आवेश तिवारी-
देश में अगर सत्य कुछ है तो वो “अडानी” है. बाकी सब धोखा है। केंद्र की सरकार नीतीश और नायडू के समर्थन से चल रही है लेकिन यह भी सच है यह दोनों नेता बदस्तूर ब्लैकमेलिंग का शिकार हैं और केंद्र में गौतम अडानी और उसकी अथाह संपदा है। चलिए समझते हैं कि किस तरह से अडानी का पूरा खेल फल फूल रहा है।
आपको याद होगा कि अमेरिकी जांच एजेंसियों ने अडानी पर आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश में 7 हजार मेगावाट बिजली खरीदने का समझौता हासिल करने के लिए ₹1,750 करोड़ की रिश्वत दी थी। एजेंसियों के अनुसार रिश्वत के बाद समझौता कर लिया गया।
अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार को अडानी पावर को करोड़ों रुपये का भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसके लिए पिछली सरकार के दौरान सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के मार्फत अडानी के साथ बिजली खरीद समझौता किया गया था।
विपक्ष में रहते हुए, नायडू की तेलुगु देशम पार्टी ने भ्रष्टाचार का जोरदार आरोप लगाते हुए कहा था कि जगन सरकार द्वारा अडानी पावर के साथ किए गए दीर्घकालिक समझौतों से अगले 20-25 वर्षों में आंध्र प्रदेश पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया था कि ये अनुबंध राज्य के लिए आर्थिक रूप से हानिकारक थे।
बात यहीं खत्म नहीं होती सत्ता में आने के बाद भी, नायडू ने 1 जनवरी, 2025 को पत्रकारों से कहा कि अमेरिकी अदालत में एसईसीआई समझौतों से संबंधित कथित अनियमितताओं के मामले में जगन लड्डू की तरह पकड़े गए थे और उन्होंने पूरी जांच का आश्वासन दिया।
हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस सौदे के संबंध में जगन या अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नायडू सरकार ने न तो अमेरिकी अदालत में जगन के खिलाफ मामला आगे बढ़ाया और न ही अडानी के साथ समझौते को समाप्त करने का कोई निर्णय लिया, जबकि वह जानती थी कि राज्य पर भारी बोझ पड़ रहा है। अब आप समझ रहे हों आंध्र प्रदेश को मिलने वाली केंद्रीय मदद, आंध्र की जनता का टैक्स राज्य का राजस्व कहां जा रहा।


