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आज इंडियन एक्सप्रेस ने बांग्लादेश का हाल बताया, इस बहाने इसमें भारत की भूमिका पर सवाल है

देश की राजनीति ऐसी हो गई है कि एक नेता राजनीतिक आत्महत्या करने को मजबूर हुए तो राजनीति करने के लिए मजबूर सरकारी विभाग के अफसर ने संभवतः वास्तविक आत्महत्या कर ली है।

संजय कुमार सिंह

आंध्र प्रदेश की फार्मा इकाई में ब्लास्ट से 17 लोगों की मौत और वायुसेना के विमान से दुर्घटनावश कोई भारी चीज गिरने से किसी की मौत न होने की खबरों के बीच आज खबर यह है कि बच्चों के स्कूल (प्री स्कूल) के एक नाटक में पाकिस्तान के झंडे का उपयोग किये जाने के विरोध अखिल भारतीय विद्याथी परिषद ने किया है और स्कूल ने कहा है कि इसका कारण सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया संपादित वीडियो है। इसमें जो खबर नहीं है पर ध्यान देने वाली बात है वह यह कि अखिल भारतीय विद्याथी परिषद चाहता है कि बच्चों के नाटक में क्या हो वह भी उससे पूछकर तय किया जाये और सोशल मीडिया पर संपादित वीडियो का तो कोई माई-बाप ही नहीं है। विद्यार्थी परिषद को दिख जाता है, शासन प्रशासन को पता नहीं चलता। देश का आम माहौल ऐसा ही है और इसमें राजनीतिक खबर यह है कि चंपई सोरेन राजनीतिक आत्महत्या के लिए मजबूर हुए तो सीबीआई जांच का सामना कर रहे ईडी के एक अफसर का शव रेल पटरी पर मिला है। पुलिस को यह आत्महत्या का मामला लगता है। हालांकि, ऐसा कुछ अभी मिला नहीं है और अधिकारी के परिवार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। मुझे लगता है कि इन सारी खबरों से समाज के भिन्न वर्ग के लोगों की लाचारी का पता चलता है और यह तब है जब सरकार न सिर्फ देश के बल्कि बांग्लादेश के हिन्दुओं की भी चिन्ता में दुबली हुई जा रही है।

बांग्लादेश

आप जानते हैं कि बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद चौथी बार प्रधानमंत्री चुनी गई शेख हसीना भारत में हैं और कल आपने पढ़ा कि बांग्लादेश के मुख्य विपक्षी दल बीएनपी ने भारत से कहा है कि बांग्लादेश में अपने खिलाफ मुकदमों का सामना करने के लिए शेख हसीना का भारत से प्रत्यर्पण किया जाये और उन्हें शरण देना लोकतंत्र के खिलाफ है। आज इंडियन एक्सप्रेस में अवामी लीग के नेताओं, शेख हसीना सरकार के मंत्रियों, कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के हवाले से छपी खबर का शीर्षक है, “हसीना जा चुकी हैं, उनकी पार्टी के नेता भूमिगत है : हम नाराजगी को भांप सकते थे, पर उनने सुना ही नहीं”। उपशीर्षक के अनुसार, अवामी लीग के नेताओं ने कहा है अंतिम सरकार के साथ जुड़ने की आवश्यकता है, यह एक लंबी कार्रवाई होगी। एक्सप्रेस ने बांग्लादेश में वहां के नेताओं से गुप्त मुलाकात के बाद लिखा है, यहां सबकी यही शिकायत है, हसीना ने पार्टी और उसके लोगों को छोड़ दिया है। खबर के अनुसार, अवामी लीग के एक नेता ने कहा, अपा (दीदी) ने हमें बेसहारा छोड़ दिया है। खबर के अनुसार जब उन्होंने बांग्लादेश छोड़ने का निर्णय लिया तो उनके मंत्रिमंडल के लोग, यहां तक कि सबसे करीबी भी पूरी तरह चकित थे।

लैटरल एंट्री

आज की दूसरी प्रमुख खबर भी इंडियन एक्सप्रेस में ही है। आज जब ज्यादातर अखबारों में कोलकाता मामले में कार्रवाई की खबर लीड है तो वह यहां पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में भी नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की छह कॉलम की लीड बताती है कि सरकार ने लैटरल एंट्री वाले विज्ञापन को रद्द करने के लिए ‘सामाजिक न्याय’ का उल्लेख किया है जबकि छह साल पहले योजना को ऐसे तैयार किया गया था जिससे आरक्षण से बचा जा सके। अखबार ने लिखा है कि यह छह साल और जनादेश कम होने का असर है। अखबार ने लिखा है, 2018 में जब यह योजना आकार ले रही थी तो आरक्षण को फुटनोट में पहुंचा दिया गया था। कुछ ऐसा, जिससे बचना था और यह आधिकारक रिकार्ड में है जिसकी समीक्षा इंडियन एक्सप्रेस ने की है। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसी खबरें जब आम आदमी तक नहीं पहुंचेगी तो वह अपनी सरकार को कैसे जान पायेगा या वैसे ही जान पायगा जैसे प्रचारक और व्हाट्सऐप्प यूनिवर्सिटी के जरिये बताया जायेगा। भाजपा इसमें माहिर है और इसके जरिये वह विरोधियों का नुकसान भी करती है। इसलिए तीन बार से उसी की सरकार बन रही है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

ममता सरकार झुकी

आइये, अब आज के लीड पर आते हैं। अंग्रेजी के कुछ अखबारों के अलावा यह नवोदय टाइम्स में भी लीड है। शीर्षक है, कोलकाता के ट्रेनी डॉक्टर रेप-मर्डर केस में दो एसीपी सहित तीन पुलिसवाले निलंबित। यही नहीं, आरजी कार मेडिकल कालेज की सुरक्षा सीआईएसएफ ने सभांली। आज यह खबर द टेलीग्राफ के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया में भी लीड है। द टेलीग्राफ तो कोलकाता का अखबार है और यहां शीर्षक है, चिकित्सों ने विरोध बढ़ाया तो आरजीकार में कार्रवाई। अन्य प्रमुख मांगे अभी भी पूरी नहीं हुई हैं, काम रोको जारी है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, बंगाल ने चिकित्सकों की मांग मान ली, आरजी कार अस्पताल के शिखर के चार हटाये गये। डॉक्टर की हत्या के बाद से इनमें से तीन पर नजर थी। द हिन्दू में यह खबर लीड नहीं है पर पांच कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, कोलकाता में डॉक्टर से बलात्कार, हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन में कोई कमी नहीं, राज्यपाल ने पीड़ितों के रिश्तेदारों से मुलाकात की। अमर उजाला में इस खबर का शीर्षक है, आंदोलन के आगे ममता सरकार झुकी, प्राचार्या समेत तीन को हटाया।  

जनगणना-जाति जनगणना  

आज द हिन्दू की लीड सबसे अलग है। इसके अनुसार केंद्र सरकार जनगणना के साथ जातिवार गणना भी कराने पर विचार कर रही है। आप जानते हैं कि 2021 में होने वाली जनगणना कोरोना के कारण नहीं हो पाई थी और अभी तक नहीं हुई है। खबर है कि कांग्रेस और अन्य दलों की मांग के कारण इसपर विचार चल रहा है। नवोदय टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि जनगणना सितंबर में शुरू होगी और नतीजे 2026 तक मिलेंगे। जनगणना का काम 18 महीने में पूरा हो जायेगा। इसके लिए इस साल के बजट में 8754 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। अगर जनगणना का फैसला हो गया है तो इसकी विधिवत घोषणा की जानी चाहिये। द हिन्दू की खबर से लगता है कि अभी यह अटकल है जबकि नवोदय टाइम्स की खबर ऐसी नहीं है। द हिन्दू के अनुसार एक शिखर के सरकारी सूत्र ने कहा है कि जनगणना के फॉर्म में एक कॉलम जाति का रखने पर भी विचार चल रहा है। मेरा मानना है कि सरकार जाति के साथ कराना नहीं चाहेगी और बिना जाती के कराएगी तो हंगामा होगा। इसलिए मामला इतना आसान नहीं है।

महिला सुरक्षा और उत्तर प्रदेश

कोलकाता का मामला महिला सुरक्षा से संबंधित है। इसके मुकाबले हिन्दी पट्टी में कई वारदातें हुईं हैं पर समाज वैसे आंदोलित नहीं है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ मामले में पीड़िता दलित है और कुछ मामलों में बलात्कारी दबंग। ऐसे में आज जब खबर है कि आंदोलनकारियों की मुख्य मांग मान ली गई पर आंदोलन कम नहीं हुआ और कई मांगें अभी मांगी जानी है तो हिन्दी पट्टी की कुछ खबरें गौर करने लायक हैं।  टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, सबसे पहले तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने सामूहिक बलात्कार की शिकार महिला की शिकायत लेने से मना किया। महिला ने आत्म हत्या कर ली। पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में यौन हिंसा के कोई संकेत नहीं हैं। ना ही गुप्तांगों पर जख्म है। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के दावे के अनुसार अगर मान लिया जाये कि आरोप झूठे हैं तो सच यह है कि एफआईआर नहीं लिखी गई और आत्म हत्या करने पर लिखी गई और तब गिरफ्तारी भी हो गई। भले बलात्कार या जबरदस्ती के सबूत नहीं मिले हैं। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि कोई जिन्दा रहते बलात्कार की शिकायत क्यों करेगा। पुलिस जांच के बिना शिकायत दर्ज करने से मना क्यों करेगी और बहुत आम हो, मना कर ही दे तो कोई आत्म हत्या क्यों करे और कर ही ले तो गिरफ्तारी का क्या मतलब? पर खबर के अनुसार सब हुआ है, तथ्य है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध

आज जब कोलकाता मामले में कार्रवाई और उसके बावजूद आंदोलन कम न होने की खबर है तब नवोदय टाइम्स ने एक दिलचस्प खबर छापी है। इसके अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध में फंसे सबसे ज्यादा सांसद, विधायक पश्चिम बंगाल के हैं। मौजूदा 151 सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले हैं। अखबार ने आज यह खबर एडीआर की रिपोर्ट के हवाले से छापी है। इसमें  यह भी बताया गय है कि सबसे ज्यादा आरोप भाजपा के सांसदों पर हैं। राजनीतिक दलो के आधार पर भाजपा के सबसे ज्यादा, 54 सांसद और विधायक हैं। इसके बाद कांग्रेस के 23 और तेलुगू देशम पार्टी के 17 सांसद-विधायक बलात्कार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। यह तो हुई जनप्रतिनिधियों की बात। आप जानते हैं कि महाराष्ट्र में छात्राओं के यौन शोषण का मामला गर्म है। आज छपी खबर के अनुसार बदलापुर के बाद अब अकोला का मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक ने छह लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया। वह लड़कियों को अश्लील वीडियो दिखाता था और गलत तरीके से छूता था। शिकायत के बाद शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है। द हिन्दू में छपी खबर के अनुसार, बदलापुर में प्रदर्शन करने वाले 72 छात्रों को दंगा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पर डबल इंजन वाले महाराष्ट्र के मामले में भाजपा नेता और हिन्दी वाले वैसे नहीं बोल रहे हैं जैसे कोलकाता मामले में बोल रहे थे। खबर है कि शिक्षक यह सब चार महीने से कर रहा था। आप समझ सकते हैं कि बच्चियों की स्थिति और उनके मानसिक विकास का क्या हाल होगा।

जीएसटी चोरी का सच

आप जानते हैं कि भ्रष्टाचार दूर करने का ढोंग करके और कांग्रेस सरकार को भ्रष्ट बताने का ढिंढोरा पीट कर सत्ता में आई मोदी सरकार ने जीएसटी लागू किया था तो कहा गया था कि इससे टैक्स चोरी नहीं होगी। दूसरी ओर, इसका असर यह हुआ कि छोटे कारोबारी खत्म हो गये और बड़े व्यावसायियों से खाने-पीने की चीजें खरीदिये या कुछ और सब पर जीएसटी लगना है और इससे महंगाई बढ़ गई है। दूसरी ओर सरकार जीएसटी वसूली की राशि प्रचारित कर बताती रही है कि अर्थव्यवस्था दुरुस्त है। पर असल में जो है वह सब अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है और इसी क्रम में आज अमर उजाला में पहले पन्ने की खबर है, चार साल में 1.20 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी। अभी तक 170 लोग गिरफ्तार किये गये हैं और 59,000 तथाकथित फर्जी कंपनियों की जांच चल रही है। खबर के अनुसार विशेष अभियान में 24,000 करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई है। हाल में खबर थी कि आईआईटी-दिल्ली को 2017 से 2022 के बीच प्राप्त शोध अनुदान के संबंध में 120 करोड़ रुपये का जीएसटी नोटिस भेजा गया था।

भारत बंद की खबर

इसके अपने मायने और राजनीति है। आज उसकी खबर पहले पन्ने पर बहुत कम अखबारों  में है। नवोदय टाइम्स में यह दो कॉलम की फोटो के साथ चार कॉलम की खबर है। शीर्षक है, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर में नहीं दिखा भारत बंद का खास असर। इसके साथ छपी फोटो रांची की है। कैप्शन है, सड़क पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध करते प्रदर्शनकारी। यह फोटो रांची की है। जेएनयू के लिए पैसों की कमी और धन के लिए परसंपत्ति बेचने की स्थिति भी गंभीर है। यह खबर द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर है। खबर के शीर्षक के अनुसार जेएनयू की इस योजना के खिलाफ गुस्सा है। इन खबरों को आप चाहे जैसे देखिये मुझे लगता है कि स्वेच्छा से या मजबूरी में अखबारों के पहले पन्ने की खबरों में अब विविधता है। इसके बिना काफ समय तक अखबारों में खबरें नहीं मिलती थीं। अब स्थिति थोड़ी बदल रही लगती हैं।

प्रधानमंत्री विदेश में

इससे पहले इंफोसिस को भी कई साल के पुराने मामलों में हजारों करोड़ का नोटिस भेजा गया है। मेरा मानना है कि ये नोटिस उसी साल क्यों नहीं दिये जाते हैं और चोरी करने देने का क्या मतलब है। कुछ लोगों का कहना है कि मकसद वसूली है और इलेक्टोरल बांड से यह साबित भी होता है। जो भी हो मामला गंभीर तो है ही, शर्मनाक भी है। एक माधवी पुरी बुच के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं हो रही है सो अलग। इन और ऐसी खबरों के साथ खबर यह है कि प्रधानमंत्री विदेश गये हैं। इंडियन एक्सप्रेस की लीड है, वार्ता के लिए प्रधानमंत्री वारसॉ में आज युद्ध से घिरे कीव जायेंगे। हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड का शीर्षक है, “शांति प्रयास :प्रधानमंत्री ने पोलैंड यूक्रेन का दौरा शुरू किया”। इसके साथ एक और खबर है, यूक्रेन के प्रतिनिधि (राजदूत) ने कहा है कि इस ऐतिहासिक दौरे से मौकों की नई संभावनाएं खुलेंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह टॉप पर दो कॉलम की खबर है। शीर्षक है, कीव में मोदी युद्ध समाप्त करने पर विचार साझा करेंगे। 

अनुसंधान अनुदान से वसूली

इस बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ई-कामर्स कंपनियों के निर्बाध विकास के कारण भारत में विशाल सामाजिक मुश्किलें सामने आ सकती हैं क्योंकि इससे देश भर में 10 करोड़ छोटे खुदरा विक्रेता प्रभावित हो सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि यह मुद्दा जीएसटी लागू किये जाने के समय ही उठा था अब इतने समय बाद केंद्रीय मंत्री का ऐसा कहना बड़ी ई-कामर्स कंपनियों के लिए चिन्ता का कारण बन सकता है। इनमें विदेशी कंपनियों के साथ निवेशक शामिल हैं। पर सरकार की हालत ऐसी है कि आईआईटी-दिल्ली को अनुसंधान अनुदान के लिए 120 करोड़ रुपये का जीएसटी नोटिस मिलने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने कदम उठाया आईआईटी-दिल्ली को भेजे गए जीएसटी नोटिस की रिपोर्ट के बाद शिक्षा मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया और इस मुद्दे को हल करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा शुरू की।

भारत बंद की खबर

इसके अपने मायने और राजनीति है। आज उसकी खबर पहले पन्ने पर बहुत कम अखबारों  में है। नवोदय टाइम्स में यह दो कॉलम की फोटो के साथ चार कॉलम की खबर है। शीर्षक है, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर में नहीं दिखा भारत बंद का खास असर। इसके साथ छपी फोटो रांची की है। कैप्शन है, सड़क पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध करते प्रदर्शनकारी। जेएनयू के लिए पैसों की कमी और धन के लिए परिसंपत्ति बेचने की स्थिति भी गंभीर है। यह खबर द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर है। खबर के शीर्षक के अनुसार जेएनयू की इस योजना के खिलाफ गुस्सा है। इन खबरों को आप चाहे जैसे देखिये मुझे लगता है कि स्वेच्छा से या मजबूरी में अखबारों के पहले पन्ने की खबरों में अब विविधता है। इसके बिना काफी समय तक अखबारों में खबरें नहीं मिलती थीं। अब स्थिति थोड़ी बदल रही लगती हैं। पढ़ते रहिये।

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