ने एक झटके में निकाल दिया था..वो तेरह साल से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा था..मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता..आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर वो ज़िंदा था..

कोर्ट कचहरी मंत्रालय सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में होने के बाद भी सब आंखों में पट्टी बांधे थे..सो आखिरकार उस कमजोर हो चुके इंसान ने एचटी के ऑफिस के सामने ही दम तोड़ दिया..मैं यही कहूंगा कि ये घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो किसी न किसी मीडिया हाउस में तैनात हैं..मेरा मानना है कि हालात अच्छे भी हो तो मुगालता नहीं पालना चाहिए और हो सके किसी असहाय भाई की मदद अवश्य करें..

‘भारत समाचार’ चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

मूल खबर…

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पढ़ाकू अमर भइया जब लड़कियों को देखते तो बिना कमेंट कसे रह नहीं पाते थे!

Ashwini Sharma : बीएचयू में पढ़ाई के दौरान मेरी अमर भइया से पहचान हुई ..अकसर वो बीएचयू की लाइब्रेरी में पढ़ाई करते मुझे मिल जाते थे..आमतौर पर वो बेहद शांत दिखते थे लेकिन जब वो महिला हॉस्टल के पास से निकलते थे या फिर किसी छात्रा को आते जाते देखते थे तो उनका असली चेहरा सामने आ जाता था..वो लड़कियों पर बिना कमेंट कसे नहीं रह पाते थे..

एक बार तो मैं साइकिल से गुजर रहा था तो मेरा ध्यान क्रिकेट खेल रहे लड़कों पर गया जो हॉस्टल के ही रहने वाले थे..वो लड़के महिला छात्राओं से भरी बस को देखकर अचानक शोर मचाने लगे..वो तब तक चीखते चिल्लाते रहे जब तक बस उनकी आंखों से ओझल नहीं हो गई..मेरी नजर उन शोर मचाऊ गैंग पर गई तो देखा अमर भइया ही कप्तानी की भूमिका में थे..वैसे अमर भइया पढ़ाकू छात्र थे जिस वजह से मैं उनका सम्मान करता था लेकिन जब से उन्हें लड़कियों को देखकर शोर मचाते देखा उनसे कटने लगा..

हालांकि कई साल बाद अमर भइया मुझसे मुंबई में टकरा गए..उन्होंने बताया कि वो किसी बड़ी कंपनी में कार्यरत हैं..उस मुलाकात के बाद अमर भइया से नहीं मिल सका क्योंकि वो विदेश में मोटी तनख्वाह पर नौकरी करने चले गए..लेकिन आज जब बीएचयू में छेड़खानी को लेकर बवाल चल रहा है तो अनायास ही अमर भइया की याद आ गई..सोच रहा हूं जब पढ़ाकू अमर भइया जैसे लोग लड़कियों के लिए मुसीबत बन सकते हैं तो फिर जो बदनाम लड़के हैं उन्हें कैसे रोका जा सकता है..

भारत समाचार चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

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शानदार वायस ओवर के लिए ब्रजेश मिश्र ने की अश्विनी शर्मा की तारीफ

“भाई मैं तो आपकी आवाज का फैन हो गया”..अगर ये सब कुछ आपके चैनल के मालिक और एडिटर इन चीफ की मुख से वो भी न्यूज रुम में सुनने को मिले तो वाकई किसी का भी हौसला बढ़ता है..कल आजादी की वर्षगांठ के दिन लखनऊ में भारत समाचार के दफ्तर में शाम को चैनल के मुखिया और यूपी में पत्रकारिता का दूसरा नाम कहे जाने वाले ब्रजेश मिश्रा सर ने न केवल मेरी वॉयस ओवर के लिए सबसे ताली बजवाई बल्की खुद भी मेरा हाथ मिलाकर मेरे हौसले को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया..

असल में भारत समाचार पर कल शाम 5 से 6 बजे के बीच प्रसारित हुए आजादी पर स्पेशल शो “प्लासी से दिल्ली”  के लिए अपनी आवाज दी है..इस शो में 15 अगस्त 1947 से दो सौ साल पहले यानी गुलामी की दस्तक से लेकर आजादी तक की पूरी कहानी को बयान किया गया है..इस शो के लिए भारत समाचार की पूरी टीम ने बहुत मेहनत की और मेरी आवाज का भी इस्तेमाल किया गया..मैंने भी पूरी ईमानदारी से न्याय करने की कोशिश की..और यही कोशिश मेरे बिग बॉस को भा गई… फिर जिस तरह से उन्होंने हौसला बढ़ाया उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता…

वैसे मैंने साल 2000 में मुंबई के तहलका टीवी न्यूज के लिए पहली बार अपनी आवाज का इस्तेमाल किया था… मैं चैनल में एंकर भी रहा..यही नहीं मुंबई से हिंदूजा ग्रुप के चैनल इन टाइम न्यूज में भी एंकर रहा..सफर स्टार न्यूज, लाइव इंडिया होता हुआ टीवी9 महाराष्ट्र तक पहुंचा.. स्टार न्यूज, लाइव इंडिया के लिए वॉयस ओवर का मुझे मौका मिला तो टीवी9 में लगातार चार साल क्राइम शो का एंकर रहा..कारवां बढ़ता गया सहारा न्यूज में भी मेरी भूमिका कुछ ऐसी ही रही..यही नहीं मुंबई के कई प्रोडक्शन हाउस ने भी मेरी आवाज का इस्तेमाल किया..वरिष्ठों ने कई बार मेरा हौसला बढ़ाया..लेकिन अपने प्रदेश में वो भी ब्रजेश मिश्रा जैसी शख्सियत से तारीफ मिले तो मन बाग बाग हो जाता है..आप भी देखिए “प्लासी से दिल्ली” और मेरा और मेरे साथियों को और अच्छा करने के लिए प्रेरित भी करें.. लिंक ये है… :  https://youtu.be/a16pDKd-ed0 

आपका

अश्विनी

भारत समाचार चैनल, लखनऊ में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

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जी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शुक्ला ने आत्महत्या के पहले फेसबुक पर लिखी थे ये कविता

Ashwini Sharma : बावरा मन देखने चला एक सपना… आखिर ऐसा कौन सा सपना था जिसे देखने की ख्वाहिश लिए जी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शुक्ला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया..उसने मुंबई के चांदिवली में फांसी लगाकर जान दे दी..राहुल की खुदकुशी की जानकारी मेरी पूर्व सहयोगी हर्षा ने मुझे कल रात को दी और तब से ही मेरा मन बेचैन हो उठा..साल 2009 में पहली बार राहुल मुझसे टीवी9 महाराष्ट्र में काम करने के दौरान मिला था..

राहुल की पहली नौकरी थी..कभी भी मैंने राहुल के मुरझाए चेहरे को नहीं देखा था..हमेशा मुस्कराता हुआ किसी भी टास्क को करने के लिए तैयार रहता..यही वजह है कि वो अपने सहकर्मियों का चहेता था..और बड़ी लगन से काम करते हुए वो जी न्यूज में वरिष्ठ संवाददाता के पद पर पहुंचा था..लेकिन आज राहुल नहीं है और मैं ही नहीं उसके वो तमाम साथी सदमे में हैं जो कभी ना कभी राहुल के साथ काम कर चुके हैं..

सब यही कह रहे हैं कि आखिर सबके दुखों का साथी राहुल इतना अकेला क्यों था..उसने खुदकुशी से पहले फेसबुक पर कई ऐसी कविताएं पोस्ट की जो उसके गहरे विशाद में होने का भाव पेश करती हैं..राहुल ने चंद दिन पहले एक कविता लिखी जिसमे किसी परछाई का जिक्र है..वो परछाई आखिर क्या थी..आखिर वो क्यों राहुल का पीछा कर रही थी..राहुल ने लिखा था..

एक परछाई पीछे भागती है..
ना जाने कहां से आती है..
मैं रूकता हूं वो छिप जाती है..
मैं दौड़ता हूं वो दबे पांव फिर आती है..
हर दिन छलती है, हर दिन हंसती है..
शाम होते ही छिप जाती है..

पूरी कविता का स्क्रीनशाट ये है…

मलाल इस बात का भी है कि आभासी दुनिया और रीयल दुनिया में अनगिनत दोस्त होने के बाद भी किसी को राहुल का दर्द क्यों नहीं दिखा…राहुल ने किसी से अपना दर्द खुलकर क्यों नहीं शेयर किया और अगर ऐसा हो जाता तो आज राहुल हमारे बीच होता…ईश्वर से यही प्रार्थना है राहुल की आत्मा को शांति दें…

मुंबई समेत कई शहरों में कई न्यूज चैनलों के लिए काम कर चुके और इन दिनों लखनऊ में पदस्थ टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

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महानदी, पैरी एवं सोढूर नदियों के संगम स्थल पर राजिम कुंभ में आस्थावानों का मेला

रायपुर से करीब चालीस किमी दूर गरियाबंद जिले के राजिम कुंभ मेले में पहुंचकर जैसे आत्मा तृप्त हो गई.. छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के निजी सचिव मनोज शुक्ला जी ने मेरे लिए कुंभ स्थल तक जाने का प्रबंध किया.. कुंभ मेले में पहुंच कर मैंने बेहद विहंगम दृश्य देखा..जिधर भी मेरी नजर गई साधू संत भक्ति में लीन मिले.. यही नहीं दूर दराज से आए आम जन भी धुनी रमाए हुए आस्था के सागर में गोते लगाते मिले..

वैसे हमारे यहां चार महाकुंभों को ही मान्यता हासिल है लेकिन अब राजिम कुंभ मेला भी महाकुंभ में तब्दील हो गया है.. असल में यहां पर भी तीन नदियों (महानदी, पैरी एवं सोढूर) का संगम है और ये तीनों नदियां उत्तर दिशा की ओर बहती हैं इसलिए इसे अति पावन तीर्थ स्थल के तौर मान्यता प्राप्त है.. यहां पर लोग अस्थियों के विसर्जन, तर्पण के लिए भी पहुंचते हैं..

वैसे राजिम नाम भगवान विष्णु के स्वरुप राजीव लोचन के नाम पर पड़ा है और ऐसा कहा जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम यहां स्थित लोमस ऋषि के आश्रम में रुके थे और उसी दौरान सीता ने यहां कुलेश्वर महादेव की स्थापना रेत से शिवलिंग बना कर तीनों नदियों के मिलन स्थल पर ही की और तभी से यह तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात हो गया..

यहां माघी पुन्नी के नाम से मेले का आयोजन होने लगा लेकिन वर्ष २००५ में माघी पुन्नी मेले को और विख्यात करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने उसे  कुंभ का स्वरुप दे दिया..इसके लिए विधान सभा में विधेयक तक परित कराया गया..और फिर हर वर्ष यहां कुंभ मेले का आयोजन होने लगा..

इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन, एवं नासिक में जहां १२ वर्षों के अंतराल पर कुंभ का आयोजन होता है तो वहीं राजिम में प्रतिवर्ष कुंभ का आयोजन हो रहा है..२०१७ में आयोजन का बारहवां वर्ष है इसलिए इसे महाकुंभ कि संज्ञा दी गई है..प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस कुंभ मेले में इसबार देश के तेरहों अखाड़ों के साधू संत मौजूद हैं..

विदेशियों ने भी यहां डेरा डाल रखा है..कहीं प्रवचन चल रहा है तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी है..कहीं गंगा आरती हो रही है तो कहीं रंग बिरंगे स्टॉल सजे हैं..छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक इस आयोजन का मकसद देश विदेश के लोगों को पुरातन संस्कृति और सभ्यता से अवगत कराना है.. वाकई राजिम कुंभ में विचरण करके मुझे भी लगा कि छत्तीसगढ़ की विरासत को समझने के लिए इस कुंभ मेले में शिरकत करना एक उचित मौका है…

लेखक अश्विनी शर्मा मुंबई और दिल्ली के कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं.

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यह संत तो दरिद्रों की पूजा करता है (देखें वीडियो)

स्वामी बाल नाथ के साथ पत्रकार अश्विनी शर्मा. दूसरी एक पुरानी तस्वीर में एक अनाथ बच्चे के साथ दिख रहे हैं स्वामी बाल नाथ.

Ashwini Sharma : ”अपने लिए जिए तो क्या जिए… ऐ दिल तू जी ज़माने के लिए…” नववर्ष के पहले दिन स्वामी बालनाथ जी से मिलकर वाकई लगा कि हमारे आस पास ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनके लिए इंसानियत की सेवा ही सब कुछ है..स्वामी बालनाथ के बारे मैं मैंने जितना कुछ सुन रखा था उससे कहीं ज्यादा मुझे आज देखने को मिला..स्वामी बालनाथ के गाजियाबाद स्थित सेवानगर आश्रम में जब मैं पहुंचा तो उन्हें कुछ लोगों की पूजा कर उनके पैरों को पानी से धोकर पीते हुए पाया..वाकई आजतक मैंने ऐसा पहले नहीं देखा था..

स्वामी बालनाथ से मैंने सवाल किया तो उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष की पहली तारीख को वो लाचार, गरीब, बेबस यहां तक कुष्ठ रोगियों की नारायण मानकर पूजा करते हैं जिसका नाम उन्होंने दरिद्र नारायण की पूजा रखा है..मैं स्वामी बालनाथ के बारे में बहुत कुछ जानना चाहता था लिहाजा मैंने उनसे बातचीत शुरू की..स्वामी बालनाथ ने बताया कि वो मूलतः इलाहाबाद के सिरसा के रहने वाले हैं लेकिन महज सोलह साल की उम्र में ही उन्होंने अपना घर बार सब छोड़ दिया और मानवता की सेवा में जुट गए.

स्वामी बालनाथ ने 1975 में गाजियाबाद में अपने पहले आश्रम की नींव रखी और मजबूर लावारिस मिले लोगों का सहारा बन गए..स्वामी जी राह चलते सड़क किनारे से किसी भी लावारिस या बीमार इंसान को उठा लाते और उसकी खिदमत करते..खुद नहलाते धोते और खाना तक बनाकर अपने हाथों से खिलाते..स्वामी बालनाथ ने बताया ने उनके यहां असहायों की तादाद बढ़ने लगी जिसमें नवजात बच्चियां अधिक थी..यही नहीं उनके आश्रम की वजह से आश्रम के पास वाली सड़क का नाम सेवा नगर भी पड़ गया..अब दूर दूर से लोग उनके दरवाजे पर भी बच्चियों को छोड़ने लगे…लेकिन स्वामी बालनाथ ने ना सिर्फ उन्हें अपनाया..बेहतर शिक्षा देकर ससुराल तक भेजा..

स्वामी जी के मुताबिक अब तक तकरीबन दो हजार बच्चियों का पालन पोषण और विवाह की जिम्मेदारीे वे उठा चुके हैं..इसके अलावा जिन बुजुर्गों का कोई नहीं उनकी खिदमत करना स्वामी जी सबसे बड़ा धर्म मानते हैं..ऐसे ही कुछ असहाय लोगों से मेरी भी मुलाकात हुई..वाकई साल के पहले दिन ही स्वामी बालनाथ से मिलकर मुझे कितना आत्मिक सुकून मिला शब्दों से बयान नहीं कर सकता..सोचिए एक तरफ जहां आज कुछ लोग नवजात बच्चियों का तिरस्कार कर रहे हैं..बुजुर्ग माता पिता का साथ छोड़ रहे हैं वहीं स्वामी बालनाथ जैसे लोग भी हैं जो इंसानियत की सेवा में दिन रात जुटे हुए हैं..

संबंधित वीडियो देखने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/EFk1FLV0UDo

मुंबई और दिल्ली के कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके टीवी जर्नलिस्ट अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

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पत्रकार अश्विनी शर्मा और लक्ष्मीकांत दुबे सड़क दुर्घटना में घायल, रजत अमरनाथ को हार्ट अटैक

तीन पत्रकारों के संबंध में दुखद खबरें हैं. दिल्ली में एपीएन न्यूज चैनल में कार्यरत बनारस निवासी पत्रकार अश्विनी शर्मा और कई अखबारों में काम कर चुके गोरखपुर निवासी पत्रकार लक्ष्मीकांत दुबे अलग-अलग सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इनका इलाज चल रहा है. अश्विनी और लक्ष्मीकांत दोनों को हाथ, माथे और पैर में चोट लगी है. दोनों का ही इलाज नोएडा के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है.

उधर, वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत अमरनाथ के बारे में सूचना है कि मई के पहले सप्ताह में उन्हें भीषण हर्ट अटैक का सामना करना पड़ा. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब वे स्वस्थ हैं. उनके कई तरह के टेस्ट और इलाज चल रहे हैं. रजत अमरनाथ स्टार न्यूज, न्यूज एक्सप्रेस समेत कई चैनलों व कई अखबारों में कई दशकों तक काम कर चुके हैं. इन दिनों वो मीडिया और गैर-मीडिया से संबंधित कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं.

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भाजपा में मोदी के बाद सर्वाधिक भीड़ बटोरू और डिमांडिंग नेता बने सांसद व गायक मनोज तिवारी!

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद और भोजपुरी फिल्म, गीत-संगीत के सुपर स्टार मनोज तिवारी के बारे में एक नई जानकारी अपडेट कर लें. हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों में जिस कदर इनकी सभाओं में भीड़ उमड़ी है, उसका जब एनालिसिस किया गया तो पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा में सबसे बड़े भीड़ बटोरू नेता बन गए हैं मनोज तिवारी. जी हां, यह सच है. इसी आधार पर भाजपा के अंदरखाने मनोज तिवारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा का सबसे बड़ा स्टार प्रचारक कहा-माने जाने लगा है. चुनावों के दौरान मनोज तिवारी की भाजपा के अंदर बढ़ती डिमांड से भी पता चलता है कि उनकी राजनीतिक हैसियत बीजेपी में काफी बड़ी हो गई है.

(हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के दौरान मनोज तिवारी के नाम पर जिस कदर जनता टूटकर सभाओं में पहुंची, उसने राजनीतिक पंडितों के साथ-साथ भाजपा के रणनीतिकारों को भी हैरत में डाल दिया. इन्हीं चुनावों के दौरान की कुछ तस्वीरें)


 

लोकसभा चुनाव हो या अभी हाल में हुए विधानसभा चुनाव, मनोज तिवारी की जन सभाओं में उम्मीद से ज्यादा भीड़ उमड़ी..देश के किसी भी हिस्से में इन्हें देखने सुनने के लिए जन सैलाब उमड़ता दिखा..सवाल ये है कि आखिर मनोज तिवारी में ऐसा क्या है जो जनता इनकी दीवानी है..इसके लिए हम आपको करीब बीस साल पीछे ले जाते हैं जब मनोज तिवारी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ क्रिकेट और गायकी में खुद को आजमा रहे थे..दोनों ही जगह मनोज जी ने अपनी मेहनत और लगन से अपना सिक्का जमाया..देश विदेश में क्रिकेट के साथ गायकी में भी खूब नाम कमाया और इन्हें देखने के लिए भी भीड़ उमड़ने लगी..

वैसे तो ये हर तरह के गीत गाते थे लेकिन भोजपुरी में इन्होंने जैसे क्रांति मचा कर रख दिया..गायक के साथ अभिनेता भी बने.. भोजपुरी फिल्मों के सबसे बड़े सुपर स्टार बनकर उभरे..अब तो इनकी एक झलक पाने के लिए और जबरदस्त भीड़ उमड़ने लगी..मुंबई का जुहू बीच हो या बनारस का गंगा किनारा तिल रखने की जगह नहीं होती..मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय तो इनके इस कद्र दीवाने हो गए कि नफरत और भाषा की राजनीति करने वाले नेताओं ने इन पर हमले तक करवाए लेकिन मनोज जी का हौसला कम नहीं कर सके..ये अपनी मधुर आवाज से नफरत की राजनीति करने वालों को भी प्रेम का पैगाम देते रहे..आखिर में वो सब भी इनके मुरीद हो गए..

कुछ महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में इनकी प्रतिभा को देखकर नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा और इन्होंने पार्टी को निराश ना करते हुए कांग्रेसी नेता जय प्रकाश अग्रवाल को हरा दिया..खुद के लिए इन्होंने जितनी मेहनत की और प्रचार किया उससे ज्यादा जनसभाएं इन्होंने पार्टी के दूसरे उम्मीदवारों के लिए किया..देशभर में सौ से ज्यादा जनसभाएं करते हुए करोड़ों लोगों का दिल जीता..हरियाणा का फरीदाबाद, रोहतक, भिवानी हो या महाराष्ट्र का नागपुर, मुंबई, ठाणे और देश का कोई भी हिस्सा हो जहां ये गए अपने करिश्माई व्यक्तित्व से जनता का दिल जीतते रहे..एक खिलाड़ी होने की वजह से ये बिना थके बिना रुके देश भ्रमण करते रहे और जहां गए ऐतिहासिक भीड़ इनका स्वागत करती रही..इस मामले में पूछे जाने पर मनोज जी कहते हैं जब हमारे प्रधानमंत्री देश को शिखर पर पहुंचाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं तो मैं तो सिर्फ उनका एक सिपाही मात्र हूं..मनोज जी के इस सफर का गवाह मैं ही नहीं इनके समकक्ष पढ़े और भी लोग रहे हैं..जो इनकी इस प्रसिद्धि को सलाम करते हैं और उपर वाले से दुआ करते हैं कि ये सत्ता के शिखर पर पहुंचे..

लेखक अश्विनी शर्मा पत्रकार और विश्लेषक हैं. अश्विनी मुंबई और दिल्ली में कई मीडिया हाउसों में कार्य कर चुके हैं. इन दिनों भास्कर न्यूज में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं.

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