कानपुर- यूपी के कानपुर में साकेत नगर स्थित ऑलीशान प्लॉट में एक ऐसा दरबार चलता था, जहां कानून की किताब से ज़्यादा असर मेज़ पर रखी सुरा की बोतल और कुर्सी पर बैठे वकील के इशारे का होता था। नाम है अखिलेश दुबे—चर्चित वकील, एबीसी न्यूज़ चैनल के मालिक और वो शख्स, जिसके ‘साकेत दरबार’ में पुलिस अफसरों के लिए सुर (लड़की) और सुरा (दारू), दोनों का इंतजाम रहता था।
2002 से 2021 के बीच का वो दौर… शहर में कप्तान से लेकर थानेदार तक दरबार में पेशी भरते थे। वर्दीधारी सलामी ठोकते, चाय-कॉफी के साथ पैग भी सजता, और फिर वहीं तय होता कि किस सिपाही को लाइन हाज़िर करना है, किसके गुनाह को ‘माफी’ में बदलना है।
इस बहुचर्चित हो चुके अखिलेश दुबे कांड में नित नए खुलासे हो रहे हैं। एसआईटी ने सात दागी पुलिसवालों की फाइल तैयार की है जो दुबे की दारू पीकर उसके लिए अवैध कार्य करते थे। इनमें आईपीएस-पीपीएस, दरोगा और पुलिसवाले शामिल हैं। कार्रवाई के लिए लखनऊ रिपोर्ट भेजी जाएगी।
सफेद कपड़ों में कप्तान और ताकतवर दरबार

रिपोर्ट बताती है कि उस समय के कप्तान सफेद कपड़े पहनकर दरबार में पहुंचते थे, और अखिलेश दुबे के साथ मिलकर व्यवस्था चलाते थे। दरबार की ताकत इतनी थी कि पुलिस लाइन से लेकर थानों तक अफसर सीधे-सीधे दरबार के रुख के हिसाब से फैसले लेते थे।
पुलिस के लिए महफ़िल, वकील के लिए रसूख
सुर की महफ़िल और सुरा की मेज़—यही था वो फॉर्मूला, जिससे खाकी भी खुश, वकील भी मालामाल। थानों से लेकर पुलिस लाइन तक दरबार की पकड़ इतनी थी कि बिना इजाज़त पत्ता भी नहीं हिलता था।
कमिश्नरेट आने तक खेल जारी
कानपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू (25 मार्च 2021) होने तक ये दरबार चलता रहा। आज फाइलें खुलीं तो पुराने किस्से फिर चर्चा में आ गए—और साथ ही उभर आया वो नाम, जो कभी वकील था, चैनल मालिक बना और जिसके दरबार में वर्दी से ज़्यादा बोतल का रंग चलता था।

खबरों के मुताबिक, इस ‘दरबार’ में पुलिसवालों की पेशियां लगती थीं, वर्दीधारी अफसर से लेकर सिपाही तक सलामी बजाने आते थे और वहीं पर पेन से सज़ा लिख दी जाती थी। मज़ेदार यह कि कई बड़े अपराध भी दरबार के आदेश से ‘माफ़’ हो जाते थे।
भड़ास के हाथ लगी 21 मिनट से ज्यादा अवधी का एक ऑडियो, जिसमें अखिलेश दुबे (Akhilesh Dubey) एक अधिवक्ता से बातचीत करता सुनाई दे रहा है। वह इंस्पेक्टर काकादेव और एक अन्य थानेदार को लेकर रुपया लेने की बातचीत कर रहा है। साथ ही उस वक्त के पुलिस कप्तान की भी बात हो रही है। हालांकि हम इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करते। आप सुनिए…
यह वीडियो भी देखिए जिसमें वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय और नंद किशोर गुर्जर की बात हो रही है। सुनिए गुर्जर अखिलेश को क्यों मगरमच्छ कह रहे हैं…..
अवनीश दीक्षित मामले में क्या चल रहा है?… पढ़ें….

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