नवेद शिकोह-
सन् 2001 में अभिनेता अनिल कपूर ने फिल्म “नायक” में एक किरदार के ज़रिए पत्रकार की अहमियत का अहसास कराया था, चौबीस साल बाद 24 फरवरी 2025 में लखनऊ के एक जमीनी पत्रकार अनिल कुमार ने रियल नायक बनकर पत्रकार के कलम की ताकत को प्रदर्शित कर दिया।
अनिल कपूर ने पत्रकार के किरदार में सवाल में उलझाकर एक सीएम की सत्ता छीन ली थी। पत्रकार अनिल कुमार की कलम सीएम योगी आदित्यनाथ पर चल रहे विरोधियों के बाणों को रोकने वाली ढाल बन गयी। अनिल द्वारा सोशल मीडिया पर लिखी एक पोस्ट ने महाकुंभ के आयोजन पर विपक्ष के सवालों पर ऐसा पलटवार किया जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के खिलाफ अपना मजबूत हथियार बना लिया।
सीएम ने विधानसभा बजट सत्र के दौरान पत्रकार अनिल की पूरी पोस्ट पढ़कर विपक्षी सवालों का हिसाब बड़े तीखे अंदाज में चुकता कर दिया।
पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनने वाले योगी आदित्यनाथ आठ वर्षों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। फायर ब्रांड नेता, हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा और हिन्दू ध्वजवाहक की छवि में योगी आदित्यनाथ देश के सार्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं।
देशभर में चुनावी मंचों के अतिरिक्त यूपी विधानसभा सत्र में भी उनके तीखे भाषण खूब पसंद किए जाते हैं और चर्चा का विषय बनते हैं। ये भाषण राष्ट्रीय मीडिया की हेड लाइन बनते हैं। सोशल मीडिया में कई मिलियन की तादाद मुख्यमंत्री योगी के भाषणों को सुनती है।
मिट्टी में मिला देंगे…. बटोगे तो कटोगे …. अब्बा जान… कठमुल्ले… जैसे उनके शब्दबाण सनातन चेतना को बढ़ाते हैं। सियासत में उनके ऐसे ओजस्वी भाषणों के निहितार्थ से सब वाकिफ हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के नौवें बजट सत्र के सिलसिले के दौरान सोमवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री का भाषण एक बार फिर मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर, सोशल मीडिया, नुक्कड़, चौराहों, पंचायतों, खेत-खलिहानों से लेकर घर-घर में चर्चा में है।
महाकुंभ के आयोजन पर सवाल उठाने वाले विपक्षियों और विरोधियों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- महाकुंभ में जिसने जो तलाशा उसको वो मिला. गिद्धों को लाश मिली, सूअरों को गंदगी मिली… जबकि, संवेदनशील लोगों को रिश्तों की सुंदर तस्वीर मिली, सज्जनों को सज्जनता मिली, व्यापारियों को धंधा मिला, श्रद्धालुओं को साफ-सुथरी व्यवस्था मिली… जिसकी जैसी नियत थी, दृष्टि थी, उसको वैसा मिला।

अनिल कुमार की कवितानुमा पोस्ट का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे हूबहू पूरा पढ़ा। और ये उनकी सुपरहिट स्पीच साबित हो गई। अखबारों और चैनलों की हेडलाइन बन गई। अनिल कुमार की पोस्ट पढ़कर योगी आदित्यनाथ ने विपक्षियों -विरोधियों पर तीखा प्रहार कर अपने करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीत लिया। ये स्पीच फायर ब्रांड वक्तव्य बन कर बच्चे-बच्चे की जबान पर छा गई। विरोधियों ने भी पलटवार करते हुए कहा कि पवित्र नदियों की गंदगी और पर्यावरण की चिंता करने वालों को सुअर कहना क्या न्यायसंगत है? महाकुंभ हादसे में श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु पर दुख व्यक्त करने वाले को गिद्ध कहना क्या मर्यादित है?
लेकिन इस स्पीच का विरोध करने वालों पर सराहना और प्रशंसा करने वालों की तादाद काफी भारी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि एक सादगी पसंद साधारण से जमीनी लखनऊ के पत्रकार अनिल कुमार के उद्गार देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री को किस क़दर भा गए। बताते चलें की यूपी सीएम की बेहद प्रभावशाली क्रिएटिव पीआर टीम है। सोशल मीडिया कुनबा है। सैकड़ों का स्टाफ है। अनुभवी पत्रकारों की एक फौज है। स्पीच, तथ्य, रिसर्च, फैक्ट्स, आंकड़ा, तहरीर, तकरीर, सोशल मीडिया, बधाई, शोक, प्रेस नोट, ट्वीट (एक्स) और कंटेंट तैयार करने वालों की प्रतिभावान टीम है। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग और देश की नामी-गिरामी पीआर एजेंसियां सीएम ब्रांडिंग, सरकार की उपलब्धियों और जनहित योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम करती हैं। इतनी बड़ी काबिल टीम गुदड़ी से लाल निकाल लाई। उसने सन्नाटे में पड़ी एक साधारण से स्थानीय पत्रकार की फेसबुक पोस्ट को मुख्यमंत्री के मनोभावों से मैच कर मुख्यमंत्री के समक्ष अनिल कुमार की फेसबुक पोस्ट रख दी।
और मुख्यमंत्री की सुपर हिट फायरब्रांड स्पीच बन कर अनिल कुमार के कलम का जादू सारे ज़माने में छा गया।
इन सब बातों से भी बढ़कर मैंने अपने मित्र और अनुज अनिल कुमार की उस खूबी पर ज्यादा गौर किया और उससे कुछ सीखा जिसपर शायद कम ही लोग ध्यान दे रहे होंगे। हमारे जैसे लोगों की तहरीर को इतना प्रभावशाली मुख्यमंत्री सदन में अपनी तकरीर बनाता तो हम उछल रहे होते। आसमान उठा लेते। सातवें आसमान पर होते। जिन्हें नहीं पता उन्हें सोशल मीडिया या किसी भी तरह बता रहे होते कि सीएम ने सदन में मेरी पोस्ट को अपना भाषण बनाकर विपक्षियों-विरोधियों को करारा जवाब दिया। मेरा कलम, मेरे शब्द, मेरे भाव, मेरे उद्गार, मेरी पोस्ट, मेरी तहरीर, मेरी शैली मेरा एक-एक अल्फाज आज देश की मीडिया की सबसे बड़ी खबर बन गया। सियासत गर्मा गई है…
ये सब तो छोड़िए अनिल कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर वो वायरल वीडियो भी नहीं चस्पा किया, जिसमें मुख्यमंत्री उनकी पोस्ट को पढ़ रहे हैं।
शाबाश अनिल भाई…… दिखावे से दूर रहने की तुम्हारी सादगी ज्यादा भा गई।
मुख्यमंत्री की स्पीच का वीडियो इस मूल खबर में…


