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अडानी पर अमेरिका ने ठोका 750 मिलियन डॉलर का जुर्माना, भारतीय मीडिया को मुँह खोलने की मनाही!

भारत अमेरिका के रिश्ते में अडाणी अब बकरे के रूप में आ गया है कि कब और कौन उसकी बलि देने के लिये तैयार होगा या फिर दोनों देशों के बीच तल्ख़ी तब तक बढ़ेगी जब तक ट्रम्प सत्ता में है । उधर भारतीय राजनीति में अडाणी की कांग्रेस के एक बड़े प्रभावशाली गुट से नज़दीकियाँ बढ़ रही हैं कि शायद वे काम आ सकें । राहुल को सब पता है बस अंधचमचे हैं कि इन बातों पर भरोसा नहीं करने के लिये विवश है! -रामाशंकर सिंह

न्यूयॉर्क: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर सिविल धोखाधड़ी का मामला अब आगे बढ़ सकेगा। एक प्रक्रियात्मक (प्रोसीजरल) अड़चन दूर होने के बाद अमेरिकी नियामक एजेंसी को अडानी को आधिकारिक तौर पर नोटिस देने का रास्ता मिल गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित फेडरल कोर्ट में शुक्रवार को दाखिल एक दस्तावेज में SEC और गौतम अडानी व उनके भतीजे सागर अडानी के अमेरिकी वकीलों ने बताया कि वकील SEC के कानूनी कागजात स्वीकार करने पर सहमत हो गए हैं। इससे अदालत को यह तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि अडानी परिवार को समन किस तरीके से भेजा जाए।

अगर जज निकोलस गाराउफिस इस समझौते को मंजूरी दे देते हैं, तो गौतम और सागर अडानी को SEC की शिकायत पर जवाब देने के लिए 90 दिन का समय मिलेगा। इस दौरान वे केस खारिज कराने जैसी याचिकाएं भी दाखिल कर सकते हैं।

गौतम अडानी के वकील रॉबर्ट जिउफ्रा और सागर अडानी के वकील सीन हेकर ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि नवंबर 2024 में SEC ने गौतम और सागर अडानी पर अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया था। एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने अडानी ग्रीन एनर्जी को फायदा पहुंचाने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की रिश्वत देने या देने का वादा करने की योजना बनाई थी। इस कंपनी में दोनों अडानी वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं।

दोनों आरोपी फिलहाल भारत में हैं, जिसके चलते SEC को उन्हें कानूनी नोटिस देने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से यह मामला लंबे समय तक अटका रहा।

इससे जुड़े एक आपराधिक मामले में अमेरिकी अभियोजकों ने भी नवंबर 2024 में अडानी परिवार और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन पिछले एक साल से अधिक समय से उस पर कोई सार्वजनिक प्रगति नहीं हुई है।


अमेरिकी कोर्ट ने 2021 के सोलर एनर्जी घूसखोरी मामले में भारत रतन चोर गौतम अदानी पर 750 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि बचना है तो इतना पैसा देना ही होगा। अदानी ने 230 मिलियन की घूस देने की पेशकश की थी। कोर्ट ने तीन गुना जुर्माना लगाया है। नरेंद्र मोदी की सत्ता शर्मतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन छिपाए है। उसने गोदी मीडिया के अपने चमचों से कहा है कि इस पर बात न करें। रॉयटर्स मोदी की बात नहीं मानता। इस विदेशी न्यूज एजेंसी का कहना है कि जुर्माना देने के बाद भी केस चलता रहेगा। बस, अदानी का मादुरो नहीं होगा। ठंड रख लाले। अमेरिका को तेरी कदर नहीं है। -सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार


ब्लूमबर्ग ने अडानी प्रकरण पर क्या लिखा है-

हिंडनबर्ग की परछाईं: अडानी साम्राज्य पर अमेरिका से बढ़ता कानूनी दबाव

पिछले एक साल से अडानी समूह पर एक तरह से “डैमोक्लीज की तलवार” लटकी हुई है। समूह के अरबपति संस्थापक गौतम अडानी अमेरिका में दो बड़े मामलों का सामना कर रहे हैं—एक रिश्वतखोरी और दूसरा सिक्योरिटीज फ्रॉड (प्रतिभूति धोखाधड़ी) से जुड़ा। शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि भारत सरकार, गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अमेरिकी समन (समन नोटिस) तामील होने से रोककर उन्हें कानूनी राहत दे रही है।

लेकिन अब अमेरिकी नियामक संस्था SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने ईमेल के ज़रिए नोटिस भेजकर केस को आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके बाद भारत के दूसरे सबसे अमीर उद्योगपति गौतम अडानी को अपनी कानूनी रणनीति तेज करनी पड़ी है। अडानी ने बचाव के लिए एक नामी वॉल स्ट्रीट वकील को चुना है, जिनके क्लाइंट्स में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं।

दरअसल, नवंबर 2024 में अमेरिका में अडानी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे। यह वही समय था जब अडानी समूह हिंडनबर्ग रिसर्च की एक तीखी रिपोर्ट से उबरने की कोशिश कर रहा था। उस रिपोर्ट में समूह पर शेयरों में हेराफेरी, अकाउंटिंग फ्रॉड और कॉरपोरेट गवर्नेंस की खामियों जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

भारत में हालांकि ये आरोप ज्यादा असर नहीं डाल सके। सुप्रीम कोर्ट और सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की जांचों में अडानी समूह और परिवार को तेज़ी से क्लीन चिट मिल गई। कुछ जांचें भले अब भी चल रही हों, लेकिन उनसे किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं जताई जा रही।

इसके उलट अमेरिका के मामले कहीं ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं, क्योंकि वहां भारी जुर्माना और जेल तक की सजा का खतरा है। इन्हीं मामलों के चलते गौतम अडानी पिछले काफी समय से अमेरिका नहीं जा सके हैं, जबकि उन्होंने ट्रंप की चुनावी जीत पर खुशी जताई थी और अमेरिका में निवेश के वादे भी किए थे। हाल के महीनों में ये केस भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के तनाव से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।

हिंडनबर्ग रिसर्च भले अब बंद हो चुकी हो, लेकिन उसने जो कानूनी भूचाल पैदा किया था, उसकी गूंज अब भी अडानी समूह का पीछा कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि इन सब विवादों के बावजूद अडानी समूह का कारोबार सामान्य तौर पर चलता रहा है। हां, एक बड़ा बदलाव जरूर दिख रहा है—पहले समूह विदेशी बाजार से ज्यादा कर्ज ले रहा था, अब वह फिर से घरेलू बैंकों पर ज्यादा निर्भर हो रहा है। यानी “होम ग्राउंड” को ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।

अडानी समूह ने हमेशा की तरह सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि कंपनी और संस्थापक परिवार के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। लेकिन अमेरिका में चल रहे केस यह तय करेंगे कि हिंडनबर्ग की परछाईं अडानी साम्राज्य पर कब तक बनी रहती है।

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