नई दिल्ली | डिस्कवरी चैनल की तरफ से जेल में बंद कथावाचक आसाराम बापू पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी। 25 जनवरी को रिलीज की गई इस डॉक्यूमेंट्री का नाम था- ‘क्लेट ऑफ फेथ: आसाराम बापू?’।
डॉक्युमेंट्री के रिलीज़ के बाद आसाराम के समर्थकों ने धमकियां दीं और इसका विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि डिस्कवरी चैनल के ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म और उसके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि डॉक्युमेंट्री के विरोध में सोशल मीडिया पर भी धमकियां और नकारात्मक टिप्पणियां की गईं। मुंबई कार्यालय में जबरन घुसने का प्रयास भी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और पुलिस को निर्देश दिया कि वे इस मामले में सुरक्षा प्रदान करें और उचित कदम उठाएं।
समर्थकों का दावा है कि डॉक्युमेंट्री में आसाराम की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया है, जबकि चैनल ने इसे तथ्यों पर आधारित बताया है।

आसाराम का पूरा मामला क्या है?
आसाराम, जिनका पूरा नाम आसुमल सिरूमलानी हरपलानी है, एक स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु हैं जो एक समय लाखों अनुयायियों के बीच प्रसिद्ध थे। लेकिन समय के साथ वे कई विवादों और गंभीर आपराधिक मामलों में फंस गए। उनके खिलाफ मुख्यतः निम्नलिखित गंभीर मामले दर्ज हुए:
- नाबालिग से दुष्कर्म का मामला (2013)
एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया। यह घटना 2013 में राजस्थान के जोधपुर में स्थित उनके आश्रम की है। लड़की का कहना था कि उसे “झाड़-फूंक” के नाम पर बुलाया गया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया।
इस मामले में आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह सजा नाबालिगों के यौन शोषण से संबंधित POCSO एक्ट के तहत दी गई।
- अन्य दुष्कर्म के मामले
आसाराम पर गुजरात में भी दो बहनों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया। इनका कहना था कि आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं ने उनके साथ यौन शोषण किया। यह मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया में है।
- हत्या और सबूत मिटाने का आरोप
उनके आश्रम में दो बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। बच्चों के शव आश्रम के पास ही एक नहर से मिले थे। आरोप था कि इन बच्चों की मौत तांत्रिक क्रियाओं के कारण हुई।
- आर्थिक घोटाले और जमीन पर कब्जा
आसाराम और उनके आश्रम पर अवैध रूप से जमीन कब्जाने और अनुयायियों से पैसा उगाहने के आरोप भी लगे हैं।
- आरोपों का दमन और धमकी
जिन लोगों ने आसाराम के खिलाफ गवाही दी या उनके खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें धमकियां दी गईं। कई गवाहों पर जानलेवा हमले हुए, और कुछ की हत्या कर दी गई।
आसाराम की सजा
2018 में, जोधपुर की एक विशेष अदालत ने नाबालिग के यौन शोषण के मामले में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें वर्तमान में जेल में रखा गया है। उनके बेटे नारायण साईं पर भी अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी है।
आसाराम के अनुयायी और विरोध
आसाराम के मामले सामने आने के बाद भी उनके अनुयायियों की संख्या काफी बड़ी है। वे अक्सर उनके समर्थन में प्रदर्शन करते हैं और उनके खिलाफ मीडिया या डॉक्युमेंट्री को लेकर विरोध दर्ज कराते हैं।
आसाराम का यह मामला भारत में धर्म के नाम पर होने वाले दुरुपयोग और यौन शोषण के मामलों का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।


