सलाम रवीश कुमार, बिहार के सामाजिक परिवर्तन की कहानी देश के सामने रखने के लिए

Nachiketa Desai : सलाम रवीश कुमार! बिहार के सामाजिक परिवर्तन की कहानी देश के सामने रख रहे हैं. आज के कार्यक्रम ‘ये जो मेरा बिहार है’ में रवीश ने दिखाया कैसे नितीश कुमार ने बिहार की लड़कियों को मुफ्त में साइकिल दे कर बिहार की लड़कियों को आज़ादी दिलाई, उड़ान भरने का सपना दिखाया.

Zafar Irshad : पहली बार पत्रकार रविश कुमार की नज़रों से एक विकसित बिहार देख रहा हूँ. अभी तक फ़िल्मकार प्रकाश झा की नज़रों से फिल्मों में बिहार देखा था, जहाँ अपहरण बलात्कार साधू यादव तेज़ाब काण्ड गरीबी आदि आम बात थी और मेरी निगाह में प्रकाश झा का बिहार ही था, बाकी रही सही कसर अखबारों में जंगलराज की ख़बरें पढ़ पढ़ कर बिहार की एक पिछड़ी इमेज बन गयी थी. लेकिन रविश ने प्राइम टाइम में जो बिहार के विकास की खबरें दिखाई उससे दिमाग के जाले कुछ हद तक साफ़ हुए. अब आज की रिपोर्ट ही लें. लड़कियां बेख़ौफ़ होकर साइकिल से पढ़ने स्कूल जा रही हैं. लड़कियां अखबार बेच रही हैं. पक्की सड़के हैं छोटे छोटे गाँव में. इससे पहले एक रिपोर्ट में देखा था कि गाँव में भी 20 घंटे तक बिजली आती है. वहाँ भी पंखे टीवी कूलर की बिक्री खूब हो रही है. इतनी प्रगति तो हमारे उत्तर प्रदेश के गाँव में नहीं हुई है. रविश की रिपोर्ट देखने के बाद बिहार देखने का मन कर रहा है कि जा के खुद देखें कि रविश का बिहार ठीक है या प्रकाश झा का जंगल राज वाला बिहार है. आखिर दोनों बिहारी हैं. बस नज़रिये का फ़र्क़ है शायद.

Amitesh Kumar : रवीश ने कहा कि बिहार में साइकिल चलाती लड़कियां इसकी ब्रांड एंबेसडर है इनके बारे में भी बात होनी चाहिये. मैं यहां जोर देकर कहना चाहता हूं कि इनके बारे में और इससे हुए बदलाव को लेकर भी बात होती है. यह योजना नीतीश के पहले कार्यकाल की थी, जिसकी सफ़लता और लोकप्रियता भी एक कारण था कि वो जोरदार बहुमत से सत्तासीन हुए. लेकिन इस कार्यकाल में ऐसी कोई योजना उनके खाते में नहीं थी. जैसा कि इस कार्यक्रम में आपने ही दिखाया कि लड़कियां कोचिंग जा रही हैं स्कूल और कालेज की बजाए. होना यह चाहिये था कि नौवीं की लड़कियों को साइकिल देने के बाद दसवीं पास होने के बाद वो क्या करेंगी, कहां जायेंगी इसकी व्यवस्था की जाती. बारहवीं तक कुछ स्कूलों को उत्क्रमित किया गया लेकिन उनमें न शिक्षक है ना संसाधन. कालेजों तो है हीं नहीं. जिला मुख्यायलयों को छॊड़कर सरकारी कालेज कम ही हैं. प्राइवेट कालेजों में तो केवल फार्म भरा जाता है परीक्षा कराई जाती है. वैसे बिहार में विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय अब केवल परीक्षा नियंत्रण केंद्र है. पढ़ाई तो वहां होती ही नहीं. अब ये लड़कियां बारहवीं के बाद भी बेहतर शिक्षा पायें इसकी व्यवस्था सरकार ने की होती, जिसका मौका था, तो नीतीश को इतना जोड़ तोड़ नहीं करना पड़ता.

Preeti Singh : वाह बिहार (गाँव) की लड़कियों और उनके मम्मी पापा जो अड़ोसी पडोसी और रिश्तेदारों के चूँ चा करने के बावजूद तुम साइकिल चलाती हो और घरवाले चूँ चा नजरअंदाज करते हैं, तुम लड़की हो और तुम्हे हर वो चीज मुश्किल से मिलती है जो आधी आबादी को बिन मांगे मिल जाती है पर फिर भी तुम ईमानदार हो भैया (लड़के) से… यही तुम्हारी खासियत है 🙂 सौजन्य – प्राइम टाइम NDTV

वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता देसाई, जफर इरशाद, अमितेश कुमार और प्रीति सिंह के फेसबुक वॉल से.



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Comments on “सलाम रवीश कुमार, बिहार के सामाजिक परिवर्तन की कहानी देश के सामने रखने के लिए

  • Sab sahi likhe ho yaar intro gadbad kar diye tum log. Ravish ek bar bhi nhi bole ki Nitish ne cycle diya…ye political statement nhi diya unhone ….

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  • 21 vi shadi me cycle par larki ko scholl jate dekh use vikash ka paimana man lena thik nahi kaha ja sakta, ravish jee ko un sadko ki halat bhi emandari se dikhani chaiye , jahan ladkiyoa ki cycle roj puncture hoti hai tuuti hai, larkiya girti hain,

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