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उत्तराखंड

सरकारी विज्ञापन से खरीदे गए बड़े अखबार और न्यूज़ चैनल में अंकिता हत्याकांड पर कुछ भी नहीं छपने दिया जाता!

उमाकांत लखेड़ा-

देश में लड़कियों से दुराचार के बाद गवाही व सबूत मिटाने के लिए निर्ममता से हत्या करने का नया ट्रेंड चला है। हैरत की बात ये है कि ऐसा अपराध विपक्षी पार्टी शासित किसी राज्य में हुआ है तो कोलकाता जैसा आक्रोश और हंगामा होता है। जिसमें भाजपा भी कूद जाती है।

इसमें गलत कुछ नहीं है लेकिन दो साल पहले उत्तराखंड में भाजपा के बड़े नेता पुत्र ने 19 साल की अंकिता भंडारी की दुष्कर्म के बाद हत्या की। वह सनसनीखेज केस भारी आंदोलन के बाद भी सीबीआई को नहीं सौंपा गया। निचली कोर्ट में पुलिस की लचर जांच के बाद तब से कछुआ चाल से केस चल रहा है।

लोगों को लगता है कि सीबीआई जांच होने दी जाती तो अब तक हत्यारे फांसी पर लटक जाते। विडंबना है एक ही देश में लड़कियों के प्रति एक समान और जघन्यतम अपराधों पर भाजपा के दोहरे मानदंड होते हैं। अंकिता की हत्या की सीबीआई जांच रोकने के लिए धामी सरकार ने एड़ी चोटी का जोर लगाया।

अंकिता हत्याकांड पर आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है बड़े भाजपा नेताओं को बचाने के लिए राज्य भाजपा सरकार ने सारा ताना बाना बुना। जो लोग अंकिता के माता पिता के साथ खड़े थे, उनसे दुश्मनों जैसा बर्ताव किया।

चूंकि बड़े अखबार और TV करोड़ों के सरकारी विज्ञापन देकर खरीद लिए गए, इसलिए कहीं भी अंकिता हत्याकांड और उस मासूम बच्ची से हुई बर्बरता पर कुछ भी नहीं छपने दिया जाता! मुझे बताया गया कि निर्भीक, निष्पक्ष पत्रकारों को झूठे मामलों में डरा धमकाकर चुप करा दिया जाता है।

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