यशवंत सिंह-
यही वो गुरुजी हैं जिनके यहाँ जा रहे हैं हम लोग। इनसे संपर्क में आईबी से रिटायर अधिकारी सुधीर भारती जी आए और सुधीर भारती जी की प्लान की हुई इस यात्रा में मैं भी शरीक हो गया। आनंद द्विवेदी जी शांति निकेतन में अंग्रेजी के टीचर हुआ करते थे। फिर आंध्र प्रदेश स्थित ऋषि वैली में भी टीचर थे। बाद में सब छोड़ कर उत्तराखंड के अंजनी सैण में बस गए और यहीं के होकर रह गए। उनके यूट्यूब चैनल को देखिए खंगालिये। इनके बारे में मेरी कोई धारणा नहीं है। जा रहा हूँ। रहूँगा। सुनूँगा। कुछ ध्यान किया जाएगा।
जब कल हम लोग गुरुजी के कमरे में प्रथम बार दाखिल हुए!
ध्यान के वक्त का एक वीडियो चुपके से बनाया! इस वीडियो में आवाज़ नहीं है क्योंकि सब ध्यान में हैं। सोचिए कहीं आप जाते हैं और वहाँ बैठते ही चाय पानी व परिचय के बाद कहा जाये कि- आइए थोड़ा ध्यान कर लेते हैं, तो कितना अजीब लगेगा। पर एक दुनिया ऐसी है जो इस दिखावटी दुनिया से अलग आपको एक नई दुनिया में प्रवेश का राह दिखाती है।
बता दें, दिल्ली से चले थे तो पहला पड़ाव सीधे देव प्रयाग में डाला गया। आध्यात्मिक यात्रा का पहला पड़ाव! कल रात देव प्रयाग में रुके। आज सुबह अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर स्नान के लिए पहुँचे। इस जगह पहली बार आया। कितना क़रीब है ये दिल्ली से लेकिन हम लोग इस आनंद से अछूते थे अब तक। तीन सौ सीढ़ियों को चढ़ना उतरना पड़ता है यहाँ स्नान करने के वास्ते। हम लोगों का अगला स्टॉपेज अंजनी सैन है। टिहरी गढ़वाल जिले में। आनंद द्विवेदी नाम के एक महात्मा जी से मिलने जा रहे हैं। तीन दिन तक रहने का न्योता वहाँ से मिला है। देव प्रयाग में स्नान का वीडियो देखिए-

ड्राइविंग सीट पर हैं सुधीर जी। आईबी के रिटायर अफसर। उनके बगल में तस्वीर खींचते उमेश जी। समाजसेवी और पर्यावरणविद। दोनों लोग मेरे होम टाउन गाजीपुर के हैं। मेरे बगल में एक अघोरी बैठे हैं। पंजाब से पैदल यात्रा पर निकले हैं केदारनाथ जाने के लिए। ऋषिकेश से आगे मिले तो इनको बिठा लिया गया। ये बिना चप्पल पैदल जा रहे थे। बड़ा उदासीन अखाड़ा से जुड़े हैं। इनको बिठाने के छह सात किमी बाद कार ख़राब हो गई। दो हज़ार नौ की आई टेन का कूलेंट उबल कर गिर गया। पता चला गाड़ी ओवरलोड है। हम लोगों ने अघोरी जी से हाथ जोड़ा और उनको पैदल ही जाने को कह दिया। इस बात का हम लोगों को मलाल है। अपडेट देते रहेंगे।




चौबीस घंटे हो गए उत्तराखंड के अंजनी सैण पहुँचे, गुरुजी आनंद द्विवेदी के पास। जाते ही शुरुआती बातचीत परिचय के बाद ध्यान कराया। फिर ध्यान / मेडिटेशन पर बातें हुई। आनंद जी का यहाँ पर कुछ भी नहीं लेकिन सब उनका है। जिस संस्था का स्कूल है, बिल्डिंग है, उस संस्था के पास फण्ड आना बंद हो गया तो स्कूल बंद करने की घोषणा की। आनंद जी और उनके साधक स्कूल चलाने में जुट गए। बिना कोई फण्ड लिए संस्था से। जो लोग यहाँ पढ़ाते हैं वो आनंद जी के साधक हैं। ये लोग एक पैसा नहीं लेते। वालंटियर हैं। आईटी समेत अलग अलग बैकग्राउंड के अनेक लोग यहाँ हैं। आज सुबह हम लोग स्कूल में गए। संगीत और प्रार्थना का अदभुत मेल दिखा। सबसे पहले सामूहिक ध्यान कराया गया। बच्चे इसमें शामिल रहे। फिर संगीत और प्रार्थना। स्कूल से निकल कर हम लोग गुरुजी के यहाँ गए। एकदम ऊपर रहते हैं ये। काफ़ी समय से बीमार चल रहे हैं। किसी विदेशी को गले लगाया था और उससे कोई कोरोना वाला वेरिएंट आ गया अंदर। लंग्स डैमेज किया। वो कहते हैं- मुझे पता है पाँच साल तक नहीं मरूँगा लेकिन हालत इतनी ख़राब हो गई थी बचना मुश्किल लगने लगा था लोगों को।

मैंने कई सवाल किए गुरुजी से। उन्होंने रिकॉर्ड करवाया। मेरा सवाल आपको मेरी मनःस्थिति का अंदाजा करा देगा। हम लोगों की बातचीत के तीन वीडियो आने हैं। पहला पार्ट ये आ चुका है। दूसरा आज शाम और तीसरा कल सुबह आयेगा।
आपके भी कोई सवाल हों तो मुझे डीएम कर सकते हैं। हम लोग अभी यहाँ कई दिन हैं। सुबह चार से पाँच और रात आठ से नौ, गुरुजी के साथ ध्यान किया जाता है। इसके अलावा आधा घंटा स्कूल की प्रार्थना सभा की शुरुआत में विपश्यना कराया जाता है, सांस और शरीर को देखने महसूसने का अभ्यास!
बिना बुरा कर्म किए अकाल मृत्यु, नाम जप, ध्यान विधियाँ… इन पर मेरे सवालों का क्या जवाब दिया गुरुजी आनंद द्विवेदी ने, वीडियो के इस सेकंड पार्ट में मिलेगा–
मेरा सवाल था क्या ध्यान की विधियाँ कस्टमाइज़ की जा सकती हैं!
ध्यान क्यों करें और क्या ध्यान में भी कष्ट हो सकता है?
संगीत सिखा रहे धीरज जी गुरु आनंद द्विवेदी जी के साथ डेढ़ दशक से हैं। गुरुजी का स्वास्थ्य ख़राब होने से संगीत ट्रेनिंग का काम इनके जिम्मे है। छात्रों के बीच ध्यान से देखिए इनके कई पुरुष स्त्री टीचर भी बैठे अभ्यास कर रहे हैं जो एकदम छात्र सरीखे लग रहे हैं। कई ऐसे लोग यहाँ टीचर हैं जो सिर्फ़ यहाँ के आध्यात्मिक माहौल में साधना के लिए टीचर बन गए ताकि रह सकें! बाईस से अट्ठाइस वर्ष के इन शिक्षकों के भीतर गहरे ये एहसास है कि बाहरी जीवन व्यर्थ है, जिसमें अंततः आप हासिल कुछ नहीं करते। फिर क्यों न दूसरा रास्ता अपनाया जाए! कमोबेश यही हाल मेरा भी है। इस वीडियो को न देख सकें तो आँख बंद कर बच्चों के कोरस को सुनें। बहुत प्रभावित करता है। ऐसा लगता है, ध्यान ख़ुद ब ख़ुद होने लगा है।
गुरुजी आनंद द्विवेदी जी से आईबी के रिटायर अफसर सुधीर भारती जी बात कर रहे हैं। वीडियो मैंने शूट किया है। अड़तालीस मिनट का ये अनकट वीडियो है। जिन्हें रुचि हो वो देख सकते हैं। बेहतर आवाज़ के लिए ईयर फ़ोन का इस्तेमाल करें।
आज रात आठ से नौ का सामूहिक ध्यान गुरुजी आनंद द्विवेदी के साथ उनके कमरे में किया गया। हम तीन समेत कुल चौदह पंद्रह साधक थे। पहाड़ का एकदम शीर्ष, घनघोर मौन, कमरे की लाइट बंद कर दी गई जिससे घुप्प अंधेरा हो गया। हम सब एक दूसरे की सांसें सुन पा रहे थे। पूरे एक घंटे ध्यान। मौन और अंधेरे के बीच प्रकृति की गोद में ये ध्यान अदभुत अनुभव वाला रहा। हम लोग नीचे रुकवाए गए हैं और गुरुजी के पास एकदम ऊपर जाते हुए हाँफ जाते हैं। रात का खाना न खाना ही यहाँ उचित रहेगा। खाने में तुरंत बाद चल देने से हाँफने की रफ़्तार बहुत तेज़ हो गई। इतना घनघोर जंगल की भालू और बाघ का डर अवचेतन में बैठा रहा। वैसे आश्रम के लोग निर्भय रहने के लिए बोले और भालू व बाघ को संवेदनशील- समझदार प्राणी बता दिया। ध्यान के बाद बाहर निकला तो खुले आसमान में खिला चाँद था और नीचे घाटी बादलों से ढँकी। दोनों तस्वीरें लीं। दे रहा हूँ। शुभ रात्रि


आध्यात्मिक शिक्षा की दिशा में नई पहल कर रहे आनंद द्विवेदी से जुड़िए!
उत्तराखंड के लेखक, कलाकार और शिक्षक आनंद द्विवेदी शिक्षा को आध्यात्मिक विकास से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने इस उद्देश्य से APV होलिस्टिक एजुकेशन की स्थापना की है।
Anand Dwivedi बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं, जो लेखन, संगीत, कला और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा को केवल अकादमिक दायरे तक सीमित न रखकर उसे आंतरिक विकास और आत्म-अन्वेषण से जोड़ना है।
इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2004 में APV Holistic Education की स्थापना की, जो उनकी पुस्तक “Dance of the Bee” से प्रेरित है। यह पुस्तक शिक्षा को “सा विद्या या विमुक्तये” के सिद्धांत से जोड़ते हुए उसे आत्मिक विकास का माध्यम मानती है।
इस पहल के तहत अनंत प्रज्ञा विद्याश्रम ट्रस्ट के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संस्थान और पुस्तकों के प्रकाशन के लिए दान की भी व्यवस्था की गई है।
दान से जुड़ी जानकारी:
GPay: 7017893221
खाता संख्या: 00000043444123756
IFSC कोड: SBIN0006566
इसके अलावा, संस्थान से जुड़ी जानकारी, किताबों या विजिट के लिए व्हाट्सऐप नंबर +91 7895695417 पर संपर्क किया जा सकता है।

वीडियो देखें…


