कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी की भारत यात्रा से कुछ दिन पहले गौतम अडानी की कंपनी और कतर की कंपनी ने एक नया संयुक्त उद्यम (JV) स्थापित किया। यह सौदा अडानी के समुद्री कारोबार को खाड़ी क्षेत्र में और मजबूत करेगा। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब अडानी को दक्षिण एशिया में कुछ झटके लगे हैं और पश्चिमी देशों में उनकी छवि को लेकर सवाल उठे हैं।
कतर में अडानी का नया सौदा

अंग्रेजी वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री में प्रकाशित निरुपमा सुब्रमण्यम के लेख के अनुसार, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) की सहायक कंपनी अडानी हार्बर सर्विसेज ने कतर की कंपनी सी होराइजन ऑफशोर मरीन सर्विसेज और जमाल ए रब एएम अल याफई नामक व्यक्ति के साथ मिलकर अल अन्नाबी मरीन सर्विसेज नाम की कंपनी बनाई है।
यह कंपनी जहाजों के संचालन और प्रबंधन का व्यवसाय करेगी, जिसमें अडानी की हिस्सेदारी 49% है। यह सौदा 12 फरवरी को हुआ, जो अमीर की भारत यात्रा से ठीक 5 दिन पहले था।
इस घोषणा के बाद, 13 फरवरी को अडानी पोर्ट्स के शेयरों में थोड़ी बढ़त भी देखी गई।
अडानी पहले से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद
अडानी समूह पहले से ही दुबई में एस्ट्रो ऑफशोर नाम की कंपनी के जरिए समुद्री व्यापार में मौजूद है।
इज़राइल में भी अडानी पोर्ट्स की उपस्थिति है, जहां वह हाइफा पोर्ट का संचालन करता है।
मोदी का ‘विशेष मित्र’ के लिए विशेष स्वागत
17 फरवरी को जब कतर के अमीर भारत पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद हवाई अड्डे पर उन्हें लेने पहुंचे। आमतौर पर, यह सम्मान सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति (बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप), जापान के प्रधानमंत्री (शिंजो आबे) और यूएई के राष्ट्रपति को मिला है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस स्वागत को “एक विशेष मित्र के लिए विशेष इशारा” बताया।
भारत-कतर के रिश्ते और अडानी की भूमिका
भारत और कतर के बीच $15 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसमें ज्यादातर कतर से LPG और LNG गैस का आयात शामिल है।
अमीर की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने का समझौता हुआ।
अडानी के लिए क्यों अहम है कतर?
- बांग्लादेश और श्रीलंका में झटके –
बांग्लादेश में अडानी का बिजली सौदा विवादों में आ गया था।
श्रीलंका में अडानी को सोलर फार्म प्रोजेक्ट से हटना पड़ा।
- अमेरिका में कानूनी चुनौतियां –
अडानी पर विदेशी भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनों के तहत मामला चल रहा था, जो फिलहाल लटका हुआ है।
- हिंडनबर्ग रिपोर्ट का असर –

2023 में आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी के शेयर गिर गए थे, लेकिन कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) ने 4,300 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे अडानी को मदद मिली।
भारतीय नौसेना और कतर के रिश्तों में गिरावट
अमीर की यह यात्रा ऐसे समय पर हुई जब कतर ने 8 पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों को 18 महीने तक हिरासत में रखा था। इनमें से 7 को रिहा कर दिया गया, लेकिन कमोडोर पुर्णेंदु तिवारी अभी भी कतर में कैद हैं।
एक समय भारत-कतर के रक्षा संबंध मजबूत थे, लेकिन 2023 में रक्षा सहयोग समझौता खत्म हो गया, और पिछले तीन सालों से कोई साझा सैन्य अभ्यास नहीं हुआ है।
ये भी पढ़ें-


