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सियासत

मोदी राज में रामदेव ने किसके बाप को दे दी चुनौती- “किसी का बाप भी मुझे अरेस्ट नहीं कर सकता!”

संजय कुमार सिंह-

यह चुनौती हमारे आपके लिए नहीं है… हिन्दी में इसके लिए अच्छा भला मुहावरा है, “सैंया भये कोतवाल ….”। और इस बात को कहने-समझने का वही संस्कारी तरीका है। लेकिन खुद से यह कहना संस्कार नहीं है कि मेरे बाप को जानो या नहीं, ये जान लो कि किसी का बाप मुझे गिरफ्तार नहीं कर सकता है।

दिल्ली वालों के बारे में कहा जाता था कि वे हर सिपाही पर रौब गांठते हैं और अक्सर कहते हैं, जानते हो मेरा बाप कौन है। फिर वे अपने असली और प्रभावशाली बाप से बात करवाकर 100 रुपए के चालान से बच जाते थे। अब चालान बहुत ज्यादा का है और बापों की औकात बहुत कम हो गई है। बाबाओं की बारी लगती है। कोई गोमूत्र पीकर अमर हो रहा है को गंगा स्नान करके कोरोना को चुनौती दे रहा है। दूसरी ओर, दिल्ली में बाहर वालों के बाप बनाने के किस्से भी हैं।

एक भाई ने तो खुद ही एक ऐसी हस्ती को अपना बाप होने की घोषणा कर रखी है जो कहता रहा है कि उसका कोई है ही नहीं। और खंडन या भूल सुधार दोनों पक्ष ने नहीं किया है। उसी की रक्षा या सेवा में ट्वीटर को नानी याद दिला दी गई। और अब ये सबके बाप को चुनौती दे रहे हैं। इससे अच्छे दिन क्या हो सकते हैं।

देश के कानून की जरा सी भी समझ रखना वाला किसी बड़े बाप के बिना ऐसा दावा नहीं कर सकता है। पुलिस तो गिरफ्तार छोड़िए गुंडों की तरह गिरफ्तार भी करती रही है और दूसरे राज्य में स्थानीय पुलिस की मदद लिए बगैर ऐसा करने के लिए पिटी भी है। लेकिन पकड़ को अपने इलाके में लाकर अपहर्ता भी हीरो हो जाते रहे हैं। ऐसे में बाबा की यह चुनौती कानून-व्यवस्था के रखवालों के लिए है।

कानूनन तो कोई भी गिरफ्तार किया जा सकता है और कानून की प्रैक्टिस करने वाले पी चिदंबरम भी 100 दिन से ज्यादा जेल रह आए हैं। अपराध अभी साबित नहीं हुआ है। इतवार को छपे अपने साप्ताहिक कॉलम में पी चिदंबरम ने लिखा भी है, “17 मई, 2021 को सीबीआइ ने 2014 के नारद स्टिंग मामले में आरोपपत्र के आधार पर पश्चिम बंगाल के दो राज्यमंत्रियों और एक विधायक को गिरफ्तार किया था। यह आरोपपत्र सात मई को तैयार कर लिया गया था, लेकिन दाखिल 17 मई को किया गया। उसी दिन सभी को जमानत मिल गई, उसी रात कलकत्ता हाई कोर्ट ने जमानत आदेश निलंबित कर दिए और निलंबन आदेश वापस लेने की याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही है। कानून तो है, पर यह त्रासदी संघवाद की है। अगर किसी राज्य में अपराध के मामले में राज्य सरकार किसी केंद्रीय मंत्री को उस राज्य में गिरफ्तार करती है, तो मेरा मानना है कि कानून तब भी काम करेगा। तब भी त्रासदी संघवाद ही होगा।”

ऐसे में यह चुनौती हमारे आपके लिए नहीं है। देश में कानून के राज का हाल सबको पता है। यह उसी का विस्तार है। या प्रचार है। हम आप जिसे गलत समझते हैं उसे देश में बहुत सारे लोग सरकार की ताकत मानते हैं। इसलिए यह प्रचार भी हो सकता है। भले बाबा ने अपने स्तर पर कोशिश की हो।

हम तो फिलहाल यही गा सकते हैं, बाप वालों, फूलो फलो!

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