गिरीश मालवीय-
उपर दिए गए चार्ट में उत्तर भारत की एक बड़ी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट का नाम नहीं है जिस पर ₹57,185 करोड़ का कर्ज था और अडानी ने मात्र 14,500 करोड़ रुपये देकर हथिया लिया.
यानी कि अब टोटल हुआ 1 लाख 19 हजार 17 करोड़ की संपत्तियां जिसे मात्र 30 हजार 497 सौ करोड़ में अडानी के हवाले कर दिया गया. शायद पूंजीवाद के इतिहास में ये क्रोनी केपेटिलिज़्म का सबसे बड़ा उदाहरण है.
शीतल पी सिंह-
देखिए कैसे सरकार-नियंत्रित बैंकों के बड़े-बड़े बकाया छोड़ जाने वाली डूबती कंपनियाँ सरकार की कृपा से औने-पौने दाम पर अडानी उद्योग समूह के हाथों चली जाती हैं।
लाल रंग में दिखाए गए आंकड़े यह बताते हैं कि बैंकों को अपने ही दिए गए हजारों करोड़ का कितना बड़ा हिस्सा ‘नॉन-रिकवरी’ के रूप में गंवाना पड़ता है।
और यह पैसा किसका है? हम सबका- आम जनता का, जो बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई जमा करती है।
फिर वही बैंक हमसे हर छोटी-बड़ी सेवा के नाम पर भारी शुल्क वसूलते हैं- क्योंकि सिस्टम में जो घाटा हो चुका है, उसकी भरपाई आखिर जनता की जेब से ही होती है।
इसी बीच अडानी उद्योग-समूह की एसेट वैल्यू इन डूबती कंपनियों को बेहद कम कीमत पर खरीदकर और मोटी होती जा रही है ।
बाक़ी सब तो समझ ही रहे हैं… और हाँ, इस तरह की बातों पर ‘भाड़े के और मुसलमानों से नफ़रत में पल रहे इनके मुखर समर्थक’ भौंकने काटने आते ही होंगे !
यशवंत सिंह-
सोशल मीडिया पर कांग्रेस आईटी सेल द्वारा जारी बताया जा रहा एक पोस्टर तेज़ी से वायरल है, जिसमें दावा किया गया है कि दिवालिया हो चुकी कई बड़ी कंपनियों को अडानी समूह ने बेहद कम कीमत पर हासिल किया, जबकि बैंकिंग सिस्टम को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पोस्टर में आंकड़े दिखाते हैं कि कैसे “जब जनता हारती है, अडानी ग्रुप जीतता है”—और इसी के चलते केंद्र सरकार और अडानी समूह पर “विशेष मेहरबानी” के नए आरोपों ने तूल पकड़ लिया है।
पोस्टर में क्या दिखाया गया है?
पोस्टर के मुताबिक, कुल ₹61,832 करोड़ के कर्ज वाली 10 कंपनियाँ NCLT प्रक्रिया के बाद अडानी समूह द्वारा मात्र ₹15,997 करोड़ में खरीदी गईं।
यानी बैंकों को औसतन 74% का घाटा हुआ।
कुछ प्रमुख उदाहरण:
► HDIL (BKC प्रोजेक्ट)
कर्ज: ₹7,795 करोड़ निपटान: ₹285 करोड़ नुकसान: 96%
► Radius Estates & Developers
कर्ज: ₹1,700 करोड़ निपटान: ₹76 करोड़ नुकसान: 96%
► Essar Power (MP Ltd)
कर्ज: ₹12,013 करोड़ निपटान: ₹2,500 करोड़ नुकसान: 79%
► Lanco Amarkantak Power
कर्ज: ₹15,190 करोड़ निपटान: ₹4,101 करोड़ नुकसान: 73%
► Coastal Energen Ltd
कर्ज: ₹12,300 करोड़ निपटान: ₹3,500 करोड़ नुकसान: 72%
कुल आंकड़े:
कर्ज: ₹61,832 करोड़ अदानी द्वारा चुकाया: ₹15,997 करोड़ बैंकों का नुकसान: लगभग ₹46,000 करोड़
कांग्रेस आईटी सेल का आरोप- “ये खेला है भाई!”
पोस्टर का दावा है कि-
दिवालिया कंपनियों को कौड़ियों के दाम में अडानी को सौंपा गया सरकार ने NCLT और बैंकिंग तंत्र का इस्तेमाल “कुछ खास दोस्तों” को लाभ पहुंचाने के लिए किया जनता का पैसा डूबा, लेकिन लाभ चुनिंदा समूहों को मिला
यही वजह है कि पोस्टर को राजनीतिक हलकों में “मोदी-अडानी मॉडल” पर नया हमला माना जा रहा है।
सरकार और अडानी समूह का रुख
सरकार और अडानी समूह पहले भी ऐसे आरोपों को पूरी तरह नकार चुके हैं।
उनका कहना है-
यह सब कानूनी NCLT प्रक्रिया का हिस्सा है बोली प्रक्रिया पारदर्शी होती है बैंकों का नुकसान पुराने मालिकों के कारण, खरीदारों के कारण नहीं खरीदार वही बनता है जो सबसे ऊंची बोली लगे
लेकिन विपक्ष का मत है कि प्रक्रिया “कागज़ पर पारदर्शी” दिखती है, जबकि वास्तविक लाभ “कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट्स” को मिलता है।
वायरल पोस्टर ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
चुनावी माहौल में यह वायरल पोस्टर भाजपा और कांग्रेस के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है।
एक तरफ विपक्ष इसे “जनधन लूट” बता रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा समर्थक इसे “भ्रामक और आधा सच” कह रहे हैं।


