Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

मध्य प्रदेश

धीरेंद्र शास्त्री के बागेश्वर धाम आश्रम में लाखों रुपये की बिजली चोरी, वीडियो देखें

सुनील सिंह बघेल-

बागेश्वर धाम में बिजली चोरी… भरी दोपहरी… 40 डिग्री तापमान… हजारों बल्बों की रोशनी से चमचमाती सैकड़ों दुकानें… शायद ही कोई ऐसी दुकान मिली हो जहां 5–10 बल्ब भरी दुपहरी में धूप से मुकाबला करते नजर न आ रहे हों। बिजली की बर्बादी का यह नज़ारा दिखा Dhirendra Shastri के बागेश्वर धाम में।

2 दिन पहले जाने का मौका मिला। लाखों-करोड़ों की कमाई के बावजूद बदइंतजामी अपनी जगह कायम है। लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन कहीं जन-सुविधा (टॉयलेट) नजर नहीं आएंगे। पहाड़ की तलहटी में बसा यह स्थान है, लेकिन छाया के लिए एक पेड़ तक नजर नहीं आता। जिस तरह पहाड़ी को काटकर कब्जा किया जा रहा है, उसी तरह मानो बचे-खुचे पेड़ों को काटकर किराए पर देने के लिए हजारों दुकानें खड़ी कर दी गई हैं।

धीरेंद्र शास्त्री जी, धाम के ट्रस्ट को यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और दान से इतनी कमाई होती है कि आपने 200 करोड़ का कैंसर अस्पताल बनाने का संकल्प लिया है — जो कि बहुत अच्छी बात है। लेकिन जरा सोचिए, इस बर्बादी से धाम में आने वाली जनता को क्या संदेश जा रहा है?

खुलेआम लाखों की बिजली चोरी — वह भी आपके संरक्षण में? बेहद दुखद है। चोरी उतनी बड़ी बात नहीं, जितना दुखद प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी है।

धीरेंद्र भाई, आप खुद को सनातन का पहरेदार बताते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि प्रकृति की पूजा तो सनातन धर्म का मूल आधार है।

1000 से ज्यादा दुकानें होंगी। शायद ही किसी दुकान में बिजली का मीटर दिखे। लेकिन कोई दुकानदार यह जिम्मेदारी नहीं निभाता कि उजाला होते ही लाइट बंद कर दे।

दुकानदारों से पूछा तो बताया गया: “हमारी दुकानों में बंद करने का बटन ही नहीं है।” “बल्ब तभी बंद होते हैं जब लाइट जाती है।” “पंखा-लाइट सब कॉमन है, हम तो सिर्फ किराया देते हैं।” “बिजली आश्रम की है।” हमें तो सिर्फ दुकान का किराया देना होता है।

हजारों रुपये किराए पर दुकान लेने वाले 80-90% दुकानदार उत्तराखंड, दिल्ली, गाजियाबाद, जम्मू-कश्मीर, मथुरा-वृंदावन और अन्य राज्यों से हैं। इस बर्बादी में किसी को कुछ गलत नहीं लगता — क्योंकि बिल देना ही नहीं है। कुछ दुकानें, होटल, होम स्टे जो निजी निजी घरों में भी हैं, वहां जरूर मीटर लगे हुए हैं — लेकिन बाकी जगह?

जब मंत्री, मुख्यमंत्री सहित बड़े-बड़े नेता और अधिकारी धीरेंद्र शास्त्री के चरणों में हों, तो बिजली विभाग का कोई अधिकारी क्या कार्रवाई करेगा?

जबकि होना यह चाहिए कि: हर दुकान पर व्यावसायिक मीटर कनेक्शन लगे, बिजली का सही बिल लिया जाए, संसाधनों का संरक्षण हो…

Narendra Modi जी, आप खुद से 50 साल छोटे धीरेंद्र शास्त्री को छोटा भाई बताते हैं — आपसे निवेदन है कि अपने छोटे भाई को समझाइए कि इस तरह की चोरी और बर्बादी से Bageshwar Dham Sarkar में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच गलत संदेश जाता है।

Dr Mohan Yadav जी, आपकी भी श्रद्धा हो सकती है — लेकिन श्रद्धा अपनी जगह है और प्रदेश के संसाधनों की बर्बादी अपनी जगह। यह आपकी भी जिम्मेदारी है कि इस पर सख्ती से रोक लगाएं।


यदि आप अंधविश्वास फैलाने का काम करते हैं और जाति व्यवस्था की श्रेष्ठता और निम्नता के वक़ील हैं , सरकार के समर्थक संत हैं और मुसलमान और इस्लाम को गाली बकते हैं तो आप विदेशी धन लेने के हकदार हैं!

-शीतल पी सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)


बागेश्वर धाम को विदेशी चंदा लेने की मंजूरी, गृह मंत्रालय ने दिया FCRA रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश स्थित बागेश्वर धाम को विदेशी फंड (चंदा) प्राप्त करने की मंजूरी दे दी है। गृह मंत्रालय ने बागेश्वर धाम से जुड़े संगठन को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकरण प्रदान किया है। यह रजिस्ट्रेशन किसी भी संस्था के लिए जरूरी होता है, यदि वह विदेश से आर्थिक सहायता लेना चाहती है।

बागेश्वर धाम का संचालन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करते हैं, जो अपने धार्मिक बयानों और ‘हिंदू राष्ट्र’ की वकालत को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। बताया गया है कि यह संगठन अब ‘धार्मिक (हिंदू)’ श्रेणी के तहत विदेशी चंदा प्राप्त कर सकेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल तक देश में कुल 14,538 एनजीओ के पास वैध FCRA पंजीकरण है। इनमें से केवल 6 संगठनों को ‘धार्मिक (हिंदू)’ श्रेणी में विदेशी फंड लेने की अनुमति मिली है, जिनमें बागेश्वर धाम भी शामिल है। अन्य संगठनों में पश्चिम बंगाल के बोलपुर में रामकृष्ण मिशन, बिहार के पूर्णिया में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और कर्नाटक के धर्मस्थल स्थित संस्थान शामिल हैं।

FCRA पंजीकरण पांच साल के लिए वैध होता है, जिसके बाद इसे नवीनीकरण कराना पड़ता है। वर्ष 2015 के बाद से अब तक 18 हजार से ज्यादा एनजीओ के पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं।

गृह मंत्रालय ने हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान FCRA कानून में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा था, हालांकि विपक्ष और कुछ राज्यों के विरोध के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई ईसाई संगठनों ने चिंता जताई थी।

बागेश्वर धाम के इस पंजीकरण को धार्मिक संस्थाओं के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों के संदर्भ में एक अहम कदम माना जा रहा है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन