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कोयला नीति पर सुप्रीम कोर्ट में अदाणी की पैरवी कर रही मोदी सरकार!

शीतल पी सिंह-

अदाणी समूह को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक ताक़तवर साथी मिल गया है — मोदी सरकार खुद। अदालत में ऐसा गठबंधन बना है जिसमें नियामक और उद्योग के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। केंद्र का पर्यावरण मंत्रालय अदाणी पावर और NTPC के साथ मिलकर NGT को चुनौती दे रहा है। इन सबका साझा मक़सद है उस 2020 की कोयला नीति का बचाव करना, जिसे व्यापारिक सुविधा को स्वच्छ हवा पर तरजीह देने के कारण रद्द कर दिया गया था।

अब सरकार और भारत की सबसे बड़ी बिजली कंपनियाँ कंधे से कंधा मिलाकर इस नीति को वापस लाने के लिए लड़ रही हैं।

मोदी सरकार अदाणी पावर और अन्य थर्मल पावर कंपनियों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में इस विवादित नीति का बचाव कर रही है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने अप्रैल 2025 में इसे रद्द कर दिया और कहा कि पर्यावरणीय सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, व्यापारिक सुविधा नहीं। लेकिन सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील करते हुए पर्यावरण मंत्रालय को भी अदाणी और अन्य कंपनियों के साथ कोर्ट में उतार दिया, जहाँ मंत्रालय और उद्योगों ने लगभग एक जैसी दलीलें दीं कि यह नीति ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है और इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय पहले से मौजूद हैं।

आलोचकों का कहना है कि मंत्रालय उद्योगों के साथ हाथ मिला रहा है और पर्यावरणीय नियमों को कमजोर कर रहा है। इस मामले का अंतिम फैसला भारत में पर्यावरणीय शासन और औद्योगिक नियमन की दिशा तय करेगा।

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