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रील्स सेंसलेस कंटेंट है, एकाग्रता की कमी से एक पूरी पीढ़ी गुणवत्ताहीन होने के कगार पर!

अभिषेक चौरे-

अभी तिग्मांशु धूलिया जी का इंटरव्यू सुन रहा था। उसमें उन्होंने एक बड़ी पते की बात कही। वह यह कि अभी जो नए लोग आ रहे हैं उनमें एकाग्रता की बहुत कमी है। वे किसी चीज पर ध्यान नहीं लगा पाते। जिसे अंग्रेजी में अटेंशन स्पैन कहते हैं, आजकल वह छोटा हो गया है। दूसरी बात यह कि लोगों के पास जमाने भर की इन्फार्मेशन आ गई है, लेकिन इन्फार्मेशन एनालाइज करने की क्षमता कम हो गई है।

उदाहरण के लिए आजकल स्मार्टफोन पर दो तरह के लोग सक्रिय हैं, एक वे जो रील्स देखा करते हैं, उनके विषय में बात करने का मतलब नहीं है, क्योंकि रील्स सेंसलेस कंटेंट है। ज्यादातर इनमें क्या दिख रहा है, बेसिरपैर के चुटकुले, द्विअर्थी बातें और अधकचरा नाच गाना। इस सब का कोई सब्सटेंस नहीं है, आप उससे कुछ हासिल नहीं करते।

दूसरी तरह के लोग उत्सुक हैं, वे बहुत कुछ जानना चाहते हैं। उनके लिए यूट्यूब पर ढेरों वीडियो और पॉडकास्ट उपलब्ध हैं, जो विभिन्न विषयों की बढ़िया जानकारी देते हैं। लेकिन हर इंसान को हर विषय के बारे में जानना क्या वाकई आवश्यक है? एक ही व्यक्ति अगर साहित्य, संगीत, जियो पॉलिटिक्स, डिफेंस, मेडिसिन और इकोनॉमिक्स के बारे में जानकारी हासिल करेगा, तो वह हर क्षेत्र की ऊपरी समझ तो रखने लगेगा लेकिन किसी भी विषय में निष्णात नहीं हो पाएगा।

बस आज की बड़ी समस्या यही है, श्रेष्ठ कोटि का सृजन करने के लिए दोनों ही तरह के लोग अनुपयुक्त हैं। यदि बेहतर काम करना है, तो अपने क्षेत्र में गहरे उतरना पड़ता है। बिना लम्बा ध्यान लगाए, बिना समय का निवेश किये और बिना विचार मंथन के कोई भी कालजयी कार्य संभव नहीं है। इसीलिये हमारे पास लोगों की भीड़ तो है, लेकिन एक्सीलेंस कहीं-कहीं दिखती है।

यहीं फेसबुक पर देखिये, लोगों को लिखने की बहुत जल्दी है। कोई भी मुद्दा आया फटाक से लिख दिया। रोज लिखा, हर विषय पर लिखा, बार-बार लिखा, जो मन में आया वो लिखा। लेकिन क्या आपका लिखा ऐसा है, कि कोई संजो कर रखें? क्या आपके लिखे को लोग आगे बढ़ाते हैं? अगर नहीं, तो आपने लिखा तो बहुत है पर शायद पढ़ा कम है। क्योंकि जो सौ पढ़कर एक लिखता है उसकी बात में बात होती है।

कुल मिलाकर कहने का मतलब ये है कि अब थोड़ा ठहर कर अपनी रुचि को पहचान कर उस क्षेत्र में गहरे उतरने का समय है। वरना एक पूरी पीढ़ी गुणवत्ता हीन हो जाएगी, एक तो वैसे ही एआई का संकट सिर पर है उसे पर अगर हमने विश्लेषण और नवोन्मेष की क्षमता खो दी तो भविष्य कठिन होने वाला है।

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