घटिया रिपोर्टिंग करने वाले अमर उजाला के इन पत्रकारों की बुद्धि पर तरस ही खाया जा सकता है

अमर उजाला के कई धुरंधर पत्रकार यों तो नमाज को नवाज, अदा करने को अता करना, मैनहोल को मेनहोल और विरोध के लिए खिलाफत लिख कर अपनी काबलियत का परिचय देते रहते हैं मगर दादरी के बिसाहड़ा कांड में तो इन्होंने अपनी काबलियत के झंडे ही गाड़ दिए। 29 सितम्बर को पहली खबर में लिखा कि पुलिस ने पशु वध के आरोपी अख़लाक़ को अरेस्ट कर लिया है जबकि अख़लाक़ ने घटना स्थल अपने घर पर ही दम तोड़ दिया था।

इसके बाद लगातार चार दिन तक अख़लाक़ को पशु वध का अरोपी लिखता रहा जबकि उसके खिलाफ कोई एफ. आई. आर. नहीं थी और न ही पुलिस या प्रशासन के पास उस पर आरोप लगाने वाली कोई तहरीर ही थी। पता नहीं अमर उजाला को किसने किसी निर्दोश पर आरोप लगाने का अधिकार दे रखा है जो उसे बार बार आरोपी लिखा जा रहा है। बीते सात अक्टूगर के अखबार में तो अखला़ाक़ का नाम बदल कर अमर उजाला ने कमाल ही कर दिया। बिसाहड़ा कांड के बारे में छपी आठ खबरों में अख़लाक़ का नाम 11 बार आया है और सभी जगह उस का नाम अख़लाक़ न लिख कर इकलाख लिखा गया है। अख़लाक़ को इकलाख लिखा देख कर अपने बाल ही नोचे जा सकते हैं, इन पत्रकारों की बुद्धि पर तो तरस ही खाया जा सकता है।

डॉ. महर उद्दीन खां
वरिष्ठ पत्रकार
मो. 09312076949



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