बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से एक चौंकाने वाला सरकारी पत्र सामने आया है, जिसने प्रशासन की निष्पक्षता और योगी सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह पत्र साफ तौर पर बताता है कि जाति विशेष (यादव) और धर्म विशेष (मुस्लिम) समुदाय के लोगों को टारगेट कर ग्राम पंचायत की ज़मीनों से कब्जा हटाने का अभियान चलाया जा रहा है।
यह पत्र जिला पंचायत राज अधिकारी, बलिया द्वारा 2 अगस्त 2025 को जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि 57691 ग्राम पंचायतों में यादव और मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित कर ग्राम सभा की ज़मीनें—जैसे पोखरे, खाद गड्ढे, खलिहान, खेल मैदान, श्मशान भूमि और पंचायत भवन—को मुक्त कराया जाए।
क्या है पत्र में?
पत्र में साफ लिखा है कि—”जाति विशेष (यादव), धर्म विशेष (मुस्लिम) के द्वारा अवैध कब्जों से ग्राम सभा की जमीनों…को मुक्त कराने हेतु अभियान चलाने के संबंध में…”
यानी अवैध कब्जा हटाने की मुहिम को सीधे-सीधे दो समुदायों से जोड़ दिया गया है, जिससे यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या अन्य जातियों और धर्मों के लोगों के अवैध कब्जों पर सरकार आंखें मूंदे बैठी है?
अब देखना है कि योगी सरकार इस मामले में क्या सफाई देती है। क्या यह आदेश वापस लिया जाएगा? या फिर प्रशासन इसे ही ‘नए भारत’ की कार्रवाई बताकर सही ठहराएगा?
मनीष यादव-
क्या सरकार की नजर में ग़ैरकानूनी कब्ज़ा तब तक जुर्म नहीं जब तक वो यादव या मुसलमान न हो?
हर जाति का व्यक्ति सरकारी ज़मीन पर है, लेकिन टारगेट सिर्फ़ चुनिंदा समुदाय यही है इस सबका साथ सबका विकास का असली चेहरा
उ०प्र० में 57691 ग्राम पंचायतों में जाति विशेष (यादव) धर्म विशेष (मुस्लिम) के द्वारा अवैध कब्जों से ग्राम सभा की जमीनों, पोखरों, खाद गडढ़ों, खलिहानों, खेल मैदान, शमशान भूमि एवं ग्राम पंचायत भवन को मुक्त कराने हेतु अभियान चलाया जा रहा है
देखें आदेश…

उपरोक्त पत्र जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में हंगामा मच गया। आनन फानन हरकत में आई सरकारी मशीनरी ने पत्र पर यूटर्न लिया और इसे खारिज करते हुए दलील दी कि- यह भूलवश हुई त्रुटी है। पढ़ें बाद में जारी हुआ पत्र…



