कानपुर। कानपुर के चर्चित अधिवक्ता और एबीसी न्यूज चैनल के मालिक अखिलेश दुबे के खिलाफ दर्ज 52 शिकायतों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIIT) पर सवाल उठने लगे हैं। दो महीने से जांच चल रही है, लेकिन अब तक एक भी FIR दर्ज नहीं की गई।
जांच में देरी और अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में डाल दिया है। शिकायतों में जमीन और संपत्ति के फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी, और दबंगई से कब्जे जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
5 मुकदमों में 31 नामजद, कोई गिरफ्तारी नहीं
अब तक पांच मुकदमों में 31 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें अखिलेश दुबे भी प्रमुख आरोपी हैं। हालांकि, 12 सितंबर के बाद से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई। जांच एजेंसियां लगातार रिपोर्ट तैयार कर रही हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नए कमिश्नर ने 29 शिकायतों की जांच के दिए थे निर्देश
कानपुर के नए पुलिस कमिश्नर ने हाल ही में 29 शिकायतों की जांच तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एसआईटी के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। अधिकारियों के अनुसार, फाइलें दफ्तरों में लंबित हैं और जांच “प्रारंभिक रिपोर्ट” तक सीमित है।
‘ऑपरेशन महाकाल’ पर भी ब्रेक
जमीन और संपत्ति के अवैध कारोबार से जुड़ा चर्चित ‘ऑपरेशन महाकाल’, जिसके तहत कई विवादित मामलों की जांच की जा रही थी, अब ठंडे बस्ते में चला गया है। 400 से अधिक शिकायतों में से अब तक किसी पर भी निर्णायक कदम नहीं उठाया गया है।
केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार की चुप्पी
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक इस मामले में न तो कोई राजनीतिक निर्देश आया है और न ही केंद्रीय एजेंसियों ने सक्रियता दिखाई है। यहां तक कि बीजेपी से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इस पर चुप्पी साध ली है।
हाईकोर्ट में लंबित हैं याचिकाएं
अखिलेश दुबे ने कुछ मामलों में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे जांच प्रक्रिया फिलहाल धीमी पड़ गई है। जानकारी के मुताबिक, कुछ मामलों में उन्हें अंतरिम राहत भी मिल चुकी है।
जनता में असंतोष
पीड़ित निवेशकों का कहना है कि उन्होंने दो महीने पहले शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें अब तक न तो कोई कार्रवाई रिपोर्ट मिली है और न ही जांच अधिकारी संपर्क में आए हैं।
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