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दैनिक जागरण ने निकाली वैकेंसी, पुराने कर्मचारियों को हटाने की तैयारी!

Fourth Pillar : शोषण के मामले में देश में अग्रणी दैनिक जागरण ने नई भर्ती के लिए बाकायदा डबल कालम में बड़ा सा विज्ञापन निकाला है। उसका सीधा सा मतलब है कि दैनिक जागरण पुराने कर्मचारियों की एकता से पूरी तरह भयभीत हो गया है और नई भर्ती करके पुराने कर्मचारियों से छुट्टी पाने की कवायद में लग गया है। हालांकि यह कवायद अवैध है। एक ओर कंपनी अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेतनमान नहीं दे रही है तो दूसरी ओर उसे नए कर्मचारियों की जरूरत आन पड़ी है। खैर। इसका जवाब तो कंपनी को सुप्रीम कोर्ट में देना होगा कि क्‍यों वह शीर्ष अदालत को गुमराह कर रही है।

Fourth Pillar : शोषण के मामले में देश में अग्रणी दैनिक जागरण ने नई भर्ती के लिए बाकायदा डबल कालम में बड़ा सा विज्ञापन निकाला है। उसका सीधा सा मतलब है कि दैनिक जागरण पुराने कर्मचारियों की एकता से पूरी तरह भयभीत हो गया है और नई भर्ती करके पुराने कर्मचारियों से छुट्टी पाने की कवायद में लग गया है। हालांकि यह कवायद अवैध है। एक ओर कंपनी अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेतनमान नहीं दे रही है तो दूसरी ओर उसे नए कर्मचारियों की जरूरत आन पड़ी है। खैर। इसका जवाब तो कंपनी को सुप्रीम कोर्ट में देना होगा कि क्‍यों वह शीर्ष अदालत को गुमराह कर रही है।

 

बता दें कि कंपनी में जो नई भर्ती की जाती है, उसमें बार्गेनिंग करके कम से कम सैलरी में किसी भी युवा को नौकरी पर रख लिया जाता है। विज्ञापन में भले ही तमाम मानदंड रखे गए हैं, लेकिन भर्ती के समय उसका कोई ध्‍यान नहीं दिया जाता। जब युवा अपनी जवानी का महत्‍वपूर्ण समय कंपनी को दे देता है, तो नौकरी से निकालने की धौंस जमा कर उससे एक सादे कागज पर हस्‍ताक्षर करा लिया जाता है कि वह जीवन भर एक ही सैलरी पर नौकरी करने के लिए सहमत है। तब तो महंगाई बढ़ने के साथ निरंतर उसकी सैलरी घटती जाएगी। सादे कागज पर हस्‍ताक्षर का मतलब है कि उसके पीछे आपका सुसाइड नोट भी लगाया जा सकता है और कंपनी आपकी हत्‍या करा कर उसे सुसाइड में तब्‍दील करा सकती है। ऐसा करने के लिए कंपनी का साथ दे रहे हैं दुनिया के सबसे शक्तिशाली पुरुष बराक ओबामा के परममित्र माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। यह तो वही बात हुई-सैंया भए कोतवाल, अब डर काहे का। अब आप खुद समझ लें कि जिस दैनिक जागरण के इतने बड़े-बड़े मित्र हैं, वह आपके साथ कुछ भी करे तो उसका आप कुछ भी उखाड़ नहीं पाएंगे। भरोसा नहीं हो रहा है तो नीचे दी गई तस्‍वीर देख लें।

इसलिए जिसे अपना जीवन प्रिय नहीं है, वह दैनिक जागरण में नौकरी के लिए अवश्‍य अप्‍लाई करे। आपकी मौत के लिए हमारी भी शुभ कामनाएं आपके साथ हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि दैनिक जागरण से अधिक सैलरी तमाम छोटे-छोटे अखबार भी दे रहे हैं। ऐसे लगभग चार हजार अखबार हैं, जहां दैनिक जागरण से बेहतर भविष्‍य है। फैसला आपके हाथ में है कि आप अपने को मौत के मुंह में झोंकेंगे अथवा किसी बेहतर भविष्‍य की ओर बढ़ेंगे। कुछ युवा दैनिक जागरण का ठप्‍पा लगवाने के लिए वहां नौकरी कर लेते हैं, लेकिन अब वह बात नहीं रही। दैनिक जागरण के नाम पर मार्केट में कोई भी कंपनी नौकरी देने को तैयार नहीं है, क्‍योंकि सभी यह जान गए हैं कि दैनिक जागरण में किसी को भी नौकरी पर रख लिया जाता है।

फेसबुक पेज Fourth Pillar से साभार.

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