अजीत अंजुम-
कोटद्वार के ASP मेरे सवालों से क्यों चिढ़े? बजरंग दल के लफंगों पर कार्रवाई के सवाल पर क्या बोले ASP? मैंने जब बजरंग दल के हुड़दंगी कार्यकर्ताओं के वीडियो दिखाकर सवाल किए तो क्यों नाराज़ हो गए ASP?
दीपक कुमार पर FIR के सवाल पर क्यों हुए असहज? ASP से पूछे जा रहे सवालों का जवाब देने क्यों आ गए CO और SHO?
अशरफ हुसैन-
ये होती है पत्रकारिता… दीपक कुमार और बजरंग दल के मामले में पत्रकार ajit anjum ने पुलिस से सवाल पूछे तो पुलिस उल्टा पूछ रही कि आपका नाम क्या है, आपका चैनल कौनसा है। जबकि अजीत अंजुम देश के जाने माने पत्रकार हैं। यहाँ तक पुलिस अजीत अंजुम के सवालों से बचती हुई दिख रही है।
जानते ये लोग भी थे लेकिन ये एक तरीका होता है जताने का आपको हम नहीं पहचानते. हालांकि जब ASP साहब खिन्न हो रहे थे तो बगल में बैठे CO साहब उनका हाथ दबा रहे थे, शांत कर रहे थे. मेरा इंटरव्यू शुरु होते ही कुछ ही सेकंड बाद एक पुलिस वाला उन्हें बुलाकर बाहर ले गया, यही बताने के लिए ये आदमी थोड़ा अलग है. ठीक से बात कीजिएगा. -अजीत अंजुम
अभिषेक आनंद-
आज, भारत के 99.9% पत्रकार, पुलिस अधिकारी से ऐसे सवाल नहीं करते। पुलिस जो बोलती है चुपचाप सुन लेते हैं, रिकॉर्ड कर लेते हैं… पूछते भी हैं तो इतना- आगे क्या हुआ, पीछे क्या हुआ?
लेकिन अजीत अंजुम जी ने एक के बाद दर्जन भर सवाल पूछ लिया। अफसर असहज तो होगा ही।
मो. आजम-
उत्तराखंड के पुलिस अफसर पत्रकार ajitanjum के सवालों से भाग रहे हैं। जवाब नहीं दे रहे हैं। उल्टे अजित अंजुम से पूछ रहे हैं कि आप कौन हैं? कौन सा चैनल से हैं! लेकिन अजित अंजुम साहब की बेबाकी को सलाम है!
उन्होंने संविधान के बजाय ‘ऊपरी’ आदेश से चलने वाले पुलिस अफसरों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है।
आवेश तिवारी-
सच यह है कि पौड़ी पुलिस गहरे दबाव में है। यह दबाव मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का भी हो सकता है या फिर गृहमंत्री अमित शाह जी का भी।
बजरंग दल के गुंडों के खिलाफ कार्रवाई न करके दीपक और विजय के खिलाफ एफआईआर करना उत्तराखंड पुलिस की वर्दी को दागदार करता है। बेहद शानदार रिपोर्ट अजीत भईया की


