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जागरणकर्मियों ने की बैठक, बोले- अपना हक़ लेकर रहेंगे

नई दिल्ली/ नोएडा। दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने रविवार को नोएडा के सेक्टर 62 स्थित पार्क में बैठक कर मजीठिया आंदोलन के लिए रणनीति पर विचार विमर्श किया। जागरण कर्मचारियों ने बैठक में कहा कि प्रबंधन लाख कोशिशों के बाद भी एक भी कर्मचारी को आंदोलन में आने से रोकने में असफल रहा है। कर्मचारी नेता वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि हमारा आंदोलन पूरी तरह अनुशासित रहा है।

नई दिल्ली/ नोएडा। दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने रविवार को नोएडा के सेक्टर 62 स्थित पार्क में बैठक कर मजीठिया आंदोलन के लिए रणनीति पर विचार विमर्श किया। जागरण कर्मचारियों ने बैठक में कहा कि प्रबंधन लाख कोशिशों के बाद भी एक भी कर्मचारी को आंदोलन में आने से रोकने में असफल रहा है। कर्मचारी नेता वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि हमारा आंदोलन पूरी तरह अनुशासित रहा है।

उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि हमने कानून का सम्मान करते हुए अपने हक़ के लिए संघर्ष किया है और आगे भी हम इसी तरह अपने हक़ के लिए आवाज उठाते रहेंगे। बैठक में जागरण कर्मचारी यूनियन के संरक्षक श्री वीरेंद्र सिंह सिरोही ने कहा कि कर्मचारियों के संघर्ष को और तेज़ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जागरण का अत्याचारी प्रबंधन धन बल की ताकत का दुरूपयोग कर कर्मचारियों को उनका हक़ नहीं देना चाहता लेकिन हमें सफलता मिलने तक आंदोलन को और ताकत के साथ लड़ना होगा।

बैठक में आगामी संसद सत्र में संसद के बाहर प्रदर्शन करने के सम्बन्ध में भी चर्चा की गयी। कर्मचारियों ने कहा कि जागरण प्रबंधन कर्मचारियों को आतंरिक जांच के नाम पर तोड़ने की कोशिश कर रहा है लेकिन कर्मचारी अटूट हैं और अंतिम सांस तक अपने हक़ के लिए संघर्ष करेंगे। बैठक में बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।

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1 Comment

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  1. pawan kumar

    November 16, 2015 at 4:10 am

    कर्मचारियों का शोषक है दैनिक जागरण, मानवाधिकारों का कर रहा हनन… मानवाधिकारों का हनन और कर्मचारियों का शोषण करने में नंबर एक संस्थान है दैनिक जागरण। आप अखबार उठाकर देखिये पूरा अखबार सदाचार, संस्कार और नैतिकता की लफ्फाजियों से भरा हुआ मिलेगा। अखबार में लोकतंत्र की रक्षा की बड़ी-बड़ी बातें लिखी होंगी। लेकिन यक़ीन जानिए इस अत्याचारी अखबार के मालिकों ने अपना हक़ मांगने पर 350 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इन कर्मचारियों का कसूर बस इतना था कि इन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का अनुरोध जागरण के मालिकों से किया था। गौरतलब है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2014 में अखबार संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को मजीठिया आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन औए एरियर देने को कहा था। लेकिन जागरण प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए 350 से अधिक कर्मचारियों को अन्याय के खिलाफ लड़ने का दंड दते हुए संस्थान से बाहर कर दिया। आपको जानकर हैरत होगी कि जागरण के मालिकानों पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। बावजूद इसके ये कर्मचारियों को उनका हक़ देने को कतई तैयार नहीं हैं। अब ऐसे में इतना ही कहा जा सकता है कि- खुदा खैर करे।

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