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मोदी‬ को साधुवाद जिन्होंने सेल्फी के लिए धक्कमपेल करते पत्रकारों का ढोंग उजागर किया

Rajender Singh Brar :  ‎प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी‬ को साधुवाद जिन्होंने इन सेल्फीचोर पत्रकारों का ढोंग उजागर किया क्योंकि पिछले एक दशक से ये लोग उनको पानी पी पी कर ‘कोस’ रहे थे और आज उसी ‘महामानव’ के साथ सेल्फी के लिये धक्कमपेल करते दिखाई दिये। घिन आती है यह सोच कर कि यही वो पत्रकार बिरादरी है जिसके कंधों पर सच लिखने और दिखाने की ज़िम्मेदारी है पर भड़वागिरी में लिप्त हैं। मेरा भाजपा के नेतृत्व से भी सवाल है कि ऐसे आयोजनों से क्या साबित करना चाहते हैं? प्रजातान्त्रिक व्यवस्था के लिये तो यही अच्छा है कि प्रेस जनता के सवाल प्रधानमंत्री के सामने रखे और देश का प्रधानमंत्री उनके जबाव देकर उसे आश्वस्त करे। बड़े से बड़े देश का मुखिया भी मीडिया के सवालों के जबाव देने को बाध्य होता है। अपने देश में पता नहीं क्यों, देश का प्रधानमंत्री बनते ही ‘मौन’ हो जाता है। ऐसी चुप्पी से किसी का भला नहीं होने वाला, पब्लिक सब समझती है और उसे जबाव देना भी आता है, बस उपयुक्त समय की तलाश में रहती है।

Rajender Singh Brar :  ‎प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी‬ को साधुवाद जिन्होंने इन सेल्फीचोर पत्रकारों का ढोंग उजागर किया क्योंकि पिछले एक दशक से ये लोग उनको पानी पी पी कर ‘कोस’ रहे थे और आज उसी ‘महामानव’ के साथ सेल्फी के लिये धक्कमपेल करते दिखाई दिये। घिन आती है यह सोच कर कि यही वो पत्रकार बिरादरी है जिसके कंधों पर सच लिखने और दिखाने की ज़िम्मेदारी है पर भड़वागिरी में लिप्त हैं। मेरा भाजपा के नेतृत्व से भी सवाल है कि ऐसे आयोजनों से क्या साबित करना चाहते हैं? प्रजातान्त्रिक व्यवस्था के लिये तो यही अच्छा है कि प्रेस जनता के सवाल प्रधानमंत्री के सामने रखे और देश का प्रधानमंत्री उनके जबाव देकर उसे आश्वस्त करे। बड़े से बड़े देश का मुखिया भी मीडिया के सवालों के जबाव देने को बाध्य होता है। अपने देश में पता नहीं क्यों, देश का प्रधानमंत्री बनते ही ‘मौन’ हो जाता है। ऐसी चुप्पी से किसी का भला नहीं होने वाला, पब्लिक सब समझती है और उसे जबाव देना भी आता है, बस उपयुक्त समय की तलाश में रहती है।

Harendra Moral :  शर्मनाक ….शर्मनाक ….शर्मनाक। मोदी को सेल्फी पीएम कहने वाली मीडिया और उसके नुमाइंदे आज खुद उनके साथ सेल्फी ‌लेने के लिए मरे जा रहे थे। भाजपा के दिवाली मिलन कार्यक्रम के नाम पर  इकट्ठा हुए देशभर के पत्रकारों और संपादकों में प्रधानमंत्री के साथ जिस तरह फोटो खिंचवाने और हाथ मिलाने की होड़ लगी उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे गरीबों के मोहल्ले में कोई खैरात बांटने आ गया हो। मीडिया के नुमाइंदों ने बेहयाई की सारी हदें पार कर दी। आलम ये रहा कि कार्यक्रम दिवाली मिलन नहीं मोदी मिलन बनकर रह गया। दिनभर न्यूज चैनलों पर बैठकर मोदी और उनकी नीतियों को गरियाने वाले बड़े बड़े पत्रकार भी मोदी को सामने देखते ही घुटनों पर आ गए। ……सही है हमें भी तुम्हारा वजूद पता चल गया।

आशीष सागर : सेल्फी पत्रकारों कभी मरे किसान के साथ भी सेल्फी ले लिया करो! बाँदा – साल 6 जुलाई 2006 को बाँदा की न्याय पंचायत पडुई सुहाना में किसान किशोरीलाल साहू की आत्महत्या के बाद देश भर में फैला ‘चुल्हा बंदी आन्दोलन’ की आंच अभी अभी ठंडी नही हुई है. किशोरी के बाद से हर साल यहाँ किसान मरते है! उसी सूखे का जश्न मनाते है!…कल जब देश के पत्रकार दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी ले रहे थे तब इस गाँव का किसान देवीदीन साहू (65 वर्ष) पुत्र रामदयाल साहू ने मुरझाये खेत में सदमे से जान दे दी! ..इस पर केसीसी का यूनियन बैंक से 1 लाख 70 हजार कर्जा था. 17 बीघा का ये किसान एक सिंचित ग्राम पंचायत से है मगर बेपानी है….इस किसान की कोई सेल्फी न ले सका!

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