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अक्षय शेलके ने भी लल्लनटॉप छोड़कर इंडियन एक्सप्रेस का दामन थामा

नई दिल्ली। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म The Lallantop से कुछ समय पहले अलग हुए पत्रकार अक्षय शेलके ने अब नई पारी शुरू कर दी है। अक्षय शेलके ने The Indian Express के हिंदी उपक्रम के साथ जुड़ाव कर लिया है।

बताया जा रहा है कि वे इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी प्लेटफॉर्म की टीम का हिस्सा बने हैं। इससे पहले लल्लनटॉप से जुड़े एक और पत्रकार रजत सैन भी इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी संस्थान के साथ अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं।

मीडिया जगत में इसे लल्लनटॉप से इंडियन एक्सप्रेस की ओर हो रहे ट्रांजिशन के रूप में भी देखा जा रहा है। अक्षय शेलके डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे हैं और लल्लनटॉप में अपने काम के चलते अच्छी पहचान बना चुके हैं।

अब इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी प्लेटफॉर्म के साथ उनकी नई भूमिका को लेकर मीडिया सर्किल में चर्चा भी शुरू हो गई है।


चाय इश्क और राजनीति नामक एक्स हैंडल का ट्वीट पढ़ें-

इंडियन एक्सप्रेस का “रिश्ता वही, सोच नई” वाला नया लल्लनटॉप

साल 2010 में जब स्टार ने अपना नीला रंग छोड़कर करीब लाल रंग सा एक स्टार का लोगो लॉन्च किया जो तारे जैसा था, तो दर्शकों में किसी तरह का संदेह न पैदा हो इसलिए उन्होंने एक टैगलाइन दी – “रिश्ता वही, सोच नई”। यह टैगलाइन स्टार प्लस की थी।

लेकिन अभी मुझे लग रहा है कि यह लाइन लल्लनटॉप के संस्थापक सौरभ द्विवेदी पर सही बैठती है। उनके द्वारा बनाया गया वो घर, वो एक सुप्रसिद्ध विख्यात चैनल लल्लनटॉप जिसे उन्हें छोड़ना पड़ा। उसके बाद उन्होंने एक नया संस्थान – लेकिन भारतीय पत्रकारिता का पुराना संस्थान इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े। तब भी लोगों को लग रहा था कि यह किस प्रकार से आगे बढ़ेंगे।

लेकिन तभी एक बात जो मेरे जहन में आई थी और जो लगभग सही साबित हो रही है – सौरभ द्विवेदी वही घर लेकर जा रहे हैं जो उन्होंने बनाया था, बस वो दूसरे शहर में बदल रहे हैं। लगभग जो मुख्य टीम है, वो सौरभ द्विवेदी के साथ जाकर इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ रही है।

अब लल्लनटॉप के साथी जिन्होंने कुछ समय पहले लल्लनटॉप छोड़ा था, अक्षय शेलके ने भी अब इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी संस्थान के लिए इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ लिया है। इससे पहले रजत सैन ने भी यही कदम उठाया था।

इसके अलावा अगर आपको और जानकारी दी जाए तो खबर गांव में काफी लोग जो लल्लनटॉप से खबर गांव में गए थे, उन्हें भी इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ना है। उन्होंने अपने इस्तीफे भी दिए लेकिन वो स्वीकार नहीं हुए। बता दें कि वो लल्लनटॉप के जाने-माने चेहरे हुआ करते थे और लल्लनटॉप में उन्होंने अच्छा काम किया था।

इसके अलावा यह फेहरिस्त और भी लंबी हो सकती है। आने वाले समय में जब अप्रैल में इंडियन एक्सप्रेस का हिंदी संस्थान आएगा, तो काफी लोग जिन्होंने हाल-फिलहाल में लल्लनटॉप को छोड़ा था या कभी किसी तरीके से लल्लनटॉप से जुड़े हुए थे, वो सौरभ द्विवेदी के साथ इंडियन एक्सप्रेस का दामन थाम लेंगे।

कुल मिलाकर बात यह है कि ठिकाना बदला है, पता बदला है, लेकिन व्यक्ति और व्यक्ति के काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। और हम हिंदी पाठकों को इस तरीके से नई जगह पर आनंद आने वाला है।

अब समझने और सोचने वाली बात यह है कि अगर यही काम, यही लोग मिलकर करने वाले हैं तो क्या इंडिया टुडे समूह के साथ सौरभ द्विवेदी की किसी तरीके से मतभेद हुआ था? क्या इंडिया टुडे नहीं चाहता था कि सौरभ द्विवेदी लल्लनटॉप में रहते हुए मुंबई में अपने सिनेमा के सफर की शुरुआत कर सकें? क्या इसीलिए लल्लनटॉप छोड़ने के बाद एक के बाद एक सौरभ द्विवेदी के जितने भी फिल्म के प्रोजेक्ट हैं, उनकी सूची आती जा रही है?

इतना काफी है आप लोगों को समझने के लिए कि पर्दे के पीछे क्या हुआ होगा। बाकी कहानी इससे पहले बताई जा चुकी है।

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