नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अवैध गिरफ्तारी का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अमिताभ ठाकुर की ओर से दाखिल जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय की दृष्टि में आ चुकी है और इसकी स्वीकृति का संदेश याचिकाकर्ता को मिल गया है।
आज़ाद अधिकार सेना की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक यह जनहित याचिका राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा द्वारा 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। याचिका में अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी को गैरकानूनी, मनमानी और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया गया है।
अवैध गिरफ्तारी और जान के खतरे का मुद्दा
जनहित याचिका में कहा गया है कि अमिताभ ठाकुर को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार किया गया और उन्हें न तो गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण बताया गया और न ही तय संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि गिरफ्तारी के दौरान और बाद में उनके साथ मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया गया, परिवार को समय पर सूचना नहीं दी गई और उनके अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
कोडीन कफ सिरप माफिया से जुड़ा मामला
याचिका का एक अहम बिंदु यह भी है कि अमिताभ ठाकुर ने कोडीन कफ सिरप माफिया और उससे जुड़े राजनीतिक संरक्षण को लेकर कई गंभीर खुलासे किए थे। इन्हीं खुलासों के चलते उनकी जान को गंभीर खतरा बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि यह पूरा मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति को चुप कराने की कोशिश है जो लगातार सत्ता, पुलिस और माफिया गठजोड़ पर सवाल उठा रहा है।
1999 के पुराने मामले में दोबारा FIR का आरोप
जनहित याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस मामले में अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया है, वह वर्ष 1999 से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच पहले ही हो चुकी थी और मामला न्यायालय द्वारा खारिज किया जा चुका था। इसके बावजूद उसी प्रकरण में दोबारा FIR दर्ज कर गिरफ्तारी किया जाना स्पष्ट रूप से कानून का दुरुपयोग बताया गया है।
अभी भी जेल में, जल्द रिहाई की उम्मीद
अमिताभ ठाकुर फिलहाल जेल में हैं। आज़ाद अधिकार सेना और उनके समर्थकों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद उन्हें जल्द राहत मिलेगी। संगठन का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और संविधान की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर हस्तक्षेप करता है, तो यह सिर्फ अमिताभ ठाकुर के लिए नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ बोलने वालों के लिए एक नजीर (precedent) साबित हो सकता है।
प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय लिखते हैं-


सुप्रीम कोर्ट में अमिताभ ठाकुर के न्याय की गुहार! योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आवाज़ उठाने के चलते शासन-प्रशासन के निशाने पर आए अमिताभ ठाकुर अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर हैं।
आजाद अधिकार सेना की प्रेस रिलीज के मुताबिक अमिताभ ठाकुर से संबंधित जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय की दृष्टि में आ चुकी है। आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने 22 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय में इसे दाख़िल किया था।
उन्हें इसकी स्वीकृति का संदेश प्राप्त हो चुका है। यह जनहित याचिका अमिताभ ठाकुर की अवैध गिरफ्तारी, उनकी जान के गंभीर खतरे और संवैधानिक व मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़ी हुई है।
खास ही इसमें इस महत्वपूर्ण तथ्य का भी उल्लेख है कि कोडीन कफ सिरप माफिया एवं उससे जुड़े राजनीतिक संरक्षण के खुलासों के कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है।
अमिताभ ठाकुर अभी भी जेल में हैं। उम्मीद है कि वे जल्द बाहर आएंगे। आंधियों के खिलाफ जल रही ये लौ और भी प्रचंड, प्रज्जवलित और मारक होगी।


