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लाठीचार्ज की फोटो खींचने पर पुलिस ने रिपोर्टर को पीटा तो जागरण ने मदद की बजाए उल्टे नौकरी से निकाल दिया

मेरठ के लिसाड़ी गेट पर पिछले दिनो पुलिस जब लोगों पर लाठिया भांज रही थी, दैनिक जागरण के रिपोर्टर रिजवान खान उस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने लगे। इस पर एसओ लिसाड़ी गेट और कुछ पुलिसकर्मियों ने उनसे पहले तो हाथापाई और मारपीट की, फिर लॉकअप में ठूंस दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप पर उन्हें छोड़ दिया गया। इसमें सबसे शर्मनाक भूमिका जागरण प्रबंधन की रही। रिजवान खान को मदद करने की बजाए उल्टे नौकरी से हटा दिया गया।

 

मेरठ के लिसाड़ी गेट पर पिछले दिनो पुलिस जब लोगों पर लाठिया भांज रही थी, दैनिक जागरण के रिपोर्टर रिजवान खान उस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने लगे। इस पर एसओ लिसाड़ी गेट और कुछ पुलिसकर्मियों ने उनसे पहले तो हाथापाई और मारपीट की, फिर लॉकअप में ठूंस दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप पर उन्हें छोड़ दिया गया। इसमें सबसे शर्मनाक भूमिका जागरण प्रबंधन की रही। रिजवान खान को मदद करने की बजाए उल्टे नौकरी से हटा दिया गया।

 

बताया गया है कि जागरण प्रबंधन के इस रवैये ने रिजवान खान को अंदर तक तोड़ दिया है। अब उनके दिमाग में सुसाइड जैसे खयालात आने लगे हैं। रिजवान अपनी आपबीती में लिखते हैं कि ”मुझे करीब 10 वर्ष पत्रकारिता करते हो गए। अमर उजाला मेरठ में सात वर्ष और करीब तीन वर्ष दैनिक जागरण मेरठ में काम किया है। आज तक मेरे ऊपर न तो कोई मुकदमा दर्ज है, न ही कभी मैंने किसी का दिल दुखाया है। मैंने सच्चे दिल से अपने काम को अंजाम दिया है लेकिन अभी करीब एक महीना पहले मेरठ के थाना लिसाड़ी गेट में कवरेज करने गया था, जिसमें एसओ लिसाड़ी गेट रवेन्द्र यादव अपनी टीम के साथ महिलाओं और पुरुषों पर लाठी बरसा रहा था। मैंने अपने मोबाईल में सब कैद करना शुरू ही किया था, तभी दो सिपाही जो लिसाड़ी गेट थाने में ही तैनात हैं, जण्डैल यादव और धर्मेन्द्र ने मेरे साथ मारपीट करनी शुरू कर दी।

” उसके बाद एसओ और सिपाही संजीव यादव ने भी मेरे साथ मारपीट की और मुझे हवालात में डाल दिया। ये बाद जागरण सिटी इंचार्ज और संपादक को भी पता लग गई लेकिन किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। पता चलने पर एस पी सिटी मेरठ और सीओ कोतवाली थाने पहुंचे और उन्होंने मुझे सम्मान सहित मुक्त करा दिया क्योंकि मैं गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि आप हमारे भाई हैं, ये सब अनजाने में हुआ है। अब आप भी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कुछ मत करना। इसके बाद सीओ मुझे अपनी गाड़ी से मेरे घर तक छोड़ गये। 

”उसके बाद मुझे दैनिक जागरण ने ड्यूटी पर आने से मना कर दिया। आखिर मेरी गलती क्या थी। मेरे साथ ये सब कुछ हुआ लेकिन कोई मेरे साथ नहीं आया। आखिर क्यों? उसके बाद से मैं इतना परेशान हूं कि कभी-कभी तो दिल करता है, सुसाइड कर लूं, लेकिन मजबूर हूं। छोटे-छोटे बच्चे मुझ पर ही आश्रित हैं। अब कुछ दिन से एक अन्य न्यूज़ पेपर दैनिक जनमाध्यम से जुड़ गया हूं। अब लगने लगा है कि कोई साथी नहीं है। पत्रकारों में एकता नहीं है। जागरण प्रबंधन ने आज मेरे साथ ऐसा किया है तो कल औरों के साथ भी कर सकता है। हम पत्रकार एक क्यों नहीं हैं, जबकि पूरे हिंदुस्तान में एक अधिवक्ता को कोई जरा सा छू भी दे, पूरा समुदाय एकजुट हो जाता है। अब तक मैंने इस घटना का खुलासा भी इसीलिए लिए नहीं किया क्योंकि मुझे डर था, और है कि मुझे फिर कहीं फंसा न दिया जाए।” 

संपर्क रिज़वान खान : 9997008704 / 9319040945

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