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मीडियावालों को डाटा देवता मुकेश भाई के बेटे को मुर्गा रत्न की उपाधि देना चाहिए!

संजीव परसाई-

डाटा देव श्री मुकेश भाई का छोटा बेटा अनंत, इन दिनों 140 किमी की पदयात्रा पर हैं। अपना 30वाँ जन्मदिन द्वारकाधीश की नगरी में मनाना चाहते हैं। अच्छी बात है। उन्होंने एक खबर वाली बात कर दी। रास्ते में उन्होंने एक ट्रक में मुर्गे जाते हुए देखे। द्रवित हो गए, सारे मुर्गे दूने दाम देकर खरीदकर छोड़ दिए। मरेंगे तो अब भी, लेकिन कारण कुछ और होगा। ट्रक में जाने से एक आदमी का फायदा होता, अब एक पर पांच लोगों का परिवार मानें तो हजार लोगों का भला हो गया। यहां भी लाभ ही लाभ।

हमारे एक मित्र कल कुछ दुखी थे। वे सही और गलत पर अपनी राय नहीं बना पा रहे थे। उनको एक फंक्शन में इस विषय पर अपनी राय रखनी थी। सो वे एक ढाबे पर डिनर करने चले गए। दुख कम करने के सारे उपाय हो चुके, तब आखिरी एक टांग, दो लोगों के बीच बची। अब दोनों का ध्यान आखिरी वक्त तक उसी पर था। जीत ज्यादा दुखी आदमी की हुई। हाथ में मुर्गे की टांग और दूसरे में मोबाइल। अद्भुत और मनोहारी दृश्य था। मोबाइल पर मुर्गे छोड़ने की खबर फ्लैश की। संशय में सोचने लगे, इस टांग का क्या किया जाए। फिर मन में आया कि जिंदा होती तो छोड़ भी देता, इसे खा ही लेता हूं। सो निर्णय हुआ कि एक टांग खाएगा, दूसरा मसाले से चावल। अंतिम राय ये बनी कि सही और गलत कुछ नहीं होता। आप कौन हैं, और परिस्थितियां कैसी हैं, इस पर निर्भर होता है।

अनंत अंबानी की पदयात्रा का आयोजन व्यक्तिगत है। उन्होंने जोड़ने की नहीं, जुड़ने के लिए की है। भाव उचित है। मुर्गों की जान तो हमने भी बचाई है। अब मीडिया हमारी खबर तो दिखाएगा नहीं। हमने अब तक न खाकर कम से कम हजार दो हजार मुर्गों की जान बचाई है। लाखों लोग तो इसीलिए खा लेते हैं कि अब बन गई तो खा ही लेते हैं। 95 प्रतिशत ब्राह्मण नहीं खाते, सो उनको भी दावा करना चाहिए। जो खाते हैं, दावा वो भी करें कि उन्होंने कम खाकर मुर्गी की जान बचाई। वरना वो दो तीन गुनी खा सकते थे। ये दावा वो भी कर सकते हैं जो मजबूरी में नहीं खा पा रहे हैं। सबसे बड़ा दावा उनका है, जो मंगलवार और शनिवार नहीं खाते हैं। जो व्हिस्की साथ हो, तब खाते हैं उनको मुर्गा रत्न की उपाधि देना चाहिए।

खाने वालों का अपना विचार है। उनके लिए वो न्यूट्रिशन है। न खाने वालों के लिए जीव है, जिससे बास आती है। वो जिंदा मुर्गी को भी हाथ लगाने के बाद हाथ धोते हैं।

मुर्गा समाजवाद और पूंजीवाद को जोड़ता है। ये अमीर, गरीब सबको बराबर पसंद है। ये आध्यात्मिक मिलन का माध्यम है। पाप पुण्य के बीच कड़ी है। जो अंडे बेचता है, वो पाप नहीं कर रहा है। वो तो केवल जीविकोपार्जन कर रहा है। लेकिन खाने वाला पापी है। ठीक वही दारू बेचने वाली, और दारू पीने वाली थ्योरी।

क्या रिलायंस के स्टोर पर अब से अंडे नहीं मिलेंगे? ये सवाल पूछने वाले ठीक लोग नहीं हैं। फिल्म देखते-देखते हीरोइन से प्यार हो जाता है, लेकिन उसे घर कौन लाता है।

बहरहाल मुकेश भाई का लाड़ला बेटा है। अनंत को शुभकामनाएं, स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें। अब हम जैसे लोग अनंत को सुख संपत्ति का तो आशीर्वाद भी क्या देंगे। जय जय…

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