नोएडा । दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश के शीर्ष प्रबन्धकों की लूटमार नीतियों के कारण भास्कर का वाराणसी संस्करण इन दिनों सुर्खियो में है। वाराणसी संस्करण को शुरू कराने के लिए दैनिक भास्कर वाराणसी के स्थानीय सम्पादक डा0 वरूण उपाध्याय और दैनिक भास्कर नोएडा मुख्यालय में कार्यरत मुद्रक प्रकाशक ललन मिश्रा के बीच हुए अनुबन्ध की छायाप्रति हमें प्राप्त हुई है।
दरअसल यह अनुबन्ध ही प्रथम दृष्टया अवैध और अवैधानिक है। कारण दैनिक भास्कर के मूल स्वामी श्री संजय अग्रवाल ने मनुश्री क्रिएशसन्स प्राइवेट लिमिटेड को दैनिक भास्कर 20 वर्ष की लीज पर दिया हुआ है। नियमतः उत्तरप्रदेश में कोई भी अन्य व्यक्ति को लीज पर अखबार केवल श्री अग्रवाल ही दे सकते है, मनुश्रीक्रिएशसन्स प्राइवेट लिमिटेड इस समय लीजी की भूमिका में है। श्री अग्रवाल लीजर की भूमिका में है।
साफ जाहिर है कि मनुश्री क्रिएशसन्स प्राइवेट लिमिटेड इस अखबार को किसी अन्य को सबलैटिंग नहीं कर सकती, लेकिन मनुश्रीक्रिएसन्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से मुद्रक प्रकाशक ललन मिश्रा ने दैनिक भास्कर वाराणसी संस्करण को लीज पर देकर डा. वरूण के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जालसाजी की है।
मजे की बात यह है कि नटवरलाल ललन मिश्रा ने धोखाधड़ी की तमाम सीमाओं को तोड़ते हुए महज दो कागज के पन्ने पर इस एग्रीमेंट को किया है। एग्रीमेंट पर रिवेन्यू स्टैप्म डयूटी तक नहीं है। केवल एग्रीमेंट के अंतिम पेज पर दैनिक भास्कर नोएडा की मुहर लगायी गयी है, और उस पर ललन मिश्रा व डा. वरूण उपाध्याय के हस्ताक्षर हैं।
यह एग्रीमेंट दैनिक भास्कर के प्रधान सम्पादक दीपक द्विवेदी को सम्बोधित है। एग्रीमेंट की अन्य शर्तों के अलावा तीस लाख रुपये बतौर रायल्टी देने की बात भी कही गयी है। यह एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं है।
आपको बता दें कि रायल्टी हमेशा मूलस्वामी को दी जाती है। यह रायल्टी श्री संजय अग्रवाल को मिलनी चाहिए थी, लेकिन ललन मिश्रा और दीपक द्विवेदी की जुगलजोड़ी ने यह रकम खुद ले ली।
पड़ताल के बाद पता चला है कि यह सारी रकम दैनिक भास्कर नोएडा के एचडीएफसी बैंक में आनलाइन और चेक द्वारा डा. वरूण ने ट्रांसफर की है। जब इस जालसाजी का डा. वरूण को पता चला तो उन्होंने इस रकम की वापसी के लिए अपने वकील के माध्यम से फरवरी माह में एक कानूनी नोटिस भेजा।
इस नोटिस से तिलमिलाये ललन मिश्रा ने इस अखबार के प्रकाशन को रोकने के लिए डीएम वाराणसी को एक पत्र भेजकर कहा कि उनके कार्यालय में उनके द्वारा दाखिल किया गया घोषणा पत्र असली नहीं है, किसी ने यह घोषण पत्र उनके फर्जी हस्ताक्षर से दाखिल किया है।
शायद ललन मिश्रा यह भूल गये कि घोषणा पत्र हमेशा व्यक्तिगत रूप से पेश होकर दाखिल किया जाता है।
दूसरे ललन मिश्रा द्वारा दाखिल किया गया घोषणा पत्र की प्रतिलिपि भी खुद ललन ने मेल पर भी वरूण को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के लिए भेजी थी।
इन तमाम दलीलों को वाराणसी का जिला प्रशासन सिरे से खारिज कर चुका है। इस चार सौ बीसी के लिए डा. वरूण दैनिक भास्कर के प्रधान सम्पादक दीपक द्विवेदी और मुद्रक प्रकाशक ललन मिश्रा के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर चुके हैं। किसी भी समय कानून का फन्दा इन दोनों की गर्दन को पकड़ सकता है।


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