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सियासत

अडानी समूह पत्रकारों पर मुक़दमों का प्रेशर डालकर ‘चुप’ कराने की कोशिश कर रहा है: RSF

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था का कहना है कि अरबपति कारोबारी गौतम अडानी के नेतृत्व वाला यह कॉरपोरेट समूह बीते कई वर्षों से खोजी पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ़ ‘कानूनी युद्ध’ छेड़े हुए है, जिससे भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

आरएसएफ के मुताबिक, अडानी समूह पत्रकारों पर लंबे, महंगे और डर पैदा करने वाले मानहानि मुक़दमे दायर कर रहा है, ताकि कानूनी दबाव के ज़रिये आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को रोका जा सके। संस्था ने इसे SLAPP (Strategic Lawsuits Against Public Participation) की श्रेणी में रखते हुए कहा है कि ऐसे मुक़दमों का असली मक़सद न्याय नहीं, बल्कि पत्रकारों को मानसिक और आर्थिक रूप से थका देना है।

2017 से लगातार ‘कानूनी हमला’

आरएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक अडानी समूह ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ़ अभूतपूर्व संख्या में दीवानी और आपराधिक मानहानि मुक़दमे दर्ज कराए हैं। इन मामलों में कम से कम 15 पत्रकारों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है।

संस्था का दावा है कि अब तक किसी भी मुक़दमे में किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान को दोषी ठहराया नहीं गया है। इसके बावजूद, कम से कम चार मामलों में अदालतों ने अंतरिम रोक (गैग ऑर्डर) लगा दी, जिससे संबंधित पत्रकारों को अस्थायी रूप से रिपोर्टिंग रोकनी पड़ी — बिना किसी अंतिम फैसले के।

आरएसएफ का कहना है कि इस समय भी कम से कम नौ पत्रकार अलग-अलग मुक़दमों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें परंजॉय गुहा ठाकुरता (7 मामले), अबीर दासगुप्ता (4 मामले) और रवि नायर (2 मामले) जैसे वरिष्ठ और स्वतंत्र पत्रकार शामिल हैं।

‘कानूनी प्रक्रिया ही सज़ा बन रही है’

आरएसएफ की साउथ एशिया डेस्क प्रमुख सेलिया मर्सिए ने कहा,

“अडानी समूह द्वारा खोजी पत्रकारों पर बार-बार मुक़दमे दायर करना भारत में मीडिया की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है। यह रणनीति बड़े कॉरपोरेट समूहों की जांच को हतोत्साहित करती है, जहां अक्सर कानूनी प्रक्रिया ही सज़ा बन जाती है।”

उन्होंने भारतीय अधिकारियों से अपील की कि न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को रोका जाए और पत्रकारों की आवाज़ दबाने की कोशिशों पर सख़्त कार्रवाई की जाए।

संसद से SLAPP क़ानून की मांग

आरएसएफ ने भारतीय संसद से मांग की है कि SLAPP मुक़दमों के खिलाफ़ एक स्पष्ट और सख़्त क़ानून बनाया जाए, ताकि ताक़तवर कॉरपोरेट समूहों द्वारा पत्रकारों को डराने की रणनीति पर रोक लग सके।

संस्था का कहना है कि मौजूदा हालात में ऐसा क़ानून पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है, क्योंकि भारत में कानूनी मुक़दमे अब प्रेस पर दबाव बनाने का औज़ार बनते जा रहे हैं।

कई मीडिया संस्थान निशाने पर

आरएसएफ की रिपोर्ट में द वायर, ईपीडब्ल्यू, न्यूज़क्लिक, न्यूज़लॉन्ड्री, द इकोनॉमिक टाइम्स जैसे संस्थानों और रवि नायर, अभिसार शर्मा, रवीश कुमार, परंजॉय गुहा ठाकुरता जैसे पत्रकारों से जुड़े मामलों का ज़िक्र किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में एक ही रिपोर्ट या लेख को लेकर दीवानी और आपराधिक — दोनों तरह के मुक़दमे दायर किए गए।

आरएसएफ का कहना है कि इस पूरे मामले पर अडानी समूह ने संस्था के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है। संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे मुक़दमों पर रोक नहीं लगी, तो भारत में स्वतंत्र पत्रकारिता और कॉरपोरेट जवाबदेही दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।


अगर आप पत्रकार हैं और मोदी के दोस्त अडानी के खिलाफ लिखते हैं- तो आपकी खैर नहीं।

आपके ऊपर मुकदमा हो सकता है।

जी हां…
‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया 

● अडानी 2017 से पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर महंगे और लंबे चलने वाले मुकदमे ठोक रहा है

● जिससे पत्रकार डर जाएं और अडानी के काले चिट्ठों का भंडाफोड़ करना बंद कर दें

मोदी सरकार में अडानी न सिर्फ देश लूट रहा है, बल्कि सच दिखाने वालों को अपने हिसाब से ‘सजा’ भी दे रहा है।

नरेंद्र मोदी की बदौलत Press Freedom Index में भारत 151वें नंबर पर है- जहां सच लिखने, दिखाने, बोलने और सोचने की आजादी छीन ली गई है।

शर्म आनी चाहिए।

-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

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