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सियासत

मोदी राज में अडानी की ताकत जानना चाहते हैं तो यह पढ़िए!

गिरीश मालवीय-

जिस व्यक्ति ने बतौर डीएम लालू यादव के कहने पर 1990 में समस्तीपुर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया ओर उसके बावजूद जब 1999 में केंद्र में अटल सरकार में आडवाणी गृह मंत्री बने तो उन्होंने उस व्यक्ति को गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया

ऐसे प्रमोशन के बाद भी जनवरी 2013 में उस व्यक्ति ने केंद्रीय गृह सचिव रहते हुए यह बयान दिया था कि समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद और अजमेर दरगाह शरीफ विस्फोटों की जाँच के दौरान पता चला है कि इन आतंकी हमलों में कथित रूप से शामिल कम से कम दस व्यक्तियों के आरएसएस या उसके संबद्ध संगठनों से रिश्ते रहे हैं।

उसके बावजूद भी उन्हें बीजेपी से टिकट दिया गया वे जीते और 2017 में मोदी ने उन्हें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री बनाया। 2019 में चुनाव जीतने पर उन्हें फिर से देश का ऊर्जा मंत्री बनाया गया इस बार तो वे कैबिनेट मिनिस्टर बने।

लेकिन 2025 में जब उनके सितारे गर्दिश में आए और उन्होंने अडानी को निशाने पर लेते हुए 4 नवंबर को अडानी ओर बिहार सरकार के बीच हुए बिजली समझौते को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया तो बिहार चुनाव खत्म होते ही उन्हें दूध में से मक्खी की तरह से बाहर निकाल दिया गया …..

यहां तक आप समझ ही गए होंगे कि हम बिहार से आने वाले आर के सिंह की बात कर रहे हैं। यानी सब कुछ चलेगा लेकिन अडानी की पोल पट्टी खोली तो एक दिन भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


मनीष शर्मा-

भाजपा के कद्दावर नेता और मोदी सरकार में 8 सालों तक केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने एक गुनाह किया था,

गुनाह था, प्रधानमंत्री के मालिक से जुड़े भ्रष्टाचार के बारे में आवाज उठाने का…चुनाव खत्म होते ही उन्हें निष्काषित कर दिया गया है।

अडानी ही देश है? अब तो साबित हो चुका है।


अजीत सिंह राठी-

भाजपा की सेंट्रल लीडरशिप ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को सस्पेंड कर दिया है। एक सप्ताह में जवाब मांगा है कि क्यों न आपको पार्टी से निष्कासित कर दिया जाय? बताया जा रहा है कि उन्होंने अड़ानी को लेकर सवाल खड़े किए थे।

आरके सिंह बिहार की आरा सीट से सांसद रहे है और पूर्व में केंद्रीय गृह सचिव रहे है। नौकरशाह से राजनेता बने सिंह के जवाब पर सबकी नज़रे टिकी है।


मोदी राज में अडानी की ताकत जानना चाहते हैं?

जिस आदमी ने 1990 में
समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया…

उसी को 1999 में
आडवाणी ने ही गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया।

2013 में उसी अफ़सर ने बतौर गृह सचिव कहा—
“समझौता, मक्का मस्जिद, अजमेर—
कम से कम 10 आरोपी RSS लिंक वाले मिले।”

इसके बाद भी BJP ने टिकट दिया…
वो जीते…
2017 में ऊर्जा मंत्री…
2019 में कैबिनेट मंत्री।

लेकिन 2025 में—
जैसे ही उन्होंने 4 नवंबर को
अडानी–बिहार बिजली समझौते को देश का सबसे बड़ा घोटाला कहा…

चुनाव खत्म होते ही
उन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंक दिया गया।

ये कहानी है आर.के. सिंह की।

मतलब साफ़:
देश में सब चलेगा…
बस अडानी की पोल मत खोलना।

-अपूर्व भारद्वाज

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