राकेश कायस्थ-
ट्रंप की पिछली सरकार से लेकर बाइडेन के 4 साल यानी मोटे तौर पर पिछले एक दशक में अमेरिका की कौन सी तस्वीरें आपके जेहन में कौंधती हैं। अपनी याददाश्त से मैं चार पांच तस्वीरों का जिक्र कर सकता हूँ—
- कोविड के दौरान इलाज के बिना मरते लोगों की कहानियां। इन कहानियों ने कम से कम मेरी नज़रों में अमेरिका की उस इमेज से पर्दा हटा दिया कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति के पास पब्लिक हेल्थ का बहुत अच्छा सिस्टम है।
- ऐसी ही एक तस्वीर निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के आखिरी दिनों में देखने को मिली। फ्लोरिडा के जंगलों में लगी आग ने बताया कि अमेरिका मंगल पर नई दुनिया बसाने के दावे कर सकता और विश्व के जिस हिस्से में चाहे, वहां बम गिरा सकता है लेकिन अपने देश में लगी जंगल की आग नहीं बुझा सकता।
- दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की कमान अब एक ऐसे राजनेता के हाथ में है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग जैसे सवालों को सरेआम खिल्ली उड़ाता है और धरती को बचाने के किसी सामूहिक प्रयास में भागीदार बनने से खुला इनकार करता है। पिछले कार्यकाल में ट्रंप ने पेरिस समझौता से अलग होने की घोषणा की थी। इस बार राष्ट्रपति बनते ही ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से निकलने का एलान भी कर दिया है।
- दुनिया ने ट्रंप के पिछले कार्यकाल में एक पुलिस अधिकारी को जॉर्ज फ्लायड नामक एक अश्वेत की गर्दन पर घुटने टिकाकर बेदर्दी से कत्ल करते देखा। जो लोग अमेरिका को ठीक से जानते हैं, शायद उन्हें उतना ताज्जुब नहीं हुआ हो लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति को बाहर देखने वालों को हैरानी हुई कि यह सब ऐसे देश में हो रहा है, जो पूरे विश्व को मानवाधिकार का पाठ पढ़ाता फिरता है।
- साल 2021 का जनवरी महीना बहुत से लोगों को याद होगा, जब हारे हुए राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों ने वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हिल पर कब्जा करने कोशिश की थी। वो तस्वीरें इस बात का सबूत थी कि संसार के सबसे पुराने लोकतंत्र में असल में जनतांत्रिक मूल्यों की क्या स्थिति है।
- अब खबर ये है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालते ही इस प्रकरण में शामिल अपने तमाम समर्थकों को क्षमादान दे दिया है। इसी तरह पद छोड़ने से पहले जो बाइडेन ने उन सारे मामलों में अपने परिवार के सदस्यों को अभयदान दिया, जहां उन्हें लगता था कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी अदालतों के प्रति सर्वोच्च नेताओं की आस्था और न्यायपालिका की स्थिति स्पष्ट है।
- भारत से लेकर ब्राजील तक क्रोनी कैपिलिज्म को लेकर दुनिया भर में बहुत सारी चिंताएं हैं। अमेरिका ने पिछले एक दशक में बताया कि वह क्रोनी कैपिटलिज्म का ग्लोबल कैपिटल है। ट्विवर ने ट्रंप को बैन किया तो उनके भरोसेमंद साथी एलॉन मस्क ने ये कंपनी ही खरीद ली। उसके बाद मस्क ने ट्विटर को एक्स नाम से री ब्रांड किया और ट्रंप को राष्ट्रपति बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई। ये मामला कुछ-कुछ गौतम अडानी के एनडी टीवी खरीदने जैसा है।
- टेस्ला के मालिक एलॉन मस्क नई ट्रंप सरकार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति होंगे। ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले ही मस्क लगातार ये बताते रहे हैं कि वो क्या करना चाहते हैं। इनमें पब्लिक फंडिंग से चलने वाली ढेर सारी कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने से लेकर व्यावसायिक प्रतिद्वंदियों को निपटाने तक के संकेत शामिल हैं।
अब सवाल ये है कि पिछले दस साल और उससे आगे के अमेरिका को भारत किस तरह देखे। मोदी समर्थक इस बात ज़ोर देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत पाकिस्तान और अफगानिस्तान से अच्छी है।
लोकतंत्र की स्थिति के लिए मोदी समर्थकों का मानक बांग्लादेश है। किसी भी तरह के चुनावी घपले और संस्थानों के खात्मे के सवाल पर मोदी समर्थक छाती ठोककर कहते हैं– बांग्लादेश क्यों नहीं जाते।
अब ट्रंप 2-0 मोदी समर्थकों के लिए वैधता हासिल करने का नया रास्ता खोलेगा। इस तरह के तर्क सिर उठाएंगे कि अमेरिका में तो सरेआम गोलियां चलती हैं, अगर भारत में किसी ने चलती ट्रेन में प्रधानमंत्री का नाम लेकर कुछ हत्याएं कर दीं, तो कौन सी बड़ी बात हो गई। लिचिंग पर इतना बवेला क्यों है, ये तो पूरी दुनिया में होता है।
ट्रंप का नया कार्यकाल पूरी दुनिया में नैतिक मानकों में गिरने की नई प्रतियोगिता शुरू करेगा और बदकिस्मती से नरेंद्र मोदी का न्यू इंडिया इसका एक बेहद उत्साही प्रतिभागी साबित होगा।


