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उत्तर प्रदेश

कर्मचारियों को सरकारी नीतियों की आलोचना का अधिकार देने पर लोक शांति को खतरा : भारत सरकार

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), लखनऊ बेंच में मेरे द्वारा आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा सरकारी कार्य और नीतियों की आलोचना पर लगे प्रतिबन्ध को खत्म करने हेतु दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि यह रोक लोक शांति बनाए रखने के लिए लगाई गयी है. नवनीत मिश्रा, उपसचिव, डीओपीटी द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार यदि सरकारी सेवकों को सरकार की किसी हालिया नीति अथवा कार्य की आलोचना का अधिकार दे दिया गया तो इससे सरकारी सेवा में कोई अनुशासन नहीं बचेगा.

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), लखनऊ बेंच में मेरे द्वारा आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा सरकारी कार्य और नीतियों की आलोचना पर लगे प्रतिबन्ध को खत्म करने हेतु दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि यह रोक लोक शांति बनाए रखने के लिए लगाई गयी है. नवनीत मिश्रा, उपसचिव, डीओपीटी द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार यदि सरकारी सेवकों को सरकार की किसी हालिया नीति अथवा कार्य की आलोचना का अधिकार दे दिया गया तो इससे सरकारी सेवा में कोई अनुशासन नहीं बचेगा.

यह अनुशासनहीनता कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी जिससे प्रशासन में अराजकता आएगी और यह आगे चल कर लोक शांति को प्रभावित कर सकता है. हलफनामे के अनुसार हर व्यक्ति अपनी मर्जी से सेवा में आता है और श्री ठाकुर सहित प्रत्येक आदमी को अधिकार है कि सेवा से अलग हो कर अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करें. याचिका में मैंने कहा था कि अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली के नियम 7 में किसी भी प्रकार के मंतव्य पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 19(2) में दिए किसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है.

यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से. संपर्क: 094155-34526

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