भारतीय बंदरगाहों से लेकर उर्जा कारोबार तक झंडा गाड़ने के बाद गौतम अडानी की नजरें अब देश के डिफेंस सेक्टर पर टिक गई हैं. अडानी ग्रुप डिफेंस सेक्टर में बड़ा धमाका करने की तैयारी में जुट गया है.
ग्रुप की कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, भारतीय वायु सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले रूद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टरों के लिए 70 एमएम रॉकेट बनाएगी. कंपनी ने इसके लिए शुक्रवार 28 जून 2024 को फ्रांस के थेल्स ग्रुप के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

बता दें कि दोनों ग्रुपों के बीच यह पार्टनरशिप मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत हुई बताई जा रही है.
क्या है रूद्र और प्रचंड का महत्व?
प्रचंड दुनिया का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने के साथ लैंडिंग कर सकता है. इतना ही नहीं प्रचंड भारी मात्रा में हथियार और ईंधन भी ले जा सकता है.
वहीं, रूद्र उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर ध्रुव का ज्यादा हथियारों से लैस वर्जन है. रूद्र टोही मिसनों और सैन्य अवलोकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसे सैन्य परिवहन, टैंक रोधी और नजदीकी हवाई सहायता के लिए भी तैनात किया जाता है.
अडानी समूह को लेकर दूसरी बड़ा और महत्वपूर्ण समाचार ये है कि समूह ने चीन से करीब 30 इंजीनियरों को लाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मांगी है. ये इंजीनियर बुनियादी ढांचे से खनन समूह के लिए सौर उपकरणों की एक मजबूत और स्वदेशी आपूर्ति श्रंखला बनाने में मदद कर सकते हैं.
कंपनी ने अपने प्रस्तुतीकरण में आठ विदेशी साझेदारों का उल्लेख किया है. ये सभी चीन से जो मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) और आपूर्ति श्रंखला विक्रेता बताए गए हैं.
अब जब प्रधानमंत्री मोदी चीन को लाल आंखें दिखाकर डरा ही चुके हैं तो जाहिर सी बात है इन तीस चीनी इंजीनियरों की नियुक्ति का आदेश जल्द ही अडानी समूह के लिए जारी किया जा सकता है.
वैसे भी सरकार के पास अडानी और अपनी कुर्सी सलामत रखने के अलावा दूसरा कोई काम भी तो नहीं है.



