नई दिल्ली/गुवाहाटी: असम सरकार द्वारा नए साल के मौके पर पत्रकारों को दिए जा रहे मोबाइल फोन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गुरुवार को कम से कम दो पत्रकारों ने सरकार की ओर से दिए गए ये मोबाइल फोन वापस कर दिए। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) में पंजीकृत 2,200 से अधिक पत्रकारों को यह मोबाइल फोन उपहार के तौर पर दिए जाने हैं।
गुवाहाटी में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ पत्रकारों को मौके पर ही मोबाइल फोन सौंपे गए, जबकि शेष पत्रकारों को माघ बिहू (14 जनवरी) तक ज़िला आयुक्तों के माध्यम से ये फोन मिलने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि असम में अगले चार महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि सभी डीआईपीआर कार्डधारी पत्रकारों को सैमसंग गैलेक्सी F17 मोबाइल फोन दिया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, सरकार की ओर से पत्रकारों को हर वर्ष किसी न किसी रूप में उपहार दिए जाते रहे हैं। पूर्व में लैपटॉप बैग, लेदर बैग और पानी की बोतल जैसे सामान भी वितरित किए जा चुके हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस मोबाइल फोन की कीमत 12,600 से 16,000 रुपये के बीच बताई जा रही है।
हालांकि, इस पहल पर सवाल भी उठने लगे हैं। अब तक ‘द टेलीग्राफ’ के पत्रकार उमानंद जैसवाल और ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के बिकाश सिंह ने सरकार की ओर से दिए गए मोबाइल फोन लौटा दिए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2011 में असम की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भी मान्यता प्राप्त पत्रकारों और पत्रकारिता में 10 वर्ष पूरे कर चुके पत्रकारों को लैपटॉप वितरित किए थे।
चुनाव से पहले छात्रों और महिलाओं के लिए घोषणाएं
इसी दिन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने चुनावी माहौल के बीच छात्रों और महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जुड़ी कई योजनाओं की भी घोषणा की। ‘निजुत मोइना’ योजना की तर्ज पर सरकार ने ‘बाबू असोनी’ कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके तहत पात्र स्नातकोत्तर छात्रों को 2,000 रुपये प्रतिमाह और पात्र स्नातक छात्रों को 1,000 रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरुनोदोई योजना के तहत गरीब परिवारों की महिला मुखिया को मिलने वाली 1,250 रुपये प्रतिमाह की सहायता फिलहाल स्थगित की जाएगी। इसके स्थान पर 20 फरवरी को लाभार्थियों को 8,000 रुपये की एकमुश्त राशि ‘अग्रिम बोहाग बिहू उपहार’ के रूप में दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय चुनाव के दौरान लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि चार महीने की किस्त और बोनस एक साथ प्रदान किया जा सके।
इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार सौमित्र राय लिखते हैं-
असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल में मीडिया कर्मियों को स्मार्टफोन बांटे। सभी पत्तलकारों ने ये नाजायज़ गिफ्ट झपट लिए। लेकिन इकोनॉमिक टाइम्स के बिकाश सिंह और टेलीग्राफ के उमानंद जायसवाल ने गिफ्ट लेने से मना कर दिया।
उल्टे दोनों ने हिमंता की इस रिश्वतखोरी की खबर भी छाप दी। यही सही पत्रकारिता है। जिसकी खबर करने जा रहे, उससे कोई गिफ्ट, यहां तक कि चाय तक नहीं लेना चाहिए।
आज इन दोनों चेहरे को देख रहा हूं तो मुझे पुराने दिनों के साथ कई दलाल नज़र आते हैं। ये दलाल आज कार, बंगले लेकर बैठे हैं। लेकिन मुझ जैसी दिलेरी किसी में नहीं।
वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने लिखा है-
ख़ैरात कब बंटती है? असम में अगले चार महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं…
हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) में पंजीकृत 2,200 से अधिक पत्रकारों को स्मार्ट मोबाइल फोन गिफ्ट में बांटना शुरू किया है…
गुरुवार को गुवाहाटी में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ पत्रकारों को मोबाइल फोन दिए गए, जबकि अन्य को माघ बिहू (14 जनवरी) तक ज़िला आयुक्तों के माध्यम से ये फोन मिलने की उम्मीद है…
सभी डीआईपीआर कार्डधारकों को सैमसंग गैलेक्सी F17 दिया जाएगा. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस मोबाइल फोन की कीमत 12,600 रुपये से 16,000 रुपये के बीच बताई जा रही है…
असम सरकार की ओर से नए साल के तोहफे के रूप में दिए गए मोबाइल फोन में से कम से कम दो पत्रकारों ने गुरुवार को ये उपकरण लौटा दिए हैं. ‘द टेलीग्राफ’ के उमानंद जैसवाल और ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के बिकाश सिंह ने ये मोबाइल फोन लौटा दिए हैं…
बिहार की तर्ज़ पर असम में भी चुनाव से पहले छात्रों और महिलाओं के खातों में एकमुश्त रकम भेजने की तैयारी है…
क्या कहा ये चुनावी रिश्वत है? केचुआ (केंद्रीय चुनाव आयुक्त) से पूछिए. ये वोट के बदले कोई घूस नहीं बल्कि नज़राना है…
हिमंता बिस्वा शर्मा वही नेता है जो कांग्रेस में थे तो बीजेपी इनके भ्रष्टाचार के तराने दिन रात गाती थी. लेकिन बीजेपी में आए तो वाशिंग मशीन से धुल कर पाक़ साफ़ हो गए…
विडंबना है कि हिमंता बिस्वा शर्मा और कपिल मिश्रा जैसे टर्नकोट जो कभी दिन रात बीजेपी को कोसते थे, वो पाला बदलते ही रातोंरात सबसे ज़ोर से हिन्दुत्व का राग अलापने लगे…
ख़ैर अच्छा लगता है ये देखना कि आज भी उमानंद जैसवाल और बिकाश सिंह जैसे रीढ़ की हड्डी वाले पत्रकार मौजूद हैं. और अनुराग द्वारी जैसे रिपोर्टर भी. अनुराग ने इंदौर में दूषित पानी से मौतों जैसी संवेदनशील घटना पर ‘घंटा’ जैसा असंवेदनशील बयान देने वाले MP के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को ही एक्सपोज़ करके रख दिया. ये बात दूसरी है कि अनुराग के अपने चैनल NDTV ने ही इस मुद्दे पर घुटने टेकना बेहतर समझा और संबंधित क्लिप ही डिलीट कर डाली…


