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पत्रकार अनुपम के सिंह ने छोड़ा ऑपइंडिया, इस तरह याद किया 6 साल का सफर!

पत्रकार अनुपम सिंह ने न्यूज वेबसाइट ऑपइंडिया के असिस्टेंट एडिटर पद से रिजाइन कर दिया है. भड़ास को मिले इनपुट के अनुसार, अनुपम ‘थिंक फॉर इंडिया’ यानी ‘टीएफआई’ के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. उन्हें ‘टीएफआई हिंदी’ का संपादक नियुक्त किया गया है.

अनुपम ने संस्थान छोड़ते हुए एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर अब तक की पारी और सहयोगियों को विस्तार से याद कर जो कुछ लिखा है, उसे नीचे पढ़ें.

ह साल, 7500 खबरें, 1000 लेख और 9000 कॉपियों की एडिटिंग। ऑपइंडिया के साथ सफर समाप्त हुआ। समय के बहाव में मेरा विश्वास रहा है, और यही कारण है कि आजतक बहुत सोच-समझ कर प्रयोग नहीं किए जीवन में। इसके बावजूद, जो भी मिला अच्छा ही मिला। इससे भी अधिक सौभाग्य की बात ये रही मेरे लिए कि जहाँ भी गया, अच्छे लोग ही मिले।

23 अक्टूबर, 2018 को राहुल रोशन सर ने एक लड़के को अपने घर बुलाया था, वहीं से ये यात्रा शुरू हुई थी। ना कोई इंटरव्यू, ना कोई टेस्ट, ना पिछली सैलरी स्लिप देखी, ना मार्क्स… कुछ नहीं। उस विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करते-करते ये समय कब बीत गया पता ही नहीं चला।

एक साहित्यकार संपादक अजीत भारती सर के मार्गदर्शन में ठोक-पीट शुरू हुई और वही कारण रहा कि जल्दी-जल्दी सारी चीजें सीखनी पड़ीं। इसके बाद चंदन कुमार सर के नेतृत्व में कार्य करना का अवसर मिला और पत्रकारिता से लेकर जीवन तक का प्रशिक्षण यहीं प्राप्त हो गया। जब भी उनको देखा, बैल की तरह काम करते हुए ही देखा। संपादक के लिए इस तरह के शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए, लेकिन आज शायद ये धृष्टता माफ़ हो जाए।

अजीत झा सर से प्रोफेशनल के अलावा व्यक्तिगत जुड़ाव भी हुआ, जब भी कहीं अटका तो सबसे पहले यही दरवाजा खटखटाया। जयंती मिश्रा जैसी दोस्त मिली यहाँ। वहीं, सुधीर राणा सर के साथ दर्शन के सिद्धांतों से लेकर ऐतिहासिक विषयों तक पर बहस होती रही, अपना भण्डार समृद्ध ही हुआ।

राहुल पांडेय जी जैसे ग्राउंड जीरो से जुड़े व्यक्ति के साथ मिल कर काम करने का मौका मिला। इसी बीच अर्पित त्रिपाठी जैसे उद्दंड लड़के भी मिले, इसकी बात कर के मैं अपने शब्द जाया नहीं करना चाहता।

ख़ैर, अब उस संस्थान को अलविदा कह रहा हूँ जिसने मुझे गढ़ा है, जहाँ के लोगों ने मुझे वो बनाया है जो मैं आज हूँ। पता नहीं आगे क्या है, जो है सो कैसा है, ये रास्ता कहाँ जाता है – लेकिन, हमेशा की तरह आज भी मेरा समय के बहाव में रमे रहने में विश्वास है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Vipul रेगे

    September 20, 2024 at 8:22 am

    इनके जैसे गोदी पत्रकार कबसे हो गए?

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