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अनिल अंबानी बनाम रिपब्लिक टीवी: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूछा— “विवाद सुलझ क्यों नहीं सकता?”

मुंबई: Bombay High Court में उद्योगपति Anil Ambani द्वारा Republic TV, उसके एडिटर Arnab Goswami समेत अन्य के खिलाफ दायर मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को विवाद सुलझाने की सलाह दी। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला “आसानी से सुलझाया जा सकता है” और इसे लंबा खींचने की जरूरत नहीं है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “रिपोर्टिंग करें, लेकिन अतिशयोक्ति नहीं”

बार एंड बेंच में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मीडिया को रिपोर्टिंग से कोई नहीं रोक रहा, लेकिन रिपोर्टिंग में “नाम लेकर अपमानजनक शब्दों” और “अतिशयोक्ति (embellishments)” से बचना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी को “फ्रॉडस्टर” कहने और कोर्ट के आदेशों के आधार पर तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने के बीच एक “बारीक रेखा” है, जिसे समझना जरूरी है।

अदालत ने टिप्पणी की, “पब्लिक इंटरेस्ट में जानकारी देना एक बात है, लेकिन उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर लोगों को भड़काना दूसरी बात है।”

अंबानी पक्ष: ‘पत्रकारिता की आड़ में चरित्र हनन’

अनिल अंबानी की ओर से पेश अधिवक्ता मयूर खांडेपारकर ने दलील दी कि रिपोर्टिंग के नाम पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि “किसी को फ्रॉडस्टर या बेवकूफ कहना पत्रकारिता की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता।”

उन्होंने यह भी कहा कि सेबी (SEBI) के आदेश को गलत तरीके से पेश कर उसके आधार पर एक नैरेटिव बनाया गया, जिससे उनके मुवक्किल की छवि को नुकसान पहुंचा।

रिपब्लिक टीवी का पक्ष: ‘फेयर कमेंट और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग’

वहीं, रिपब्लिक टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल ने जो कुछ कहा, वह रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने “फेयर कमेंट” और “जस्टिफिकेशन” का बचाव लेते हुए कहा कि हर बयान को सही ठहराया जा सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई टिप्पणी वास्तव में आपत्तिजनक पाई जाती है, तो उस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

कोर्ट ने सुझाया समाधान का रास्ता

अदालत ने दोनों पक्षों से कहा कि वे कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की सूची साझा करें, ताकि आपसी सहमति से विवाद सुलझाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को लंबित रखना किसी के हित में नहीं है और संतुलित रिपोर्टिंग से विवाद खत्म हो सकता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि “जज के लिए यह सुनना हमेशा अच्छा लगता है कि पिछली बेंच ने सही कहा था,” जिस पर कोर्ट रूम में हल्की हंसी भी हुई।

अगली सुनवाई

कोर्ट ने फिलहाल कोई प्रतिबंधात्मक आदेश (restraining order) जारी नहीं किया है और स्पष्ट किया कि मीडिया रिपोर्टिंग जारी रख सकता है, लेकिन संयम के साथ।

मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है।

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