‘नेशनल दस्तक’ वेब न्यूज चैनल से अलग हो गए अशोक दास

‘दलित दस्तक’ मैग्जीन के संस्थापक और प्रधान संपादक अशोक दास ‘नेशनल दस्तक’ नामक वेब न्यूज चैनल से अलग हो गए हैं. उन्होंने इस बाबत पिछले दिनों फेसबुक पर जो कुछ लाइनें लिखकर अपने जानने वालों को सूचित किया, वह इस प्रकार है :

”मेरे मित्रों, ‘दलित दस्तक’ के पाठकों और शुभचिंतको के लिए एक जरूरी सूचना है। सूचना यह है कि मैं ‘नेशनल दस्तक’ वेबसाइट से अलग हो गया हूं। बात बस इतनी सी है कि जिन महोदय के साथ मैंने जिस आपसी समझ और विश्वास के साथ यह काम शुरू किया था, उसमें दिक्कत आने लगी थी। स्थिति ऐसी आ गई थी कि मेरी खुद की मैगजीन ‘दलित दस्तक’ का काम प्रभावित होने लगा था। आप सब जानते हैं कि मेरे लिए ‘दलित दस्तक’ सबसे अहम है। सो मैंने दलित दस्तक को चुना। जल्दी ही ‘दलित दस्तक’ की अपनी वेबसाइट लांच की जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि ‘नेशनल दस्तक’ वेब न्यूज चैनल के प्रबंधन की तरफ से इस वेब चैनल के लांचिंग समारोह में ‘दलित दस्तक’ से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को अलग रखा गया और उन्हें मंच नहीं दिया गया. टीआरपी के लिए दलित मुद्दों की बात की जाती है लेकिन मंच से बाबासाहेब की बात कहने से भी मना किया गया. ‘नेशनल दस्तक’ के समारोह में यहां तक कहा गया कि ‘जय भीम’ नहीं बोलना है. ‘दलित दस्तक’ मैग्जीन का नाम लेने से रोका गया.

यह सब चीजें अशोक दास के लिए कष्टप्रद थीं. जो ‘दलित दस्तक’ मैग्जीन जय भीम के नारे के साथ शुरू हुई थी उसके संस्थापक और संपादक अशोक दास को ‘नेशनल दस्तक’ लांच करने के दौरान कई सारी पाबंदियों से घेरने की कोशिश की गई. यह बात अशोक दास को नागवार गुजरी और धीरे धीरे जब वैचारिक अंतरविरोध बढ़ता गया व पानी सिर से बहना शुरू हो गया तो उन्होंने एक रोज ‘नेशनल दस्तक’ से अलग हो जाने का फैसला कर लिया. इसके बाद अशोक ने दलित दस्तक मैग्जीन की वेबसाइट दलितदस्तक डाट काम लांच कर दिया.

उल्लेखनीय है कि ‘नेशनल दस्तक’ मीडिया वेंचर में अशोक दास को बतौर पार्टनर शामिल किया गया था. अशोक ने देखा कि जब उनकी मैग्जीन और पब्लिकेशन का काम प्रभावित हो रहा है, साथ ही प्रबंधन के साथ आपसी समझदारी विकसित नहीं हो रही है तो उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया. अशोक ने नेशनल दस्तक के सारे स्टॉफ और प्रबंधन को मेल करके सूचित कर दिया कि अब वे नेशनल दस्तक के साथ नहीं हैं.

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Comments on “‘नेशनल दस्तक’ वेब न्यूज चैनल से अलग हो गए अशोक दास

  • Kamal kant singh says:

    जो हुआ वो नही होना चाहिए था। में अक्सर आप के न्यूज चनल को सुनता था।
    ठीक है अब हमें कुछ ओर अच्छा नया मिले गा।
    अपनी पत्रिका के माध्यम से समाज को आप रूबरू करते रहे गे ये मेरी ईश्वर से प्राथना है।

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