राकेश पांडेय-
अत्यंत दुःखद समाचार… हरदोई में निर्भीक पत्रकारिता के रूप में पहचान रखने वाले “अरुणेश बाजपेई” जी के दुःखद निधन के समाचार पाकर स्तब्ध हूँ। उनकी निर्भीक पत्रकारिता का साक्षी रहा हूँ। उन्होंने झुककर समझौता करना न पसन्द कर पत्रकारिता को अलविदा कहना पसंद किया।
एक समय वे और अमर उजाला नाम एक दूसरे के पर्याय बन गए थे। धर्मशाला रोड़, पत्रकारिता का एक मजबूत स्तम्भ माना जाता था। समाज सेवा में भी वे सदैव अग्रणी रहे। वरदान चेरिटेबल ट्रस्ट में उनकी सक्रियता ट्रस्ट को नई ऊंचाइयों तक ले गयी। रफी अहमद इंटर कालेज के प्रबंधक भी रहे। टैक्स एडवोकेट के रूप में भी वे अग्रणी रहे। उनकी कमी पूरी नही की जा सकती। वे सदैव स्मरणीय रहेंगे। ॐ शांतिः
प्रशांत पाठक-
आज हरदोई की पत्रकारिता ने एक मजबूत आधार स्तंभ खो दिया। अमर उजाला हरदोई में कई दशक तक जिले के प्रमुख के रूप में कार्य करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अरुणेश बाजपेई चाचा के निधन का समाचार बेहद पीड़ादायक है।

हालांकि वो बीते कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया को किनारे किए हुए थे और बीते कुछ समय से बीमार भी थे, पत्रकारिता के दौरान एक वो समय था जब हरदोई की राजनीति हो या प्रशासनिक फैसले उनकी कलम और उनकी राय के वजन से हुआ करता था।
प्रतिबिंब जैसी संस्था के जरिए निशुल्क सांस्कृतिक एक्टिविटी और साहित्य को आगे बढ़ाने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है एक समय था उनका सिक्का बोलता था और वह सिक्का ईमानदारी, निर्भीकता और जनपक्षधर पत्रकारिता का था।
मेरे साथ उनका पारिवारिक जुड़ाव रहा। इसी नाते वे पत्रकारिता छोड़ने के बाद भी हरदोई की खोज-खबर लिया करते थे सिर्फ खबर नहीं, उसके पीछे की सच्चाई जानना उनकी आदत थी।
आज जब हम कहते हैं कि पत्रकारिता में अब कोई स्टार नहीं बचा तो यह कमी और भी गहरी महसूस होती है क्योंकि अरुणेश बाजपेई चाचा जैसे लोग सिर्फ पत्रकार नहीं होते वे एक दौर, एक मानक और एक संस्कार होते हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक-संतप्त परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दे।
हरदोई की पत्रकारिता आपको हमेशा याद रखेगी।


