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पत्रकारों की समस्याओं से श्रम मंत्री को अवगत कराएंगे सांसद अरुण गोविल

न्यूज पेपर एम्प्लाइज यूनियन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन..

शशिकांत सिंह-

सिनेमा से संसद तक पहुंचे अरुण गोविल न केवल अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं, बल्कि अपने स्वभाव एवं व्यवहार से साबित किया है कि वह आज भी अपनों से अलग नहीं हैं। इसकी बानगी हाल में तब मिली; जब लोक सभा में अरुण गोविल ने सिनेमा जगत के उन कर्मचारियों-तकनीशियनों का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जिनके काम करने की अवधि से लेकर उनकी मजदूरी के भुगतान तक- कुछ भी सुनिश्चित नहीं है!

मेरठ के सांसद अरुण गोविल के इस सहयोग हेतु आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से मुंबई स्थित ‘सिंटा’ हाउस में उनका सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह का आयोजन फिल्मी दुनिया की 32 प्रमुख यूनियनों का नेतृत्व करने वाले महासंघ ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लॉईज’ (FWICE) ने किया था, जिसके अध्यक्ष वी. एन. तिवारी संग ‘सिंटा’ (सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन) की प्रेसीडेंट एवं अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने श्री गोविल के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की- ‘आगे बढ़ने के बाद अवसर मिले तो अपनों के लिए क्या-क्या सकारात्मक किया जा सकता है, इसका सबसे श्रेष्ठ उदाहरण अरुण गोविल जी हैं!’ इस अवसर पर ‘सिंटा’ की कार्यकारिणी के सदस्य मुकेश ऋषि और फेडरेशन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने कुछ समय पहले ही 29 बिखरे हुए कानूनों को इकट्ठा करते हुए चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिसका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और श्रमिकों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इनमें कार्य के घंटे, न्यूनतम वेतन, पीएफ व ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव आदि जैसे प्रावधान शामिल हैं। चूंकि इससे ठीक पहले ही श्री गोविल ने लोक सभा में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े श्रमिकों-तकनीशियनों की व्यथा संबंधी मुद्दा बड़ी प्रमुखता से उठाया था; इसीलिए फेडरेशन ने उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। यहां ‘सिंटा’ की जनरल सेक्रेटरी व अभिनेत्री उपासना सिंह ने सांसद का ध्यान इस समस्या की तरफ आकृष्ट किया कि हमारे जूनियर कलाकारों का भुगतान तीन-तीन महीने बाद किया जाता है, जिसके चलते उन्हें खुद का भी जीवनयापन करना दुश्वार हो जाता है!

इस मौके पर पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि कानून तो पहले भी पर्याप्त थे, नई संहिताओं को सरकार लागू कैसे करवाएगी? अभिनेता-सांसद अरुण गोविल ने सभी को आश्वस्त किया- ‘आप निश्चिंत रहिए… सम्पूर्ण भारतवर्ष देख रहा है कि जमीन पर अब काम हो रहा है। यह मोदी सरकार द्वारा लाई गई संहिताएं हैं, जो सिर्फ़ कानून नहीं बनाती, अपितु उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ लागू करवाने के लिए भी जानी जाती है।’

अखबारों के कर्मचारियों के राष्ट्रीय संगठन ‘न्यूजपेपर इम्प्लॉईज यूनियन ऑफ इंडिया’ (NEUIndia) के अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने जब यह बताया कि नई श्रम संहिताओं में आप लोगों ने ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट- 1955′ को कमजोर किया है, तब अरुण गोविल ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया- ‘मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है… आप एक रिप्रजेंटेशन दे देंगे तो जरूर देखूंगा कि मैं इसके लिए क्या कर सकता हूं।’ तत्पश्चात श्री सिंह सहित इस यूनियन के उपाध्यक्ष शशिकांत सिंह और कोषाध्यक्ष ताराचंद राय ने श्री गोविल को जब संबंधित ज्ञापन दिया, तब भी सांसद ने आश्वस्त किया कि यूनियन के सुझावों को वह केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के समक्ष पहुंचाने का काम करेंगे।

शशिकांत सिंह, न्यूज पेपर एम्प्लाइज यूनियन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष हैं।

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