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मुरादाबाद में कमिश्नर और अमर उजाला में ठनी, अखबार पर कई मुकदमे दर्ज

छोटी सी चूक ने अमर उजाला की करा दी किरकिरी

मुरादाबाद: इन दिनों अमर उजाला संस्थान और मुरादाबाद कमिश्नर आञ्जनेय कुमार सिंह के बीच ठनी हुई है। मंडल में पिछले कई महीनों से अमर उजाला संस्थान के सरकारी विज्ञापनों और सरकारी बकाया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जिससे चर्चाओं का माहौल गर्म है, मंडल में बिना अनुमति सरकारी विज्ञापन छापने पर अमर उजाला पर रामपुर, संभल और अमरोहा में तीन मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। हालांकि ये सिलसिला अभी आगे भी जारी रह सकता है।

बड़े संस्थान द्वारा रिपोर्टर्स का हैरेसमेंट करना आम बात है, लेकिन बड़े अधिकारी किसी मीडिया संस्थान का इतना नुकसान करा देंगे ये किसी ने सोचा नहीं होगा। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर को मात्र एक सरकारी अधिकारी समझने की गलती ने अमर उजाला संस्थान की इन दिनों किरकिरी करा दी है। रामपुर की बिलासपुर तहसील में पसियापुरा गुरुद्वारा से शुरू हुए एक छोटे से विवाद ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

गुरुद्वारा मामले में बिलासपुर से कमिश्नर के हवाले से छपी एक खबर के बाद उसका संज्ञान लिया गया। जबकि इस खबर के बारे में कमिश्नर मुरादाबाद से कोई बातचीत भी नहीं की गई थी। इसके बाद कमिश्नर से संबंधित एक अधिकारी द्वारा रामपुर ब्यूरो प्रभारी हरीश पांडे से खबर के सोर्स के बारे में पूछा गया। हरीश पांडे के अपरिपक्व जवाब से अधिकारियों को ठेस पहुंची। उन्होंने गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए इसका जवाब देने से मना कर दिया।

इसके बाद ब्यूरो प्रभारी को अधिकारियों ने मुरादाबाद में कमिश्नर से मिलने के लिए भी कहा, लेकिन ब्यूरो प्रभारी हरीश पांडे ने इससे भी इनकार कर दिया। इसके बाद मामले में गेंद मुरादाबाद के निवर्तमान संपादक मनोज मिश्रा के पास पहुंची, उन्होंने भी कमिश्नर को मात्र एक सरकारी अधिकारी मानकर मामले को नाक का सवाल बना लिया। अखबार को हथियार बनाकर नकारात्मक खबरों का सिलसिला शुरू कर दिया। इसके बाद कमिश्नर आञ्जनेय कुमार सिंह ने मंडल में सभी विभागों के सरकारी विज्ञापनों और बकाया पर पूरी तरह रोक लगा दी।

पिछले कई महीने से सरकारी विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगी है। हालांकि मामले में अमर उजाला संस्थान के मालिकों का समर्थन स्टाफ के साथ ही रहा, यही कारण रहा कि मुरादाबाद में अलीगढ़ से आए नए संपादक पुनीत शर्मा भी नकारात्मक खबरों पर ही अखबार को चलाते रहे। मामला और बढ़ता ही चला गया। निवर्तमान संपादक मनोज मिश्रा को सेवानिवृत्त से एक महीना पहले ही संपादकीय से हटा दिया गया, हालांकि कागजों में वो संपादक रहे। लेकिन उनका रिटायरमेंट इतना खराब होगा कि पूरी उम्र नौकरी पर बट्टा लगा देगा ये उन्होंने नहीं सोचा होगा।

मामले में कमिश्नर द्वारा अमर उजाला को कई नोटिस जारी किए गए। मामले में कई यूनिटों के संपादक मामले के सोल्यूशन में लगे हैं, अभी हालात जस के तस हैं।

मंडल में कई थानों में अमर उजाला पर मुकदमे हुए दर्ज
आज़म खां जैसे राजनीतिक दिग्गज को धूल चटाने वाले कमिश्नर को समझने में आखिर अमर उजाला संस्थान ने बड़ी चूक कर दी। इसका नतीजा ये हुए कि बिलासपुर थाने में मंडी सचिव ने बगैर अनुमति विज्ञापन प्रकाशित करने पर अमर उजाला पर मुकदमा कराया है। संभल में हयातनगर थाने में एक प्रधान ने बगैर अनुमति विज्ञापन प्रकाशित करने पर अमर उजाला पर मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं होली के आसपास अमरोहा में भी मुकदमा दर्ज कराने की सूचना है। ये मुकदमे दर्ज का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

दलित विरोधी बयान पर भी अमर उजाला को घेरने की तैयारी
मिलक सीओ राजवीर सिंह परिहार द्वारा एक दलित विरोधी बयान दिया गया था। जिसमें “पहल हाथ सरदारों का, बाकी चोर…….का ” अमर उजाला में ज्यों का त्यों प्रकाशित कर दिया। मामले में दलित समाज ने इसका विरोध कर दिया। संभल में विक्की राज एडवोकेट ने टीम के साथ संपादक पुनीत शर्मा के फोटो के साथ और अमर उजाला की प्रतियां तक जला दीं, जिसकी वीडियो भी वायरल हो रही है। वहीं अखिल भारतीय जाटव महासभा के अध्यक्ष महेश सागर ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी। हालांकि उन्हें मामले में कार्रवाई के आश्वासन के बाद एसपी विद्या सागर मिश्र ने हड़ताल तुड़वाई। कुछ भी कहा जाए इस मामले में अभी तक अमर उजाला जैसे बड़े संस्थान को घेरने में सरकारी सिस्टम ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। उसकी साख पर भी बट्टा तो लगा है, ऐसे में ये जंग कहां पर जाकर रुकती है इसका सभी को इंतजार रहेगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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1 Comment

1 Comment

  1. राजेश

    March 13, 2026 at 8:58 pm

    इसके नायक दैनिक जागरण छोड़कर अमर उजाला से जुडे एक वयोवृद्ध पत्रकार हैं। वे ही सबको नीचा दिखाते हैं।

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