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मोदी सरकार सुधीर चौधरी पर साल के पंद्रह करोड़ लुटा रही, ये बात अर्नब को खल गई!

सुरेंद्र सिंह-

एक तो सोशल मीडिया के प्रभाव में ब्रॉडकास्टिंग न्यूज़ चैनलों की बैंड बज रही है। वर्ष 2014 में मोदी सरकार आई और एक तरह से जैसे न्यूज चैनलों का पतन ही हो गया। ऊपर से सरकार ने वही एंकर स्थापित होने दिए जो सरकार की मर्जी से चले। एक तरह से प्रवक्ता ही निर्धारित किए समझिए। विपक्ष के अर्थों में गोदी मीडिया समझिए। ऐसे डूबते ब्रॉडकास्ट न्यूज चैनलों में आज कोई पैसा और नाम कमा रहा है तो वह है मोदी एंकर्स।

एक दशक पहले जितने भी गोदी मीडिया कहलाने वाले एंकर्स हैं वो बेचारे कुछ खास पैसा कमा-धमा नहीं रहे थे। डूबे हुए एंकर्स थे। दरवाजे पर बिना बंधे कुत्ते थे।

जर्नलिस्ट के खेमे से तो बिल्कुल बाहर थे। आज भी ये जर्नलिस्ट के कद से बाहर ही हैं। इनमें से अर्नब गोस्वामी ही अकेले ऐसे पत्रकार थे जो टाईम्स now में दबंग पत्रकार थे। समय बदला, सरकार के सह से ही अपना न्यूज चैनल डाले और सरकार के कसीदे ये भी पढ़ने लगे। चलिए, सब कुछ ठीक ही था। परन्तु सबसे ठंडे, औसत एंकर, फेक स्टिंग में बदनाम, तिहाड़ जेल जाने वाले पत्रकार सुधीर चौधरी हैं। सोशल मीडिया पर तिहाड़ी पत्रकार कहा जाता हैं। और ये खासकर मोदी जी और अमित शाह को पसंद आए। इस तरह के व्यक्तित्व दाग-धब्बे लगे प्राणी इन दोनों महाशय को पसंद आते हैं।

अब सुधीर चौधरी दूरदर्शन में आया, यहां तक तो ठीक है। लेकिन एक प्रोग्राम के एंकरिंग के लिए सालाना पंद्रह करोड़ केजरीवाल के शीश महल जैसा हो गया। वह भी पब्लिक का पैसा। इसका इतना दोहन?

एक औसत एंकर को इतना? पंद्रह करोड़ तो प्राइवेट चैनलों की कमाई नहीं रह गई, जब से मोदी सरकार आई। और इन चैनलों में ब्रॉडकास्टिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, स्टूडियो, कैमरा, एडिटिंग, एडिटर्स, क्रिएटिव, MCR, PCR, VO, प्रोमो तमाम तरह के एंप्लॉयर्स को वेतन देना, और भी साथ में तमाम खर्चे। अब किसी को ठीक लगे या न लगे, चाहे किसी को बुरा लगे, लेकिन कभी दमदार, लाऊडली सरकार के तंत्रों पर पंच प्रहार करने वाले इंडिया में एकमात्र जर्नलिस्ट अर्नब NDTV में कम और बाद में मुख्यतः टाईम्स now से उभरे। अर्नब के टाइम्स now से निकल जाने के बाद अब तो टाईम्स now सरकारी मुंगफली बेंच रहा है।

खैर…अब अर्नब गोस्वामी को ये पंद्रह करोड़ वाली बात खल गई है। हंस चुगेगा दाना, कौआ मोती खायेगा? वाली बात हो गई। वैसे मैं कहता चलूं कि दूरदर्शन के टेंडरगिरी में मिल बांटकर खाओ पीओ वाली ही बात रही है। सुधीर चौधरी के program के लाईव 40-50K व्यू आता है। और इसके लिए सोचिए पंद्रह करोड़ रुपए? सरकार पब्लिक के पैसे किस तरह उड़ा रही है? तीन वर्ष का कॉन्ट्रैक्ट हैं। यानी 45 करोड़ रुपए? मोदी सरकार में जितनी खुलेआम, सरेआम लूट-पाट है, इतनी लूट किसी सरकार में नहीं रही। मोदी सरकार में सबसे ज्यादा देश को अनपढ़, अपराधी लूट रहे है।

खैर… यही बात है कि आज दिन-रात माथा-पच्ची करके ब्रॉडकास्टिंग न्यूज़ चैनलों को मिलता कुछ नहीं है। अन्ततः अर्नब की अपनी आत्मा की गर्जना टाईम्स now वाली लौट आई (शेर के आगे बिल्ली की म्याऊं को पंद्रह करोड़) भाई मोदी सरकार की तो यही खासियत है कि जो जितना अनपढ़ वह उतना ऊपर। जिसके पास जितना दाग वह और ऊपर। खैर…अर्नब भाई लाउड रहिए। शेर दहाड़ना छोड़ दे तो चूहे भी शेर के मूंछों से खेलने लगते हैं। दहाड़िए। भले ही सरकार आपका जो हश्र करे। वैसे इस दहाड़ से लोग आपके पास लौटने लगे हैं। लेकिन आप कायम रहे तो ठीक।

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